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बूढ़ा भले ही हो गया पंचायत में जरूर जाऊंगा

Thu, 02 Sep 2021 12:01 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 02 Sep 2021 12:01 AM IST
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Even if I am old, I will definitely go to the panchayat: Baba Surajmal
शामली क्षेत्र के गांव भैसवाल में आयोजित पंचायत में बोलते बाबा सूरजमल - फोटो : SHAMLI
शामली। पंचायत की अध्यक्षता कर रहे बत्तीसा खाप के चौधरी बाबा सूरजमल ने कहा कि बूढ़ा हो गया, अब चलने में भी असमर्थ हूं। आदमी तब तक बूढ़ा नहीं होता, जब तक उसका मन नहीं मानता और मेरा मन भी नहीं मान रहा, पंचायत में जरूर चलूंगा।
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वहीं, गठवाला खाप के थांबेदार बाबा श्याम सिंह ने कहा कि कुछ लोग पंचायत को लेकर सर्वेसर्वा भी मना करेगा, तब भी पंचायत होगी और ज्यादा से ज्यादा संख्या लोग पहुंचेंगे। पंचायत संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर हो रही है। जिस तरह भगीरथ गंगा को लाए थे, संयुक्त मोर्चा भी एक गंगा की स्थापना कर रहा है। वह गंगा मुजफ्फरनगर से होकर निकलेगी। जिसे इस गंगा में गोता लगाना है वो तो लगाएगा ही, जो निजी स्वार्थ में डूब हैं, वह भी शामिल हो जाएं, नहीं तो पछताना पड़ेगा। गठवाला खाप सबसे आगे इस महापंचायत में रहेगी। अब किसी के फरमान की जरूरत नहीं है।
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इसके अलावा पंचायत में लाटियान खाप के चौधरी विरेंद्र, कालखंडे खाप के चौधरी संजय, रविंद्र चौधरी, प्रसन्न चौधरी, संवित, शेर सिंह राणा, सपा जिलाध्यक्ष अशोक चौधरी, रालोद जिलाध्यक्ष मुकेश सैनी, चौधरी ओमपाल, शुभम मलिक, कंवरपाल बालैनी, जयराज प्रधान, अमित तोमर आदि ने भी संबोधित किया।
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बारिश के चलते खड़े होकर सुना संबोधन
- भैंसवाल गांव में पंचायत जूनियर हाईस्कूल के मैदान में होनी थी। ग्रामीणों ने इसकी सभी तैयारी पूरी कर ली थी। लेकिन बुधवार को मौसम अचानक खराब हो गया। जिसके चलते पंचायत का स्थान बदलकर के गांव निवासी करण सिंह के घेर में किया गया। वहां भी ज्यादा लोगों की बैठने की व्यवस्था नहीं थी। जिसके चलते बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने खड़े होकर ही वक्ताओं के संबोधन सुने।

सरकार और किसानों का बदल जाएगा संबंध
पंचायत को संबोधित करते हुए प्रोफेसर सुधीर पंवार ने कहा कि संगठित होते ही सरकारों को किसानों की चिंता सताने लगी है, पंजाब सरकार ने गन्ना मूल्य में 50 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाया है, प्रदेश के मुख्यमंत्री ने पराली जलाने के मुकदमे वापिस लेने और गन्ना मूल्य बढ़ाने की घोषणा की है। पांच सितंबर की किसान महापंचायत ऐतिहासिक होने जा रही है। इसके बाद सरकार और किसानों का संबंध बदल जाएगा। उसे किसानों की बात माननी पड़ेगी।
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