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किसानों पर आफत, शासन से नहीं मिलेगी राहत
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धान की फसल को देखता किसान प्रवीण कुमार
- फोटो : SHAMLI
किसानों पर आफत, शासन से नहीं मिलेगी राहत
शामली। जिले के किसानों को रविवार और सोमवार को हुई बेमौसम बारिश से काफी नुकसान पहुंचा है। इनमें ज्यादातर धान, आलू और अन्य सब्जियों की फसल लेने वाले किसान हैं। कई किसानों की धान की फसल तो पूरी तरह बर्बाद हो गई, जबकि कई का धान उत्पादन बारिश की वजह से कम रह गया।
बेमौसम हुई बारिश के कारण अक्तूबर माह में बोई गई कई फसलों की दोबारा बुवाई करनी पड़ेगी। एक बार फिर से बीज और बुवाई पर किसानों का अतिरिक्त धन खर्च होगा। इससे फसल तैयार होने में समय लगेगा। जबकि इस समय बोई जाने वाली फसलों की बुवाई खेतों में पानी भरा होने से पिछड़ जाएगी। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार किसानों को काफी नुकसान हुआ है। जबकि कृषि टीम की आंकलन रिपोर्ट में सिर्फ 10 फीसदी नुकसान की पुष्टि हुई है। शासन 30 फीसदी से कम नुकसान पर मुआवजा नहीं देता है। ऐसे में जिले के किसानों को शासन की ओर से कोई राहत मिलने की उम्मीद नजर नहीं आ रही है।
धान की फसल को 50 फीसदी नुकसान, गोभी में गलाव
गोहरनी निवासी प्रवीण कुमार ने बताया कि दो दिन की बारिश ने उनकी धान और गोभी की फसल को काफी नुकसान पहुंचाया है। धान की 1509 प्रजाति में करीब 30 फीसदी का नुकसान हुआ है। वहीं 1121 प्रजाति में 50 फीसदी का नुकसान है। गोभी की फसल खेत में पानी भरा रहने से गलने लगी है। अब फसल पर फूल नहीं आएगा।
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नागल निवासी किसान राजेश मुखिया और मो. रजा हुसैन का कहना है कि इस बारिश से फसलों को भारी नुकसान के साथ बुआई भी ज्यादा पछेती हो गई है। जिन किसानों ने आलू, लहसुन, सरसों की बुआई की थी, उन खेतों में ज्यादा पानी भर जाने से बीज खेतों में सड़ गया। तैयार गन्ना व धान कि फसल भी तेज हवा से नीचे गिर जाने से नुकसान हुआ है।
किसान राकेश सैनी ने बताया कि तैयार गोभी धान की फसल में पानी भर जाने से फसल गल गई है, आलू, लहसुन की बोई गई फसल के नुकसान के साथ फसल की बुवाई भी पिछड़ गई है। किसान सचिन सैनी का कहना है कि मैंने 10 बीघा आलू व 15 बीघा लहसुन की बुआई की थी। तेज बारिश होने से खेतों में पानी भर गया था जिससे फसल का आधे से ज्यादा बीज मर गया है।
लागत के साथ फसल तैयार होने की अवधि बढ़ेगी
गाजर, शलगम, फूलगोभी, आलू, टमाटर, मूली, पालक, पत्ता गोभी, धनिया, मटर, बैंगन, हरी प्याज, लहसुन आदि फसल अक्तूबर माह में बोई जाती है। बारिश के कारण किसानों को दोबारा बुवाई करनी पड़ेगी। जिससे किसानों को बीज और बुवाई पर दोगुना खर्च करना पड़ेगा। फसल तैयार होने की अवधि बढ़ जाएगी।
इन फसलों की बुवाई पिछड़ेगी, उत्पादन पर भी होगा असर
फिलहाल किसान गेहूं, चना, सरसों, दाल इत्यादि की बुवाई की तैयारियों में जुटे थे, लेकिन बेमौसम बरसात की वजह से बुवाई करीब 15 दिन पिछड़ जाएगी। बुवाई के लिए उचित तापमान और नमी की स्थिति भी उत्पादन को प्रभावित करेगी।
कैराना में धान की फसल को 30 फीसदी तक नुकसान
कैराना। बारिश के कारण धान की फसल को 30 प्रतिशत तक नुकसान हुआ। जिन किसानों की फसल कटी हुई थी। उसमें दाना काल पड़ गया। जो फसल तैयार नहीं हुई थी वह खेत में बिछ गई। उस्मान ने बताया कि उन्होंने 2 बीघा जमीन पर धान बोया था। बारिश से पहले धान की फसल को काट तो लिया था, लेकिन खेत में कटी फसल भीग गई। आज दाना अलग किया तो चावल का दाना काला पड़ गया। मंडी में 3 हजार रुपये क्विंटल के स्थान पर केवल दो हजार रुपये क्विंटल ही मिल पाएंगे। दो बीघा फसल पर दस हजार का नुकसान हुआ है। किसान कय्यूम ने बताया कि उसने चार बीघा धान की फसल बोई थी। बारिश के कारण धान की फसल जमीन पर बिछ गई। जिससे फसल देर से कटेगी और दाना भी खराब निकलेगा।
कृषि वैज्ञानिकों ने माना 50 फीसदी नुकसान
शामली कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. विकास मलिक का कहना है कि आलू अगेती फसल में करीब 50 फीसदी का नुकसान है। इसके अलावा धान की फसल में भी 20 से 25 का नुकसान है। इसके अलावा पानी में फसल भीगने से धान की चमक भी खत्म होगी। सरसों की फसल का जमाव देरी से होगा। गोभी, टमाटर, बैंगन, पालक, धनिया, मेथी में 30 फीसदी तक नुकसान है।
कृषि विभाग ने दी 8-10 फीसदी नुकसान की रिपोर्ट : डीएम
डीएम जसजीत कौर ने बताया कि कृषि विभाग की टीम से सर्वे कराया गया था। उन्होंने 8-10 फीसदी नुकसान के आंकलन की रिपोर्ट दी है। अब एसडीएम के निर्देशन में राजस्व विभाग की टीम से इस आंकलन को सत्यापित कराया जा रहा है। शुक्रवार तक राजस्व विभाग की रिपोर्ट आ जाएगी। 30 फीसदी से कम नुकसान पर शासन की ओर से मुआवजा देने का प्रावधान नहीं है।
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शामली। जिले के किसानों को रविवार और सोमवार को हुई बेमौसम बारिश से काफी नुकसान पहुंचा है। इनमें ज्यादातर धान, आलू और अन्य सब्जियों की फसल लेने वाले किसान हैं। कई किसानों की धान की फसल तो पूरी तरह बर्बाद हो गई, जबकि कई का धान उत्पादन बारिश की वजह से कम रह गया।
बेमौसम हुई बारिश के कारण अक्तूबर माह में बोई गई कई फसलों की दोबारा बुवाई करनी पड़ेगी। एक बार फिर से बीज और बुवाई पर किसानों का अतिरिक्त धन खर्च होगा। इससे फसल तैयार होने में समय लगेगा। जबकि इस समय बोई जाने वाली फसलों की बुवाई खेतों में पानी भरा होने से पिछड़ जाएगी। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार किसानों को काफी नुकसान हुआ है। जबकि कृषि टीम की आंकलन रिपोर्ट में सिर्फ 10 फीसदी नुकसान की पुष्टि हुई है। शासन 30 फीसदी से कम नुकसान पर मुआवजा नहीं देता है। ऐसे में जिले के किसानों को शासन की ओर से कोई राहत मिलने की उम्मीद नजर नहीं आ रही है।
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धान की फसल को 50 फीसदी नुकसान, गोभी में गलाव
गोहरनी निवासी प्रवीण कुमार ने बताया कि दो दिन की बारिश ने उनकी धान और गोभी की फसल को काफी नुकसान पहुंचाया है। धान की 1509 प्रजाति में करीब 30 फीसदी का नुकसान हुआ है। वहीं 1121 प्रजाति में 50 फीसदी का नुकसान है। गोभी की फसल खेत में पानी भरा रहने से गलने लगी है। अब फसल पर फूल नहीं आएगा।
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नागल निवासी किसान राजेश मुखिया और मो. रजा हुसैन का कहना है कि इस बारिश से फसलों को भारी नुकसान के साथ बुआई भी ज्यादा पछेती हो गई है। जिन किसानों ने आलू, लहसुन, सरसों की बुआई की थी, उन खेतों में ज्यादा पानी भर जाने से बीज खेतों में सड़ गया। तैयार गन्ना व धान कि फसल भी तेज हवा से नीचे गिर जाने से नुकसान हुआ है।
किसान राकेश सैनी ने बताया कि तैयार गोभी धान की फसल में पानी भर जाने से फसल गल गई है, आलू, लहसुन की बोई गई फसल के नुकसान के साथ फसल की बुवाई भी पिछड़ गई है। किसान सचिन सैनी का कहना है कि मैंने 10 बीघा आलू व 15 बीघा लहसुन की बुआई की थी। तेज बारिश होने से खेतों में पानी भर गया था जिससे फसल का आधे से ज्यादा बीज मर गया है।
लागत के साथ फसल तैयार होने की अवधि बढ़ेगी
गाजर, शलगम, फूलगोभी, आलू, टमाटर, मूली, पालक, पत्ता गोभी, धनिया, मटर, बैंगन, हरी प्याज, लहसुन आदि फसल अक्तूबर माह में बोई जाती है। बारिश के कारण किसानों को दोबारा बुवाई करनी पड़ेगी। जिससे किसानों को बीज और बुवाई पर दोगुना खर्च करना पड़ेगा। फसल तैयार होने की अवधि बढ़ जाएगी।
इन फसलों की बुवाई पिछड़ेगी, उत्पादन पर भी होगा असर
फिलहाल किसान गेहूं, चना, सरसों, दाल इत्यादि की बुवाई की तैयारियों में जुटे थे, लेकिन बेमौसम बरसात की वजह से बुवाई करीब 15 दिन पिछड़ जाएगी। बुवाई के लिए उचित तापमान और नमी की स्थिति भी उत्पादन को प्रभावित करेगी।
कैराना में धान की फसल को 30 फीसदी तक नुकसान
कैराना। बारिश के कारण धान की फसल को 30 प्रतिशत तक नुकसान हुआ। जिन किसानों की फसल कटी हुई थी। उसमें दाना काल पड़ गया। जो फसल तैयार नहीं हुई थी वह खेत में बिछ गई। उस्मान ने बताया कि उन्होंने 2 बीघा जमीन पर धान बोया था। बारिश से पहले धान की फसल को काट तो लिया था, लेकिन खेत में कटी फसल भीग गई। आज दाना अलग किया तो चावल का दाना काला पड़ गया। मंडी में 3 हजार रुपये क्विंटल के स्थान पर केवल दो हजार रुपये क्विंटल ही मिल पाएंगे। दो बीघा फसल पर दस हजार का नुकसान हुआ है। किसान कय्यूम ने बताया कि उसने चार बीघा धान की फसल बोई थी। बारिश के कारण धान की फसल जमीन पर बिछ गई। जिससे फसल देर से कटेगी और दाना भी खराब निकलेगा।
कृषि वैज्ञानिकों ने माना 50 फीसदी नुकसान
शामली कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. विकास मलिक का कहना है कि आलू अगेती फसल में करीब 50 फीसदी का नुकसान है। इसके अलावा धान की फसल में भी 20 से 25 का नुकसान है। इसके अलावा पानी में फसल भीगने से धान की चमक भी खत्म होगी। सरसों की फसल का जमाव देरी से होगा। गोभी, टमाटर, बैंगन, पालक, धनिया, मेथी में 30 फीसदी तक नुकसान है।
कृषि विभाग ने दी 8-10 फीसदी नुकसान की रिपोर्ट : डीएम
डीएम जसजीत कौर ने बताया कि कृषि विभाग की टीम से सर्वे कराया गया था। उन्होंने 8-10 फीसदी नुकसान के आंकलन की रिपोर्ट दी है। अब एसडीएम के निर्देशन में राजस्व विभाग की टीम से इस आंकलन को सत्यापित कराया जा रहा है। शुक्रवार तक राजस्व विभाग की रिपोर्ट आ जाएगी। 30 फीसदी से कम नुकसान पर शासन की ओर से मुआवजा देने का प्रावधान नहीं है।

बरसात से नष्ट हुई धान की फसल- फोटो : SHAMLI

कैराना में अलीपुर रोड पर बारिश के कारण जमीन पर बिछी धान की फसल- फोटो : SHAMLI