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गोवर्धन को कान्हा ने उंगली पर उठाया, ब्रजवासियों की रक्षा की
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कैराना में भागवत कथा के दोरान नृत्य करती महिलाऐ
- फोटो : SHAMLI
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कैराना। सिद्धपीठ प्राचीन बनखंडी महादेव मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन कथा व्यास रजनीश जी महाराज ने कृष्ण कन्हैया की बाल लीलाओं का सुंदर वर्णन किया। कन्हैया की लीला पर श्रद्धालु खड़े होकर नृत्य करने पर मजबूर हो गए।
श्री बनखंडी महादेव मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा में वृंदावन से पधारे कथा व्यास ने कहा कि बचपन में नटखट कन्हैया साथियों के संग चुपके से घरों में घुसकर मटकियां फोड़कर माखन चुराते थे। महिलाएं उलाहना देने यशोदा मैया के पास जाती थीं लेकिन कन्हैया की शरारत पर सभी खुश रहती थीं। कन्हैया गाय चराने वनों में जाते थे और गोपियों को परेशान करते थे। कन्हैया की बांसुरी की धुन पर गोपियां खुद को नाचने से नहीं रोक पाती थी।
स्वामी जी ने कालिया नाग का वृतांत सुनाते हुए बताया यमुना में विषैला कालिया नाग ब्रज वासियों को हर समय डराता था। एक बार खेलते हुए गेंद यमुना नदी में गिर जाती है और कन्हैया गेंद निकालने के लिए यमुना नदी में कूद पड़ते हैं। सभी बृजवासी डर जाते हैं। कन्हैया यमुना नदी में कालिया नाग को साधकर उसके फन पर खड़े होकर बाहर आते हैं तो सारे ब्रज वासी उनकी जयजयकार करते हैं।
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एक बार इंद्र देवता को अहंकार हो जाता है। प्रभु श्री कृष्ण इंद्र की पूजा बंद करा कर गोवर्धन की पूजा कराते हैं। जिससे क्रोधित होकर इंद्र देवता बृज गांव में बारिश, तूफान और प्रलय ला देते हैं। तब कन्हैया गोवर्धन पर्वत को अपनी अंगुली पर उठा लेते हैं और सभी बृजवासी गोवर्धन पर्वत के नीचे पनाह लेते हैं। इसके बाद से दीपावली के अगले दिन गोवर्धन की पूजा की जाने लगी। इस अवसर पर महाराज के साथ वृंदावन से आये आचार्य अंकित शर्मा व अनमोल शर्मा के अलावा श्रवण कुमार गर्ग, आलोक, संजय, अमित गर्ग, राजेन्द्र फौजी, मोहित अग्रवाल, विकास, सागर, विनोद आदि श्रद्धालू मौजूद रहे।
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श्री बनखंडी महादेव मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा में वृंदावन से पधारे कथा व्यास ने कहा कि बचपन में नटखट कन्हैया साथियों के संग चुपके से घरों में घुसकर मटकियां फोड़कर माखन चुराते थे। महिलाएं उलाहना देने यशोदा मैया के पास जाती थीं लेकिन कन्हैया की शरारत पर सभी खुश रहती थीं। कन्हैया गाय चराने वनों में जाते थे और गोपियों को परेशान करते थे। कन्हैया की बांसुरी की धुन पर गोपियां खुद को नाचने से नहीं रोक पाती थी।
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स्वामी जी ने कालिया नाग का वृतांत सुनाते हुए बताया यमुना में विषैला कालिया नाग ब्रज वासियों को हर समय डराता था। एक बार खेलते हुए गेंद यमुना नदी में गिर जाती है और कन्हैया गेंद निकालने के लिए यमुना नदी में कूद पड़ते हैं। सभी बृजवासी डर जाते हैं। कन्हैया यमुना नदी में कालिया नाग को साधकर उसके फन पर खड़े होकर बाहर आते हैं तो सारे ब्रज वासी उनकी जयजयकार करते हैं।
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एक बार इंद्र देवता को अहंकार हो जाता है। प्रभु श्री कृष्ण इंद्र की पूजा बंद करा कर गोवर्धन की पूजा कराते हैं। जिससे क्रोधित होकर इंद्र देवता बृज गांव में बारिश, तूफान और प्रलय ला देते हैं। तब कन्हैया गोवर्धन पर्वत को अपनी अंगुली पर उठा लेते हैं और सभी बृजवासी गोवर्धन पर्वत के नीचे पनाह लेते हैं। इसके बाद से दीपावली के अगले दिन गोवर्धन की पूजा की जाने लगी। इस अवसर पर महाराज के साथ वृंदावन से आये आचार्य अंकित शर्मा व अनमोल शर्मा के अलावा श्रवण कुमार गर्ग, आलोक, संजय, अमित गर्ग, राजेन्द्र फौजी, मोहित अग्रवाल, विकास, सागर, विनोद आदि श्रद्धालू मौजूद रहे।