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Shamli News: अधिशासी अभियंता पर 25 हजार रुपये का जुर्माना
Thu, 19 Dec 2024 11:51 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Thu, 19 Dec 2024 11:51 PM IST
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शामली। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग शामली ने विद्युत निगम द्वारा उपभोक्ता का कनेक्शन विच्छेदन न करने पर अधिशासी अभियंता पर 25 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित करने का आदेश सुनाया है।
गांव भभीसा निवासी देवराज आर्य ने आयोग में 24 सितंबर 2020 को परिवाद दायर कराया था कि उसने अधिशासी अभियंता विद्युत वितरण खंड द्वितीय खेड़ीकरमू से दस हॉर्स पावर का कनेक्शन लिया था। गांव में स्थायी रूप से न होने और बीमार होने के कारण खेतीबाड़ी करने में असमर्थ था। उसने 10 मई 2016 को कनेक्शन विच्छेदन का शुल्क जमा कराया था। कई बार मौखिक व लिखित रूप में देेने के बाद भी स्थायी विच्छेदन नहीं किया गया।
आयोग के अध्यक्ष हेमंत कुमार गुप्ता ने परिवाद की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान पाया गया कि परिवादी द्वारा विद्युत विच्छेदन शुल्क जमा करने के बाद भी विद्युत विच्छेदन न करके विपक्षी अधिशासी अभियंता ने सेवा में लापरवाही की है और मनमाने रूप से विधि विरुद्ध तरीके से विभिन्न धन राशियों का बिल भेजकर अनुचित व्यापार व्यवहार किया है।
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आयोग के अध्यक्ष ने आदेश सुनाते हुए परिवादी को हुई शारीरिक, मानसिक व मानसिक स्थिति के लिए 25 हजार रुपये मय छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज वाद योजन की तिथि से भुगतान की तिथि तक और परिवाद व्यय 7500 रुपये और अनुचित व्यापार व्यवहार के लिए 25 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड की धनराशि अधिशासी अभियंता के वेतन से कटौती की जाएगा। अर्थदंड की धनराशि नियमानुसार राजकोष में जमा होगी।
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गांव भभीसा निवासी देवराज आर्य ने आयोग में 24 सितंबर 2020 को परिवाद दायर कराया था कि उसने अधिशासी अभियंता विद्युत वितरण खंड द्वितीय खेड़ीकरमू से दस हॉर्स पावर का कनेक्शन लिया था। गांव में स्थायी रूप से न होने और बीमार होने के कारण खेतीबाड़ी करने में असमर्थ था। उसने 10 मई 2016 को कनेक्शन विच्छेदन का शुल्क जमा कराया था। कई बार मौखिक व लिखित रूप में देेने के बाद भी स्थायी विच्छेदन नहीं किया गया।
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आयोग के अध्यक्ष हेमंत कुमार गुप्ता ने परिवाद की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान पाया गया कि परिवादी द्वारा विद्युत विच्छेदन शुल्क जमा करने के बाद भी विद्युत विच्छेदन न करके विपक्षी अधिशासी अभियंता ने सेवा में लापरवाही की है और मनमाने रूप से विधि विरुद्ध तरीके से विभिन्न धन राशियों का बिल भेजकर अनुचित व्यापार व्यवहार किया है।
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आयोग के अध्यक्ष ने आदेश सुनाते हुए परिवादी को हुई शारीरिक, मानसिक व मानसिक स्थिति के लिए 25 हजार रुपये मय छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज वाद योजन की तिथि से भुगतान की तिथि तक और परिवाद व्यय 7500 रुपये और अनुचित व्यापार व्यवहार के लिए 25 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड की धनराशि अधिशासी अभियंता के वेतन से कटौती की जाएगा। अर्थदंड की धनराशि नियमानुसार राजकोष में जमा होगी।