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पैसा, सेहत, इज्जत और परिवार को खत्म कर देती है ड्रग्स

Sun, 26 Jun 2022 12:09 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 26 Jun 2022 12:09 AM IST
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Drugs destroy money, health, reputation and family
शामली, कैराना। ड्रग्स एक ऐसा मीठा जहर है जो धीरे-धीरे लोगों का पैसा, इज्जत, सेहत व परिवार की सुख शांति को खत्म कर देता है। ड्रग्स अपराध की सीढ़ी का पहला पायदान है जिस पर आगे चल कर ड्रग्स लेने वाला अपराध की दलदल में धंसता चला जाता है।
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ड्रग्स जैसे अफीम, चरस, गांजा, स्मैक, हेरोइन के अलावा नशीली गोलियां व नशीले इंजेक्शन से युवा अपनी जिंदगी को बर्बाद करने पर तुले है। अभी पिछले माह ही नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो दिल्ली ने शाहीन बाग से 400 करोड़ की हेरोइन पकड़ी थी। जिसके तार अफगानिस्तान से लेकर दुबई तक जुड़े थे। एनसीबी दिल्ली ने हेरोइन तस्करी के लिए पैसा दुबई से लाने व ले जाने के मामले में हवाला कारोबारी कैराना निवासी शमीम को गिरफ्तार किया था। गली मोहल्लो में नशीले इंजेक्शन व गोलियों का युवा सेवन करके अपनी जिंदगी को मौत के मुंह में ले जा रहे है। नशीले इंजेक्शन व स्मैक से युवा बर्बाद होते जा रहे हैं। समय समय पर पुलिस व अन्य एजेंसियां ड्रग्स कारोबारी को जेल भेजती है लेकिन ड्रग्स का कारोबार रूकने का नाम नहीं लेता है। कोतवाली प्रभारी अनिल कपरवान ने बताया कि ड्रग्स के विरूद्ध छापामारी की जाती है। अभिभावकों को भी अपने बच्चों को ड्रग्स के जहर से बचाने के लिए उन पर ध्यान देना चाहिए और ड्रग्स को गोपनीय सूचना पुलिस को दें ताकि युवाओं को ड्रग्स से बचाया जा सके।
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3 सालों में कोतवाली में दर्ज मुकदमे
2020 में कैराना कोतवाली में एनडीपीएस के 24 मुकदमें दर्ज किए गए। जबकि 2021 में 34 मुकदमे एनडीपीएस के दर्ज किए गए। 2022 के 6 माह के अंदर 5 मामले ड्रग्स के पकड़े गए हैं। इनमें डोडा, चरस, स्मैक, हेरोइन व नशीली दवाईयां शामिल थी।
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ड्रग्स के मामलों में अदालतों का कड़ा रुख
ड्रग्स से संबधित मुकदमो में अदालतों का भी कड़ा रुख हो गया है। करीब 4 माह पहले कैराना स्थित अपर जिला सत्र न्यायाधीश (एनडीपीएस) ने 13 किलो डोडे के साथ पकड़े गए कुख्यात फुरकान को 10 साल के कारावास की सजा सुनाई थी। एक माह पहले भी अदालत ने झिंझाना के गाड़ीवाला चौराहे पर दवाई की दुकान करने वाले वेदखेड़ी निवासी देवेंद्र को 38 हजार 510 नशीली प्रतिबंधित गोलियों के मामले में 10 साल के कारावास व एक लाखरुपये अर्थदंड की सजा सुनाई थी।

अपराध की सीढ़ी का पहला पायदान ड्रग्स और अंत में मौत
ड्रग्स इंस्पेक्टर संदीप कुमार ने बताया कि प्रतिबंधित नशीली दवाई मरीज को डिप्रेशन से बचाने के लिए डॉक्टर लिखते है। मेडिकल स्टोर संचालक को बिना डॉक्टर के पर्चे के दवाई नहीं देनी चाहिए, यह अपराध है। बिना किसी कारण नशा लेने से पहले युवक का लीवर, किडनी और दिल खराब होता है। उसके बाद मस्तिष्क पर असर पड़ता है। हाथ-पैर कांपने लगते है। ड्रग्स लेने वाला कोई काम नहीं कर पाता। धीरे-धीरे मौत की ओर बढ़ता है। ड्रग्स का आदी ड्रग्स खरीदने के लिए चोरी, लूट तक करने लगता है। पैसा कमा नहीं पाता और अपराध की दलदल में फंस जाता है। समय-समय पर ड्रग्स माफियाओं के विरुद्ध अभियान चलाया जाता है। मेडिकल स्टोर संचालक भी बिना डाक्टर के पर्चे के दवाई न दें। ऐसा करना कानूनी अपराध है।
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