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Shamli News: यमुना में तटबंध और ठोकरे क्षतिग्रस्त होने से से 20 गांवों में बाढ़ का खतरा

Fri, 07 Jun 2024 01:28 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली Updated Fri, 07 Jun 2024 01:28 AM IST
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Danger of flood in 20 villages due to damage to embankment and ponds in Yamuna
शामली। 15 जून से बरसात का मौसम शुरू होता है। बरसात का मौसम शुरू होने वाला है। जिले में यमुना तटबंध और ठोकरे विभिन्न स्थानों पर क्षतिग्रस्त है। जिसके कारण 20 गांवों में बाढ़ का खतरा बना हुआ है। यहीं नहीं, शहरी क्षेत्र में नालों की सफाई नहीं होने के कारण मानसून आने पर शहर में जलभराव की समस्या को लेकर लोग परेशानहाल है। विभागीय अधिकारियों की आधी अधूरी तैयारियां है। जिसको लेकर लोगों में आक्रोश है।
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बरसात के दिनों में पहाड़ों पर बारिश होने के बाद ज्यादातर पानी यमुना में आता है। इससे बाढ़ की स्थिति बन जाती है। पहाड़ों पर एक जून से 15 सितंबर तक बारिश का समय माना गया है। जिले में यमुना किनारे सहारनपुर जिले की सीमा चौसाना से शुरू होकर बिड़ौली, कैराना, सहपत, डुंडूखेडा, इस्सोपुर टील तक जिले में 52.730 किमी लंबाई के तटबंध है। दस सालों में बरसात के दिनों में यमुना में तीन लाख से लेकर छह लाख क्यूसेक पानी आ चुका है। जिले में सहपत, बलहेडा, लक्ष्मीपुरा आदि क्षेत्रों में अभी भी यमुना तटबंध और ठोकरें क्षतिग्रस्त है। जिसके कारण फिर से मानसून आने पर आसपास के गांवों में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है।
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इसके अलावा शामली शहर में गोहरनी से लेकर लिलौन का बड़ा नाला सफाई नहीं होने के कारण गंदगी से अटा पड़ा है, जिसके कारण मानसून आने पर शहर में जलभराव की समस्या से लोगों को दो चार होना पड़ सकता है।
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यह बोले लोग
नाई नंगला के पूर्व प्रधान महीपाल, उदपुर के मैनपाल सिंह और भड़ी गांव के मोहम्मद कामिल का कहना कि बरसात से पहले यमुना किनारे सभी ठोकरों का निर्माण होना आवश्यक है। नागरिकों ने बरसात से पहले यमुना की ठोकरों का कार्य पूरा होना चाहिए।
शहर का नाला गंदगी से अटा पड़ा,नहीं हुई सफाई
शामली। बरसात होने पर शामली शहर के बीच बह रहा नाले का पानी सीबी गुप्ता कालोनी, आर्यपुरी मोहल्ला दयानंद नगर तक घरों में भर जाता है। शामली नगर पालिका परिषद की ओर से नाले की सफाई तक कराई गई है। कूड़ा गंदगी से शहर के बीच बह रहा नाला गंदगी से अटा पड़ा है।
यमुना नदी के किनारे तटबंध की लंबाई: 52.730 किमी
तटबंध की जद में गांव
बिड़ौली, केरटू, रामड़ा, हैदरपुर, गढ़ी मुस्लिम, भड़ी कोरियान, भड़ी मुस्तफाबाद, साल्हापुर, मंगलौरा, ख्याजपुरा, कलरी, मंडावर, इस्सोपुर खुरगान, भड़ी भरतपुर, सकोती नाईनंगला, मामौर, मोहम्मदपुर राई, मवी अहतमाल, बसेड़ा, नंगला राई, पठेड़, बल्हेडा, चौतरा, सहपत, चौसाना कदीम, म्यान कस्बा, उदपुर, भट्टी माजरा, शीतलगढ़ी।
कैराना में यमुना पुल में जलस्तर की क्षमता : 232.75 मीटर
कैराना में यमुुना में बाढ़ का खतरे का निशान : 230.85 मीटर
यमुना में बाढ़ चेतावनी : 230 मीटर
पिछले साल बह गई थी यमुना नदी की ठोकरे, ड्रेनेज खंड करा रहा है निर्माण
कैराना क्षेत्र के सहपत गांव से लेकर चौसाना क्षेत्र के लक्ष्मीपुरा गांव के पास यमुना नदी की ठोकर बह गई थी। जिला ड्रेनेज विभाग क्षति ग्रस्त ठोकर मरम्मत कराने में जुटा है। हालांकि अभी निर्माण नहीं हो सका है। लक्ष्मीपुरा गांव की भूमि कटान को रोकने के लिए प्लास्टिक के रेत के कट्टे भरकर कार्य किया जा रहा है। इसके अलावा वर्ष 2013 में बरसात के दिनों ज्यादा पानी आने से कैराना में यमुना नदी पुल के पास से लेकर हरियाणा पानीपत जिले की ओर का एक हजार मीटर तक सड़क बह जाने से हरियाणा का शामली से आवागमन कई माह तक बंद रहा था।
लक्षमीपुरा, सहपत और बल्हेडा ठोकर का पुर्ननिर्माण किया जा रहा है। प्रयास रहेगा कि मानसून से पहले व्यवस्था को दुरुस्त कर लिया जाए। - सुधांशु मनोहर सिंह, अधिशासी अभियंता, ड्रेनेज खंड
यमुना शामली में और ड्रेनेज खंड मुजफ्फरनगर जिले में
28 सितंबर 2011 में शामली जिला घोषित हो गया था। अभी तक जिले का ड्रेनेज खंड कार्यालय मुजफ्फरनगर से ही संचालित हो रहा है, जबकि यमुना नदी शामली जिले में बह रही है। जिला मुख्यालय पर पूर्वी यमुना नहर खंड द्वारा ड्रेनेज खंड कार्यालय स्थापना के लिए विभाग ने शासन से धनराशि नहीं मांगी है।
प्रशासन कर रहा योजना तैयार
बाढ़ से यमुना तटबंध और ठोकरे कई बार क्षतिग्रस्त हो चुकी है। तटबंध पर जिला प्रशासन ने गत सात मई 2024 को बरसात और बाढ़ आपदा के मद्देनजर जिला स्तरीय अधिकारियों की बैठक बुलाकर दिशा निर्देश दिए थे। अब बाढ़, आपदा प्रबंधन कार्ययोजना तैयार कर रहा है।

कलरी और चौतरा गांव में हुआ कार्य
वर्ष 2015-16 में बाढ़ आ जाने से कलरी और चौतरा गांव को जिला प्रशासन ने बचाया था। चार साल पहले दोनों गांवों को बचाने के लिए चार करोड़ 50 लाख की बाढ़ राहत योजना तैयार करके प्रदेश सरकार को भेजी थी। शासन से धनराशि अवमुक्त की गई थी। जिले के ड्रेनेज खंड ने दोनों तटबंध बनाने समेत दोनों गांवों को बाढ़ से बचाने के लिए काम कराया है।
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