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गन्ना भुगतान न होने से किसान परेशान
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गढ़ीपुख्ता। ऊन चीनी मिल का पेराई सत्र संपन्न हुए एक महीना बीत चुका है, लेकिन भुगतान नहीं हो पा रहा है। डीएम द्वारा बार-बार चेतावनी देने के बावजूद भी भुगतान की स्थिति जस की तस बनी है।
ऊन की सुपीरियर फूड ग्रेंस प्राइवेट लिमिटेड ने गत पांच मई को पेराई सत्र का समापन कर दिया गया था, लेकिन अभी तक एक जनवरी तक का ही भुगतान किया है। मिल पर अभी भी लगभग 210 करोड़ रुपये का बकाया भुगतान है। डीएम ने गन्ना भुगतान की समीक्षा में प्रतिमाह चीनी मिलों को भुगतान का लक्ष्य दिया गया था।
सुपीरियर फूड ग्रेंस प्राइवेट लिमिटेड को मई माह में 41 करोड़ रुपये भुगतान करने के निर्देश दिए थे। जिस पर मिल के अधिकारियों ने 30 करोड़ का भुगतान करने का आश्वासन दिया था, लेकिन 41 करोड़ तो दूर 30 करोड़ रुपये का भी भुगतान नहीं किया गया। मई माह में मात्र आठ दिन का ही भुगतान किया गया। जिस प्रकार मिल एक माह में मात्र आठ दिन का ही भुगतान कर रही है, उससे आगामी पेराई सत्र के शुरू होने से पहले भुगतान होना संभव दिखाई नहीं देता। इस समय किसान को धन की सबसे अधिक आवश्यकता होती है।
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किसान गन्ने के लिए खेत तैयार कर बुआई करता है। खाद व कीटनाशक मई और जून के महीने में ही डाली जाती है। लेकिन किसानों की जेब खाली है किसान आगे गन्ने की फसल कैसे तैयार कर पाएगा। इसके अलावा घर में शादी ब्याह, बच्चों की फीस आदि के लिए भी किसान परेशान हैं। किसान प्रमोद कुमार कवरपाल आदि का कहना है कि चीनी मिल किसानों को भुगतान में इसलिए आनाकानी कर रही है कि किसान को मिल से दवाई व खाद लेने पर मजबूर कर सकें।
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ऊन की सुपीरियर फूड ग्रेंस प्राइवेट लिमिटेड ने गत पांच मई को पेराई सत्र का समापन कर दिया गया था, लेकिन अभी तक एक जनवरी तक का ही भुगतान किया है। मिल पर अभी भी लगभग 210 करोड़ रुपये का बकाया भुगतान है। डीएम ने गन्ना भुगतान की समीक्षा में प्रतिमाह चीनी मिलों को भुगतान का लक्ष्य दिया गया था।
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सुपीरियर फूड ग्रेंस प्राइवेट लिमिटेड को मई माह में 41 करोड़ रुपये भुगतान करने के निर्देश दिए थे। जिस पर मिल के अधिकारियों ने 30 करोड़ का भुगतान करने का आश्वासन दिया था, लेकिन 41 करोड़ तो दूर 30 करोड़ रुपये का भी भुगतान नहीं किया गया। मई माह में मात्र आठ दिन का ही भुगतान किया गया। जिस प्रकार मिल एक माह में मात्र आठ दिन का ही भुगतान कर रही है, उससे आगामी पेराई सत्र के शुरू होने से पहले भुगतान होना संभव दिखाई नहीं देता। इस समय किसान को धन की सबसे अधिक आवश्यकता होती है।
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किसान गन्ने के लिए खेत तैयार कर बुआई करता है। खाद व कीटनाशक मई और जून के महीने में ही डाली जाती है। लेकिन किसानों की जेब खाली है किसान आगे गन्ने की फसल कैसे तैयार कर पाएगा। इसके अलावा घर में शादी ब्याह, बच्चों की फीस आदि के लिए भी किसान परेशान हैं। किसान प्रमोद कुमार कवरपाल आदि का कहना है कि चीनी मिल किसानों को भुगतान में इसलिए आनाकानी कर रही है कि किसान को मिल से दवाई व खाद लेने पर मजबूर कर सकें।