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Shamli News: सौर ऊर्चा चलित कीट ट्रैप का डिजाइन का पेटेंट कार्यालय में हुआ पंजीकरण
Thu, 12 Sep 2024 02:16 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Thu, 12 Sep 2024 02:16 AM IST
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शामली। राष्ट्रीय किसान पीजी कॉलेज के कीट विज्ञान विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. रोहित राणा ने सौर ऊर्जा से चलने वाले कीट ट्रैप का डिज़ाइन तैयार किया है, जो खेतों में कीट प्रबंधन में मददगार है। इस उपकरण के डिज़ाइन का पेटेंट कार्यालय भारत सरकार ने पंजीकरण कर लिया है। इस उपलब्धि से कॉलेज में खुशी का माहौल है।
सहायक प्रोफेसर डॉ. रोहित राणा ने बताया फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीट किसानों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बने हैं। फसलों से बचाव के लिए किसान कीटनाशकों का छिड़काव करते हैं, जिसके दुष्प्रभाव सामने आ रहे हैं। उन्होंने कृषि क्षेत्रों में कीटों को पकड़ने के लिए एक खास उपकरण का डिज़ाइन विकसित किया है। यह उपकरण सौर ऊर्जा से संचालित होता है। डिज़ाइन तैयार होने के बाद पंजीकरण के लिए पेटेंट कार्यालय, भारत सरकार में आवेदन किया गया था। पेटेंट कार्यालय ने जांच प्रक्रिया पूरी करने के बाद डिज़ाइन के पंजीकरण का प्रमाण पत्र दिया गया है।
डॉ. राणा ने बताया इस तकनीक से किसानों को पहले ही खेतों में छिपे हानिकारक कीटों का पता चल जाएगा और किसान समय रहते कीट-प्रबंधन कर सकेंगे। एक ही जगह पर अलग-अलग तरह के कीटों का नियंत्रण किया जा सकेगा। प्राचार्य प्रोफेसर सत्येंद्र पाल ने बताया यह उपकरण किसानों के लिए लाभप्रद रहेगा। डॉ. रोहित राणा ने कहा कि यह उपलब्धि काॅलेज परिवार और समाज के लिए अभूतपूर्व उपलब्धि के रूप में मानी जाएगी। उन्होंने डॉ. रोहित राणा की इस उपलब्धि पर प्रशंसा करते हुए उन्हें बधाई दी।
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सहायक प्रोफेसर डॉ. रोहित राणा ने बताया फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीट किसानों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बने हैं। फसलों से बचाव के लिए किसान कीटनाशकों का छिड़काव करते हैं, जिसके दुष्प्रभाव सामने आ रहे हैं। उन्होंने कृषि क्षेत्रों में कीटों को पकड़ने के लिए एक खास उपकरण का डिज़ाइन विकसित किया है। यह उपकरण सौर ऊर्जा से संचालित होता है। डिज़ाइन तैयार होने के बाद पंजीकरण के लिए पेटेंट कार्यालय, भारत सरकार में आवेदन किया गया था। पेटेंट कार्यालय ने जांच प्रक्रिया पूरी करने के बाद डिज़ाइन के पंजीकरण का प्रमाण पत्र दिया गया है।
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डॉ. राणा ने बताया इस तकनीक से किसानों को पहले ही खेतों में छिपे हानिकारक कीटों का पता चल जाएगा और किसान समय रहते कीट-प्रबंधन कर सकेंगे। एक ही जगह पर अलग-अलग तरह के कीटों का नियंत्रण किया जा सकेगा। प्राचार्य प्रोफेसर सत्येंद्र पाल ने बताया यह उपकरण किसानों के लिए लाभप्रद रहेगा। डॉ. रोहित राणा ने कहा कि यह उपलब्धि काॅलेज परिवार और समाज के लिए अभूतपूर्व उपलब्धि के रूप में मानी जाएगी। उन्होंने डॉ. रोहित राणा की इस उपलब्धि पर प्रशंसा करते हुए उन्हें बधाई दी।
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