{"_id":"58d560f34f1c1b657c1a1489","slug":"police-officers-running-overnight","type":"story","status":"publish","title_hn":"रातभर सड़कों पर दौड़ते रहे पुलिस अफसर ","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
रातभर सड़कों पर दौड़ते रहे पुलिस अफसर
शामली, अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 25 Mar 2017 12:04 AM IST
विज्ञापन
mining
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
शामली। यमुना नदी से अवैध खनन को लेकर आधी रात के बाद गोपनीय जांच हुई। आईजी जोन के आदेश पर मुजफ्फरनगर, मेरठ और शामली के पुलिस अधिकारियों ने यमुना नदी किनारे खनन प्वाइंट देखे। मौके पर खनन होता तो नहीं मिला, मगर मेरठ-करनाल हाइवे और पानीपत खटीमा हाइवे पर रेत से लदे वाहनों की आवाजाही बदस्तूर जारी रही।
बृहस्पतिवार रात करीब एक बजे मुजफ्फरनगर और मेरठ से एक-एक एसपी तथा एक सीओ शामली भेजा गए। यहां पहुंचने पर ही स्थानीय अधिकारियों को बताया गया कि अवैध खनन के संबंध में जांच करनी है। इसके बाद एसपी डाक्टर अजयपाल शर्मा, एएसपी अनिल कुमार झा, सीओ सिटी उपेंद्र यादव, सीओ झिंझाना आनंद कुमार वर्मा तथा सीओ कैराना भूषण वर्मा के साथ अलग अलग टीमें बनाकर कैराना, झिंझाना तथा कांधला क्षेत्र में चर्चित खनन प्वाइंट पर जाकर चेकिंग कराई गई।
एक टीम ने इस्सोपुर टील और डूंडूाखेड़ा तो दूसरी ने झिंझाना क्षेत्र के भड़ी घाट, मंगलौरा तथा तीसरी टीम ने कैराना के नंगला राई और बसेड़ा में खनन की स्थिति के बारे में जानकारी की। सुबह करीब चार बजे तक तीन घंटे तक चले इस निरीक्षण में पुलिस अधिकारियों की टीम को कहीं पर भी खनन होता नहीं मिला। एसपी अजय पाल शर्मा का कहना है कि रात में औचक निरीक्षण नहीं किया गया, कहीं भी खनन होता नहीं मिला है।
विज्ञापन
झिंझाना और कैराना थानाध्यक्ष को रखा दूर
शामली। अवैध खनन के संबंध में गोपनीय ढंग से हुई जांच के दौरान थानाध्यक्ष झिंझाना और कैराना को दूर रखा गया। झिंझाना थानाध्यक्ष पर अवैध खनन को बढ़ावा देने के आरोप लगते रहे हैं। यहीं नहीं प्रशासनिक अधिकारियों ने भी पूर्व में झिंझाना थानाध्यक्ष की भूमिका पर सवाल उठाते हुए आला अफसरों को रिपोर्ट भेजी थी। ऐसे में उच्चाधिकारियों को आशंका थी कि यदि स्थानीय थानाध्यक्षों को चेकिंग की सूचना दे दी जाएगी, तो खनन माफिया तक यह जानकारी पहुंच सकती है।
खनन नहीं, तो कहां से आ रहा है रेत
शामली। पुलिस अधिकारियों ने औचक निरीक्षण किया तो यमुना नदी से अवैध रेत खनन नहीं मिला। जबकि पानीपत-खटीमा और मेरठ-करनाल हाइवे पर रेत से लदे वाहनों की कतार बृहस्पतिवार में भी लगी रही। इस कारण दोनों ही हाइवे पर ट्रैफिक जाम भी लगा रहा। जाम में पुलिस अधिकारियों के वाहन भी फंस गए थे।
निरीक्षण इस तरफ, खनन पुल के पार
शामली। यमुना नदी से अवैध रेत खनन करने वाले माफिया बेहद शातिर हैं। पुलिस प्रशासन को गुमराह करने के लिए यमुना नदी पुल के पार से खनन करके रेत से लदे वाहनों को यूपी की तरफ लाया जा रहा है। अधिकारी निरीक्षण करने जाते हैं, तो सिर्फ पुल के एक छोर पर ही घूमकर आ जाते हैं, जबकि यमुना नदी के दोनों छोर यूपी की सीमा में हैं।
बृहस्पतिवार देर रात भी पुलिस अधिकारियों की विशेष टीम अवैध खनन की जांच करने के लिए यमुना नदी किनारे पहुंची, तो उन्हें कहीं पर भी खनन होता नहीं मिला।
तीन घंटे की छानबीन करने के बाद टीमें लौट गईं। सवाल यह है कि यमुना के इस तरफ खनन हो नहीं रहा, मगर दोनों हाईवे पर रात भर रेत से लदे वाहनों का आना लगा रहा, आखिर अधिकारी निरीक्षण के दौरान यह मालूम क्यों नहीं कर पाते कि यूपी की सीमा कहां तक है। गौरतलब है कि हरियाणा और उत्तर प्रदेश सीमा के बोर्ड भी पानीपत-खटीमा और मेरठ करनाल हाईवे पर लगे हैं, जो यमुना नदी पुल पार हैं। इससे साफ है कि उत्तर प्रदेश की सीमा यमुना नदी के दूसरे छोर तक है।
अब भाजपा नेता कर रहा खनन कराने की तैयारी
प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हुआ, तो कमाई वाले धंधों को करने में भी राजनीतिक हस्तक्षेप भी बदलना शुरू हो गया। पूर्व में यमुना नदी से अवैध खनन को लेकर सपा नेताओं के संरक्षण की बातें उछलती थीं, मगर अब भाजपा नेता इस काम को करने के प्रयास में लग गए हैं।
झिंझाना क्षेत्र में एक भाजपा नेता ने यमुना नदी से खनन की तैयारियां शुरू कर दी है। चौतरा गांव के निकट यमुना नदी पर रास्ता भी बनाया गया। इसका पता लगने पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण भी किया। मालूम चला है कि उक्त भाजपा नेता को नोटिस भेजने की तैयारी चल रही है। वहीं, भाजपा नेता दावा कर रहा है कि स्वीकृति लेकर और टैक्स जमाकर नियमानुसार खनन कराया जाएगा।
विज्ञापन
बृहस्पतिवार रात करीब एक बजे मुजफ्फरनगर और मेरठ से एक-एक एसपी तथा एक सीओ शामली भेजा गए। यहां पहुंचने पर ही स्थानीय अधिकारियों को बताया गया कि अवैध खनन के संबंध में जांच करनी है। इसके बाद एसपी डाक्टर अजयपाल शर्मा, एएसपी अनिल कुमार झा, सीओ सिटी उपेंद्र यादव, सीओ झिंझाना आनंद कुमार वर्मा तथा सीओ कैराना भूषण वर्मा के साथ अलग अलग टीमें बनाकर कैराना, झिंझाना तथा कांधला क्षेत्र में चर्चित खनन प्वाइंट पर जाकर चेकिंग कराई गई।
विज्ञापन
एक टीम ने इस्सोपुर टील और डूंडूाखेड़ा तो दूसरी ने झिंझाना क्षेत्र के भड़ी घाट, मंगलौरा तथा तीसरी टीम ने कैराना के नंगला राई और बसेड़ा में खनन की स्थिति के बारे में जानकारी की। सुबह करीब चार बजे तक तीन घंटे तक चले इस निरीक्षण में पुलिस अधिकारियों की टीम को कहीं पर भी खनन होता नहीं मिला। एसपी अजय पाल शर्मा का कहना है कि रात में औचक निरीक्षण नहीं किया गया, कहीं भी खनन होता नहीं मिला है।
विज्ञापन
झिंझाना और कैराना थानाध्यक्ष को रखा दूर
शामली। अवैध खनन के संबंध में गोपनीय ढंग से हुई जांच के दौरान थानाध्यक्ष झिंझाना और कैराना को दूर रखा गया। झिंझाना थानाध्यक्ष पर अवैध खनन को बढ़ावा देने के आरोप लगते रहे हैं। यहीं नहीं प्रशासनिक अधिकारियों ने भी पूर्व में झिंझाना थानाध्यक्ष की भूमिका पर सवाल उठाते हुए आला अफसरों को रिपोर्ट भेजी थी। ऐसे में उच्चाधिकारियों को आशंका थी कि यदि स्थानीय थानाध्यक्षों को चेकिंग की सूचना दे दी जाएगी, तो खनन माफिया तक यह जानकारी पहुंच सकती है।
खनन नहीं, तो कहां से आ रहा है रेत
शामली। पुलिस अधिकारियों ने औचक निरीक्षण किया तो यमुना नदी से अवैध रेत खनन नहीं मिला। जबकि पानीपत-खटीमा और मेरठ-करनाल हाइवे पर रेत से लदे वाहनों की कतार बृहस्पतिवार में भी लगी रही। इस कारण दोनों ही हाइवे पर ट्रैफिक जाम भी लगा रहा। जाम में पुलिस अधिकारियों के वाहन भी फंस गए थे।
निरीक्षण इस तरफ, खनन पुल के पार
शामली। यमुना नदी से अवैध रेत खनन करने वाले माफिया बेहद शातिर हैं। पुलिस प्रशासन को गुमराह करने के लिए यमुना नदी पुल के पार से खनन करके रेत से लदे वाहनों को यूपी की तरफ लाया जा रहा है। अधिकारी निरीक्षण करने जाते हैं, तो सिर्फ पुल के एक छोर पर ही घूमकर आ जाते हैं, जबकि यमुना नदी के दोनों छोर यूपी की सीमा में हैं।
बृहस्पतिवार देर रात भी पुलिस अधिकारियों की विशेष टीम अवैध खनन की जांच करने के लिए यमुना नदी किनारे पहुंची, तो उन्हें कहीं पर भी खनन होता नहीं मिला।
तीन घंटे की छानबीन करने के बाद टीमें लौट गईं। सवाल यह है कि यमुना के इस तरफ खनन हो नहीं रहा, मगर दोनों हाईवे पर रात भर रेत से लदे वाहनों का आना लगा रहा, आखिर अधिकारी निरीक्षण के दौरान यह मालूम क्यों नहीं कर पाते कि यूपी की सीमा कहां तक है। गौरतलब है कि हरियाणा और उत्तर प्रदेश सीमा के बोर्ड भी पानीपत-खटीमा और मेरठ करनाल हाईवे पर लगे हैं, जो यमुना नदी पुल पार हैं। इससे साफ है कि उत्तर प्रदेश की सीमा यमुना नदी के दूसरे छोर तक है।
अब भाजपा नेता कर रहा खनन कराने की तैयारी
प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हुआ, तो कमाई वाले धंधों को करने में भी राजनीतिक हस्तक्षेप भी बदलना शुरू हो गया। पूर्व में यमुना नदी से अवैध खनन को लेकर सपा नेताओं के संरक्षण की बातें उछलती थीं, मगर अब भाजपा नेता इस काम को करने के प्रयास में लग गए हैं।
झिंझाना क्षेत्र में एक भाजपा नेता ने यमुना नदी से खनन की तैयारियां शुरू कर दी है। चौतरा गांव के निकट यमुना नदी पर रास्ता भी बनाया गया। इसका पता लगने पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण भी किया। मालूम चला है कि उक्त भाजपा नेता को नोटिस भेजने की तैयारी चल रही है। वहीं, भाजपा नेता दावा कर रहा है कि स्वीकृति लेकर और टैक्स जमाकर नियमानुसार खनन कराया जाएगा।