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दोस्त को खोने का गम, देश के लिए शहीद होने पर गर्व
Thu, 21 Feb 2019 11:47 PM IST
NAVEEN GUPTA
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Published by: NAVEEN GUPTA
Updated Thu, 21 Feb 2019 11:47 PM IST
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- फोटो : amarujala
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पुलवामा में 14 फरवरी को सीआरपीएफ पर हुए हमले में शामली के मोहल्ला रेलपार निवासी अमित कुमार और बनत निवासी प्रदीप कुमार के शहीद होने के गम से लोग अभी उबर नहीं पा रहे है। लोगों का शहीद जवानों का याद कर उन्हें श्रद्धांजलि देने का सिलसिला जारी है। बृहस्पतिवार को शहीद अमित कुमार के दोस्तों ने उनके आवास पर पहुंचकर परिजनों से मिलकर दुख साझा किया। देश के लिए शहीद हुए दोस्त के साथ बीते पलों को याद करते हुए भावुक भी हो गए।
मोहल्ला रेलपार निवासी सूरज ने बताया कि वैसे तो अमित कुमार उनसे करीब दो साल बड़े थे, लेकिन उन्होंने कभी बड़ा होने की बात महसूस नहीं होने दी। अधिकतर समय उनका साथ-साथ बीतता था। दिसंबर 2017 में वे सीआरपीएफ में भर्ती हो गए थे। भर्ती होने के बाद भी उनमें कोई बदलाव नहीं आया। जब भी छुट्टी आते थे, पहले की तरह मिलजुलकर साथ-साथ रहते थे। वे एक ही बात कहते थे कि उनके दोस्त भी उनकी तरह कामयाब हो जाए। 12 फरवरी को ड्यूटी पर जाते हुए उनसे कहा था कि होली पर आऊंगा। लेकिन उन्हें क्या पता था कि उनका दोस्त अब हमेशा के लिए उनसे दूर जा रहा है। सूरज ने भावुक होते हुए कहा कि उन्हें दोस्त के खोने का गम जिंदगी भर रहेगा। साथ ही उन्हें इस बात का भी गर्व है कि उनका दोस्त देश के लिए शहीद हुआ है।
इसी मोहल्ले के रहने वाले जसकरण सिंह उर्फ जस्सी ने बताया कि शहीद अमित कुमार उनके गहरे दोस्त थे। अमित कुमार होनहार था। उसने रेलवे ग्रुप डी, आरपीएफ और यूपी पुलिस के लिए आवेदन किए थे, लेकिन इसी बीच वे सीआरपीएफ में भर्ती हो गए। वह उनसे सीआरपीएफ की नौकरी के बारे में बताते थे कि वहां कोई दिक्कत परेशानी नहीं है। 12 फरवरी को ड्यूटी पर जाने से पहले उसने जल्द लौटकर आने को कहा था। लेकिन उन्हें क्या पता था कि उनका दोस्त अब कभी लौटकर नहीं आएगा। भले ही उनका दोस्त आज इस दुनिया में नहीं है लेकिन उनकी यादें हमेशा जिंदा रहेगी। उनके दोस्त ने देश के लिए बलिदान दिया है, इसका उन्हें गर्व है। उनकी भी सेना में भर्ती होकर देश सेवा करने की इच्छा है।
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मोहल्ला रेलपार निवासी सूरज ने बताया कि वैसे तो अमित कुमार उनसे करीब दो साल बड़े थे, लेकिन उन्होंने कभी बड़ा होने की बात महसूस नहीं होने दी। अधिकतर समय उनका साथ-साथ बीतता था। दिसंबर 2017 में वे सीआरपीएफ में भर्ती हो गए थे। भर्ती होने के बाद भी उनमें कोई बदलाव नहीं आया। जब भी छुट्टी आते थे, पहले की तरह मिलजुलकर साथ-साथ रहते थे। वे एक ही बात कहते थे कि उनके दोस्त भी उनकी तरह कामयाब हो जाए। 12 फरवरी को ड्यूटी पर जाते हुए उनसे कहा था कि होली पर आऊंगा। लेकिन उन्हें क्या पता था कि उनका दोस्त अब हमेशा के लिए उनसे दूर जा रहा है। सूरज ने भावुक होते हुए कहा कि उन्हें दोस्त के खोने का गम जिंदगी भर रहेगा। साथ ही उन्हें इस बात का भी गर्व है कि उनका दोस्त देश के लिए शहीद हुआ है।
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इसी मोहल्ले के रहने वाले जसकरण सिंह उर्फ जस्सी ने बताया कि शहीद अमित कुमार उनके गहरे दोस्त थे। अमित कुमार होनहार था। उसने रेलवे ग्रुप डी, आरपीएफ और यूपी पुलिस के लिए आवेदन किए थे, लेकिन इसी बीच वे सीआरपीएफ में भर्ती हो गए। वह उनसे सीआरपीएफ की नौकरी के बारे में बताते थे कि वहां कोई दिक्कत परेशानी नहीं है। 12 फरवरी को ड्यूटी पर जाने से पहले उसने जल्द लौटकर आने को कहा था। लेकिन उन्हें क्या पता था कि उनका दोस्त अब कभी लौटकर नहीं आएगा। भले ही उनका दोस्त आज इस दुनिया में नहीं है लेकिन उनकी यादें हमेशा जिंदा रहेगी। उनके दोस्त ने देश के लिए बलिदान दिया है, इसका उन्हें गर्व है। उनकी भी सेना में भर्ती होकर देश सेवा करने की इच्छा है।
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