थानाभवन। श्री बालाजी धाम में शनिवार को आयोजित सुंदरकांड में कथा वाचक राज राजेश्वर महाराज ने कहा संस्कृति मानव जीवन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह हमारे विचारों, व्यवहारों, मूल्यों, परंपराओं और विश्वासों का एक जटिल नेटवर्क है, जो हमें एक समाज के रूप में परिभाषित करता है।
उन्होंने बताया कि संस्कृति न केवल हमें यह समझने में मदद करती हैं, बल्कि हम कौन हैं, बल्कि हमें यह भी सिखाती है कि हम कैसे बातचीत करें, कैसे प्रतिक्रिया करें, और कैसे विकसित हों। संस्कृति हमें अपनी पहचान बनाने और अपने समाज में अपनी जगह खोजने में मद्द करती है। यह हमें एक समुदाय के सदस्य के रूप में एक मजबूत भावना प्रदान करती है। संस्कृति ज्ञान, कौशल और मूल्यों का संचय और संचरण करती है, जो पीढ़ी से पीढ़ी तक आगे बढ़ते हैं। यह हमें अपने इतिहास और अतीत से जुड़ने में मदद करती है। अपने बालकों को अपनी संस्कृति और संस्कार का ज्ञान अवश्य प्रदान करें। इस अवसर पर सौरभ नारंग, वंश शर्मा, सूरज तायल, अमित गोयल, पंकज गोयल, अनिता गोयल, सुनिता अग्रवाल, सरोज देवी, किरण गर्ग, ममता, कमलेश तायल आदि मौजूद रहे।