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मराठा कालीन सिद्धपीठ बाला सुंदरी मंदिर, जहां होती है हर मनोकामना पूरी

Mon, 04 Apr 2022 12:27 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 04 Apr 2022 12:27 AM IST
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Every wish is fulfilled in Bala Sundari temple
कैराना। प्राचीन देवी मंदिर तालाब श्रृंखला में 400 वर्ष प्राचीन मराठा कालीन सिद्धपीठ बाला सुंदरी मंदिर श्रद्धा और अद्भुत भवन निर्माण कला के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। यहां सच्चे मन से मांगी गई मुराद मां शेरावाली अवश्य पूरी करती है। नवरात्र में बाला सुंदरी मंदिर को दुल्हन की तरह सजाया गया है। सुबह के समय आरती व पूजन और शाम के समय महाआरती के बाद प्रसाद वितरण किया जाता है।
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मंदिर के पुजारी अशोक कुमार शास्त्री ने बताया कि मंदिर के गर्भगृह में ऊपर की साइड एक छोटा सा रास्ता है। लकड़ी की सीढियो से उस रास्ते से अंदर जाया जाता है। जिसके बाद घुमावदार सीढ़ियां आती है। मंदिर में कुल सात मंजिल है। प्रत्येक मंजिल पर बीच में श्रद्धालुओं के बैठने के लिए पक्का फर्श है और चारों ओर घुमावदार सीढ़ियां हैं। सबसे ऊपर सातवीं मंजिल पर श्रद्धालु बैठकर अपनी थकान मिटाते थे। यहां बैठकर करीब 7 किलोमीटर दूर बह रही यमुना नदी के दर्शन करते थे। लेकिन पिछले कुछ सालों से सीढ़ियां बंद कर दी गई है। 400 वर्ष प्राचीन मराठा कालीन मंदिर की दीवारों पर करोड़ों सीपियों को पीस कर उनका प्लास्टर किया गया था। जिस कारण 400 साल के लंबे समय के बावजूद आज भी मंदिर की दीवारें अपनी चमक बिखेरती है। 400 साल में आंधी तूफान का मंदिर के भवन पर कोई असर नहीं हुआ। मंदिर के अंदर मां शेरावाली की अद्भुत प्रतिमा विराजमान है। मंदिर के पुजारी ने बताया कि यहां नवरात्र में दूसरे-प्रदेशों के साथ ही पुलिस-प्रशासन के बड़े-बड़े अधिकारी व नेतागण मां के दर्शन करते है।
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मराठा कालीन बाला सुंदरी मंदिर की इतिहास
श्रीदेवी मंदिर तालाब सेवा समिति के सचिव सुभाष सिंघल ने बताया कि करीब 400 साल पहले मराठा काल में राजस्थान की एक रियासत में राजा के दरबार में कैराना निवासी लाला रंगीलाल मुनीम थे। लाला रंगीलाल के कोई संतान नहीं थी। लेकिन वह बहुत ही धार्मिक प्रवृत्ति के थे। लाला रंगीलाल ने अपनी 164 बीघा जमीन देवी मंदिर तालाब को दान दे दी थी। जिस पर बाला सुंदरी का भव्य मंदिर बनाया गया। मंदिर के पास ही श्रद्धालुओं की प्यास बुझाने के लिए एक कुआं था, लेकिन करीब 30 साल पहले कुआ बंद कर दिया गया और वहां पर श्री गणेश जी का मंदिर बनाया गया। लाला रंगीलाल की दान की गई भूमि के मध्य प्राचीन तालाब और उसके चारों और बनखंडी महादेव मंदिर, बालाजी धाम, मां काली मंदिर, विश्वकर्मा मंदिर श्रद्धालुओं के मन में भक्ति के विशेष आनंद की अनुभूति कराते हैं।
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