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Shamli News: लैंगिक समानता के लिए छात्रों को विशेषज्ञ करेंगे जागरूक
Mon, 20 May 2024 01:07 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Mon, 20 May 2024 01:07 AM IST
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शामली। नई शिक्षा नीति के तहत जनपद के माध्यमिक विद्यालयों में लैंगिक समानता को प्रोत्साहित करने के लिए विद्यार्थियों को जागरूक किया जाएगा। विद्यालयों में प्रार्थना स्थल पर लैंगिक समानता को प्रोत्साहित करने वाली लघु कथाएं सुनाई जाएंगी।
माध्यमिक स्कूलों में अब नए सत्र से प्रार्थना सभा में लैंगिक समानता के बारे में जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही प्रार्थना स्थल पर विभिन्न क्षेत्रों में अपना परचम लहरा चुकी देश की महिलाओं के व्यक्तित्व के बारे में विद्यार्थियों को जानकारी दी जाएगी। लैंगिक समानता का महत्व, प्रभाव व परिणाम के बारे में विशेषज्ञ शिक्षक व गण्यमान्य व्यक्तियों द्वारा विद्यार्थियों को जागरूक किया जाएगा। जिले में संचालित 111 राजकीय, वित्तविहीन व एडेड कॉलेज संचालित है। सभी में प्रत्येक सप्ताह में नियमित तरीके से जागरुकता कार्यक्रम होंगे। इसमें विद्यार्थी भी सहभागिता करेंगे।
इस संबंध में डीआईओएस जेएस शाक्य ने सभी माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यों का पत्र भेजकर प्रार्थना स्थल पर कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। इसमें कक्षा 9 से 12वीं के विद्यार्थियों को जागरूक किया जाएगा। जिसमें प्रेरक प्रसंग संक्षिप्त उद्भोधन, गीत आदि गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा।
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लैंगिक समानता जरूरी
डीआईओएस जेएस शाक्य ने बताया कि लैंगिक समानता महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा को रोकती है। आर्थिक समृद्धि के लिए यह आवश्यक है। जिस समाज में महिलाओं और पुरुषों को समान माना जाता है, वहां महिलाएं अधिक सुरक्षित और स्वस्थ हैं। इसके साथ ही लैंगिक समानता एक मानव अधिकार भी है। विद्यार्थियों को जागरूक कर बेहतर भविष्य के लिए तैयार किया जाएगा।
क्या है लैंगिक असमानता
लैंगिक असमानता का तात्पर्य लैंगिक आधार पर महिलाओं के साथ भेदभाव से है। इसमें प्रमुख रूप से सामाजिक तौर पर महिलाओं को घरेलू निर्णयाें में भूमिका सीमित रहना, आर्थिक क्षेत्र में कार्यरत महिला और पुरुष के पारिश्रमिक में अंतर, औद्योगिक क्षेत्र में महिलाओं को पुरुषों के सापेक्ष कम वेतन दिया जाना शामिल है। इसी असमानता को दूर करने के निरंतर प्रयास शासन द्वारा हो रहे हैं।
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माध्यमिक स्कूलों में अब नए सत्र से प्रार्थना सभा में लैंगिक समानता के बारे में जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही प्रार्थना स्थल पर विभिन्न क्षेत्रों में अपना परचम लहरा चुकी देश की महिलाओं के व्यक्तित्व के बारे में विद्यार्थियों को जानकारी दी जाएगी। लैंगिक समानता का महत्व, प्रभाव व परिणाम के बारे में विशेषज्ञ शिक्षक व गण्यमान्य व्यक्तियों द्वारा विद्यार्थियों को जागरूक किया जाएगा। जिले में संचालित 111 राजकीय, वित्तविहीन व एडेड कॉलेज संचालित है। सभी में प्रत्येक सप्ताह में नियमित तरीके से जागरुकता कार्यक्रम होंगे। इसमें विद्यार्थी भी सहभागिता करेंगे।
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इस संबंध में डीआईओएस जेएस शाक्य ने सभी माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यों का पत्र भेजकर प्रार्थना स्थल पर कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। इसमें कक्षा 9 से 12वीं के विद्यार्थियों को जागरूक किया जाएगा। जिसमें प्रेरक प्रसंग संक्षिप्त उद्भोधन, गीत आदि गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा।
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लैंगिक समानता जरूरी
डीआईओएस जेएस शाक्य ने बताया कि लैंगिक समानता महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा को रोकती है। आर्थिक समृद्धि के लिए यह आवश्यक है। जिस समाज में महिलाओं और पुरुषों को समान माना जाता है, वहां महिलाएं अधिक सुरक्षित और स्वस्थ हैं। इसके साथ ही लैंगिक समानता एक मानव अधिकार भी है। विद्यार्थियों को जागरूक कर बेहतर भविष्य के लिए तैयार किया जाएगा।
क्या है लैंगिक असमानता
लैंगिक असमानता का तात्पर्य लैंगिक आधार पर महिलाओं के साथ भेदभाव से है। इसमें प्रमुख रूप से सामाजिक तौर पर महिलाओं को घरेलू निर्णयाें में भूमिका सीमित रहना, आर्थिक क्षेत्र में कार्यरत महिला और पुरुष के पारिश्रमिक में अंतर, औद्योगिक क्षेत्र में महिलाओं को पुरुषों के सापेक्ष कम वेतन दिया जाना शामिल है। इसी असमानता को दूर करने के निरंतर प्रयास शासन द्वारा हो रहे हैं।