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जीव को त्याग से प्राप्त होगी भक्ति
शामली, अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 11 Mar 2017 12:25 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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शामली। श्री दिगंबर जैन साधु सेवा समिति के तत्वावधान में श्री 1008 के सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं शांति महायज्ञ में जैन संत सौरभ सागर जी महाराज ने कहा कि भक्ति करने से पूर्व जीव को त्याग करना होगा। भक्ति में लीन होने और नृत्य करने से जीव का स्वस्थ रहता है।
शुक्रवार को तालाब रोड पर स्थित जैन धर्मशाला में श्री दिगंबर जैन साधु सेवा समिति के तत्वावधान में श्री 1008 के सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं शांति महायज्ञ में हस्तिनापुर से आए पंडित संदीप जैन शास्त्री ने छठवें दिन विधिविधान से पूजा अर्चना संपन्न कराई।
सौरभ सागर जी महाराज ने कहा कि जीव की आचरण की मौजूदा विचार धारा बदलना होगा। बिना गुरु के कोई भी विचार धारा नहीं बदल सकती है। जीव को पुुरुषार्थ की ओर बढ़ना होगा। जैन मुनि ने णमोकार मंत्र का भी महत्व बताया। इस मौके पर पद्मावती आर्य द्वारा एक शाम सौरभ सागर के नाम आयोजित की गई।
शुक्रवार को तालाब रोड पर स्थित जैन धर्मशाला में श्री दिगंबर जैन साधु सेवा समिति के तत्वावधान में श्री 1008 के सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं शांति महायज्ञ में हस्तिनापुर से आए पंडित संदीप जैन शास्त्री ने छठवें दिन विधिविधान से पूजा अर्चना संपन्न कराई।
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सौरभ सागर जी महाराज ने कहा कि जीव की आचरण की मौजूदा विचार धारा बदलना होगा। बिना गुरु के कोई भी विचार धारा नहीं बदल सकती है। जीव को पुुरुषार्थ की ओर बढ़ना होगा। जैन मुनि ने णमोकार मंत्र का भी महत्व बताया। इस मौके पर पद्मावती आर्य द्वारा एक शाम सौरभ सागर के नाम आयोजित की गई।
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