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कार्रवाई झेल रहे किसान, प्रबंधन के नहीं इंतजाम 19-45-19
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शामली। कृषि यंत्रों की कमी और अगली फसल की जल्दबाजी में किसान खेतों में पराली को आग के हवाले कर रहे हैं। किसानों को न तो पर्याप्त यंत्र मिल पा रहे हैं और न ही पशुपालन किसानों से पराली लेकर पशुशालाओं तक पहुंचा पा रहा है।
जिले में धान का करीब 22 हजार हेक्टेयर रकबा है। इसमें सबसे ज्यादा रकबा यमुना खादर क्षेत्र में है। यहां पर बड़े किसान कंबाइन मशीन से धान की कटाई करते हैं। बची हुई पराली को खेतों में जला दिया जाता है। खेतों में फसल अवशेष जलाने की घटनाएं सेटेलाइट से चिह्नित हो जाती हैं और किसान पर जुर्माना लगा दिया जाता है। किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सवित मलिक ने बताया कि वह प्रदूषण फैलाने का समर्थन नहीं करते, लेकिन किसानों को यंत्र नहीं मिल पा रहे तो वे क्या करेंगे। यंत्र महंगे होने के कारण आम किसान की पहुंच में नहीं हैं। सेटेलाइट से पराली और पत्ती जलाने का तो पता लगा लिया जाता है, लेकिन किसान की फसलों के नुकसान का आंकलन क्यों नहीं किया जाता।
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आठ किसानों पर जुर्माना, पिछले साल 65 पर हुई थी कार्रवाई
जिले में अब तक सात किसानों पर फसल अवशेष जलाने पर जुर्माना लगाया गया है, जबकि पिछले वर्ष 65 किसानों पर पराली जलाने पर कार्रवाई की गई थी। आठ किसानों पर 2500-2500 रुपये का जुर्माना लगाया गया है, जबकि कूड़ा जलाने के एक मामले में ग्रामीणों की पहचान नहीं हो सकी।
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किराये पर यंत्र लेकर पराली से बना सकते हैं खाद
कृषि विभाग के अधिकारियों के मुताबिक जिले में नौ फार्म मशीनरी बैंक स्थापित किए गए हैं। इनमें ट्रैक्टर, मल्चर, लैंड लेवलर, जीरो फैटी ड्रिल, सुपर सीडर और एमबी प्लाऊ जैसे यंत्र उपलब्ध हैं। किसान इन यंत्रों को किराये पर लेकर फसल अवशेष का प्रबंधन कर सकते हैं। इसके साथ ही 21 कोऑपरेटिव सोसायटी, तीन गन्ना समितियों के अलावा भैंसानी इस्लामपुर, लिलौन, इस्सोपुर टील में यंत्र उपलब्ध हैं। व्यक्तिगत योजना में 12 किसानों ने ही 50 प्रतिशत अनुदान पर यंत्र लिए हैं।
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पशुपालन विभाग ने नहीं ली पराल
शासन ने निर्देश दिए हैं कि पशुपालन विभाग किसानों से पराली लेकर गोशालाओं में भिजवाएगा, लेकिन जिले में पराली नहीं ली गई है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. यशवंत सिंह ने बताया कि ग्राम प्रधानों को डीएम के माध्यम से पत्र भेजकर पराली गोशालाओं तक पहुंचवाने के लिए कहा गया है। कुछ स्थानों पर पराली गोशालाओं में भेजी भी गई है।
कोट...
जिले में बनाए गए फार्म मशीनरी बैंक किसान समितियों ने लिए हैं। वह स्वयं अपना काम करेंगे और यदि कोई किसान उनसे यंत्र किराये पर लेना चाहे तो वह ले सकता है। इस संबंध में सभी विभागों को भी सूची भेज दी गई है। पराली जलाने पर पूरी तरह रोक है। इस पर निगरानी के लिए गांव स्तर तक के कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। किसान पराली को जलाने के बजाए उसे खेत में ही गलाएं। वह खाद के रूप में काम करेगी। - डा. शिवकुमार केसरी, उप निदेशक कृषि
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जिले में धान का करीब 22 हजार हेक्टेयर रकबा है। इसमें सबसे ज्यादा रकबा यमुना खादर क्षेत्र में है। यहां पर बड़े किसान कंबाइन मशीन से धान की कटाई करते हैं। बची हुई पराली को खेतों में जला दिया जाता है। खेतों में फसल अवशेष जलाने की घटनाएं सेटेलाइट से चिह्नित हो जाती हैं और किसान पर जुर्माना लगा दिया जाता है। किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सवित मलिक ने बताया कि वह प्रदूषण फैलाने का समर्थन नहीं करते, लेकिन किसानों को यंत्र नहीं मिल पा रहे तो वे क्या करेंगे। यंत्र महंगे होने के कारण आम किसान की पहुंच में नहीं हैं। सेटेलाइट से पराली और पत्ती जलाने का तो पता लगा लिया जाता है, लेकिन किसान की फसलों के नुकसान का आंकलन क्यों नहीं किया जाता।
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आठ किसानों पर जुर्माना, पिछले साल 65 पर हुई थी कार्रवाई
जिले में अब तक सात किसानों पर फसल अवशेष जलाने पर जुर्माना लगाया गया है, जबकि पिछले वर्ष 65 किसानों पर पराली जलाने पर कार्रवाई की गई थी। आठ किसानों पर 2500-2500 रुपये का जुर्माना लगाया गया है, जबकि कूड़ा जलाने के एक मामले में ग्रामीणों की पहचान नहीं हो सकी।
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किराये पर यंत्र लेकर पराली से बना सकते हैं खाद
कृषि विभाग के अधिकारियों के मुताबिक जिले में नौ फार्म मशीनरी बैंक स्थापित किए गए हैं। इनमें ट्रैक्टर, मल्चर, लैंड लेवलर, जीरो फैटी ड्रिल, सुपर सीडर और एमबी प्लाऊ जैसे यंत्र उपलब्ध हैं। किसान इन यंत्रों को किराये पर लेकर फसल अवशेष का प्रबंधन कर सकते हैं। इसके साथ ही 21 कोऑपरेटिव सोसायटी, तीन गन्ना समितियों के अलावा भैंसानी इस्लामपुर, लिलौन, इस्सोपुर टील में यंत्र उपलब्ध हैं। व्यक्तिगत योजना में 12 किसानों ने ही 50 प्रतिशत अनुदान पर यंत्र लिए हैं।
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पशुपालन विभाग ने नहीं ली पराल
शासन ने निर्देश दिए हैं कि पशुपालन विभाग किसानों से पराली लेकर गोशालाओं में भिजवाएगा, लेकिन जिले में पराली नहीं ली गई है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. यशवंत सिंह ने बताया कि ग्राम प्रधानों को डीएम के माध्यम से पत्र भेजकर पराली गोशालाओं तक पहुंचवाने के लिए कहा गया है। कुछ स्थानों पर पराली गोशालाओं में भेजी भी गई है।
कोट...
जिले में बनाए गए फार्म मशीनरी बैंक किसान समितियों ने लिए हैं। वह स्वयं अपना काम करेंगे और यदि कोई किसान उनसे यंत्र किराये पर लेना चाहे तो वह ले सकता है। इस संबंध में सभी विभागों को भी सूची भेज दी गई है। पराली जलाने पर पूरी तरह रोक है। इस पर निगरानी के लिए गांव स्तर तक के कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। किसान पराली को जलाने के बजाए उसे खेत में ही गलाएं। वह खाद के रूप में काम करेगी। - डा. शिवकुमार केसरी, उप निदेशक कृषि