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गर्मी बढ़ते ही बढ़ने लगी मिट्टी के बर्तनों की मांग
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गढीपुख्ता में मिटटे के बर्तन बनाता युवक
- फोटो : SHAMLI
गर्मी बढ़ते ही बढ़ने लगी मिट्टी के बर्तनों की मांग
गढ़ीपुख्ता। गर्मी बढ़ते ही मिट्टी के बर्तनों की मांग बढ़ने लगी है। मिट्टी के घड़ों, बोतलों एवं कपों में रखे पानी को पीकर लोग तरोताजा हो रहे हैं। कुम्हारों का कहना है कि उनके बनाए मिट्टी के बर्तन न केवल आसपास के क्षेत्र में बल्कि पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड और दिल्ली तक बिकते हैं।
गढ़ीपुख्ता के करीब एक दर्जन परिवार मिट्टी के बर्तन बनाने के कारोबार से जुड़े हैं। ये लोग मिट्टी के घड़े, बोतलें, कप के अलावा गुल्लक, गमले और तौला (रोटी रखने का बर्तन) बनाते हैं। गर्मी शुरू होते ही घड़ों और बोतलों की मांग बढ़ जाती है। तौफीर बताते हैं कि जब से कोरोना बढ़ा है, तब से लोगों ने फ्रिज का पानी पीना कम कर दिया है। इससे मिट्टी के बर्तनों की मांग बढ़ी है। वह कहते हैं कि पिछले वर्ष लॉकडाउन के दौरान तो बिक्री ज्यादा नहीं हुई थी, लेकिन इसके बाद घड़ों की बिक्री अच्छी होने लगी थी। अतीक बताते हैं कि इस बार घड़ों की बिक्री और बढ़ने की उम्मीद है। घड़ों की कीमत आकार के हिसाब से तय होती है। वह बताते हैं कि घड़ों के अलावा मिट्टी की कुछ बोतलें भी बनाई हैं। माजिद बताते हैं कि घड़ों एवं बोतलों के अलावा मिट्टी के गमले एवं गुल्लक भी वह बनाते हैं। उनके बनाए मिट्टी के बर्तन पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और उत्तराखंड तक जाते हैं। इसके अलावा नन्हा, मोहम्मद तसदीक और शाहिद भी मिट्टी के बर्तन बनाने में जुटे हैं।
खरीदनी पड़ रही है चिकनी मिट्टी
कुम्हार मोहसीन बताते हैं कि बर्तन बनाने के चिकनी मिट्टी चहिए। तालाबों में मछली पालन बढ़ रहा है। अब मिट्टी को अन्य क्षेत्रों से खरीद खरीदकर मंगा रहे हैं। उन्हें एक ट्राली मिट्टी 1200-1300 रुपये में पड़ती है।
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300 से 400 रुपये प्रतिदिन की कमाई
इस व्यवसाय से जुड़े परिवारों का कहना है कि यह काम बहुत मेहनत का है। पूरा परिवार इसमें लगा रहता है, तब कहीं जाकर 300 से 400 रुपये प्रतिदिन की कमाई हो पाती है। इससे भी बुरा हाल तब होता है, जब बर्तन को पकाते हैं। कई बार तो सभी बर्तन खराब हो जाते हैं। इससे उनकी सारी मेहनत भी बेकार चली जाती है।
मिट्टी के बर्तनों के दाम
घड़ा: 50 से 100 रुपये
मिट्टी की बोतल: 80 से 120 रुपये
गुल्लक: 50 से 60 रुपये
गमला : 50 से 200 रुपये
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गढ़ीपुख्ता। गर्मी बढ़ते ही मिट्टी के बर्तनों की मांग बढ़ने लगी है। मिट्टी के घड़ों, बोतलों एवं कपों में रखे पानी को पीकर लोग तरोताजा हो रहे हैं। कुम्हारों का कहना है कि उनके बनाए मिट्टी के बर्तन न केवल आसपास के क्षेत्र में बल्कि पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड और दिल्ली तक बिकते हैं।
गढ़ीपुख्ता के करीब एक दर्जन परिवार मिट्टी के बर्तन बनाने के कारोबार से जुड़े हैं। ये लोग मिट्टी के घड़े, बोतलें, कप के अलावा गुल्लक, गमले और तौला (रोटी रखने का बर्तन) बनाते हैं। गर्मी शुरू होते ही घड़ों और बोतलों की मांग बढ़ जाती है। तौफीर बताते हैं कि जब से कोरोना बढ़ा है, तब से लोगों ने फ्रिज का पानी पीना कम कर दिया है। इससे मिट्टी के बर्तनों की मांग बढ़ी है। वह कहते हैं कि पिछले वर्ष लॉकडाउन के दौरान तो बिक्री ज्यादा नहीं हुई थी, लेकिन इसके बाद घड़ों की बिक्री अच्छी होने लगी थी। अतीक बताते हैं कि इस बार घड़ों की बिक्री और बढ़ने की उम्मीद है। घड़ों की कीमत आकार के हिसाब से तय होती है। वह बताते हैं कि घड़ों के अलावा मिट्टी की कुछ बोतलें भी बनाई हैं। माजिद बताते हैं कि घड़ों एवं बोतलों के अलावा मिट्टी के गमले एवं गुल्लक भी वह बनाते हैं। उनके बनाए मिट्टी के बर्तन पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और उत्तराखंड तक जाते हैं। इसके अलावा नन्हा, मोहम्मद तसदीक और शाहिद भी मिट्टी के बर्तन बनाने में जुटे हैं।
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खरीदनी पड़ रही है चिकनी मिट्टी
कुम्हार मोहसीन बताते हैं कि बर्तन बनाने के चिकनी मिट्टी चहिए। तालाबों में मछली पालन बढ़ रहा है। अब मिट्टी को अन्य क्षेत्रों से खरीद खरीदकर मंगा रहे हैं। उन्हें एक ट्राली मिट्टी 1200-1300 रुपये में पड़ती है।
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300 से 400 रुपये प्रतिदिन की कमाई
इस व्यवसाय से जुड़े परिवारों का कहना है कि यह काम बहुत मेहनत का है। पूरा परिवार इसमें लगा रहता है, तब कहीं जाकर 300 से 400 रुपये प्रतिदिन की कमाई हो पाती है। इससे भी बुरा हाल तब होता है, जब बर्तन को पकाते हैं। कई बार तो सभी बर्तन खराब हो जाते हैं। इससे उनकी सारी मेहनत भी बेकार चली जाती है।
मिट्टी के बर्तनों के दाम
घड़ा: 50 से 100 रुपये
मिट्टी की बोतल: 80 से 120 रुपये
गुल्लक: 50 से 60 रुपये
गमला : 50 से 200 रुपये

गढीपुख्ता में मिटटे के बर्तन बनाता युवक- फोटो : SHAMLI

गढीपुख्ता में मिटटे के बर्तन बनाता युवक- फोटो : SHAMLI