कब्रिस्तान पर कब्जा, घर पर रखा रहा शव
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बंगाली कश्यप बिरादरी के काफी संख्या में परिवार कैराना देहात के गांव इस्लाम नगर में 30 साल से निवास करते हैं। यहां उनके परिवार के सदस्यों के राशन कार्ड और पहचान पत्र भी बने हुए हैं। आरोप है कि उनकी बिरादरी के कब्रिस्तान हलका नंबर दो में हैं, लेकिन इन पर एक परिवार का कब्जा है, जो वहां मुर्दों को दफनाने नहीं देता है। बुधवार की यहां के निवासी जयवीर के पिता चंदकी राम का निधन हो गया। वृद्ध के शव को दफनाने के लिए कोई जगह न होने के कारण उसका शव घर पर ही रखा रहा। कब्रिस्तान में शव दफनाने की मांग को लेकर जयवीर अपनी बिरादरी के लोगों के साथ बृहस्पतिवार को तहसील पर पहुंचा और तहसीलदार अभयराज पांडेय को पूरा घटनाक्रम बताया।
गत वर्ष भी एसडीएम कैराना के यहां प्रार्थना पत्र देकर कब्रिस्तान कब्जामुक्त कराने की मांग की थी, जिसमें वर्तमान ग्राम प्रधान मुनीबा ने खुली बैठक में प्रस्ताव पास कर अग्रिम कार्रवाई के लिए तहसील कैराना को भेजा गया था, जो पत्रावली अभी भी विचाराधीन है। पूरा घटनाक्रम सुनने के बाद तहसीलदार ने बंगाली कश्यप बिरादरी के लोगों को आश्वस्त किया कि उनके कब्रिस्तान के लिए आवंटित भूमि की पैमाइश करा दी गई है, पुलिस उपलब्ध न होने के कारण भूमि पर कब्जा तीन जून को अधीनस्थ अधिकारियों द्वारा दिलाया जाएगा। उधर, प्रशासनिक अधिकारियों और मृतक के परिवार के साथ-साथ बिरादरी के अन्य लोगों के बीच सुलह समझौता होने के बाद शव को अन्य किसी स्थान पर दफना दिया गया है।
करनाल जेल से आया चंदकीराम का बेटा
कुछ समय से पूर्व पानीपत पुलिस ने हमले के मामले में इस्लमानगर निवासी लली को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, तब से वह करनाल जेल में बंद है। बुधवार को लली के पिता चंदकीराम की मौत हो गई थी। इसकी सूचना परिजनों ने करनाल जिला पुलिस को देने के साथ ही लली को कैराना बुलवाने के लिए प्रार्थना पत्र दिया। इसके बाद कोर्ट की अनुमति पर बृहस्पतिवार को पुलिस कस्टडी में कैराना लाया गया। चंदकीराम का शव दफनाए जाने के बाद लली को पुलिस वापस करनाल ले गई।