फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Shamli News ›   नियमों को ताक पर रखकर बाबू को बना दिया लेखाकार

नियमों को ताक पर रखकर बाबू को बना दिया लेखाकार

Mon, 25 Jun 2018 12:24 AM IST
Updated Mon, 25 Jun 2018 12:24 AM IST
विज्ञापन
नियमों को ताक पर रखकर बाबू को बना दिया लेखाकार
कांधला (शामली)।
विज्ञापन

नगरपालिका कांधला में अधिशासी अधिकारी ने एक बाबू को निजी लाभ पहुंचाते हुए उसको लेखाकार बना दिया। यहीं नही नियम विरुद्घ उसका ग्रेड-पे बढ़ाकर उसको अधिक वेतन भी दे दिया गया। अधिशासी अधिकारी का तबादला हुुआ तो कार्यवाहक अधिशासी अधिकारी/तहसीलदार पर तहसीलदार पर चार्ज आ गया। तब जाकर मामला पकड़ में आया। जिसके बाद संबंधित बाबू को दिया गया वेतन नगर पालिका में जमा करा लिया गया।
कांधला नगर पालिका में सचिव उप्र शासन, नगर विकास द्वारा लेखाकार के दो पद प्रस्तावित किये गए थे। इस शासनादेश पर निदेशक स्थानीय निकाय लखनऊ द्वारा आठ सितंबर 2016 को कांधला नपा अधिशासी अधिकारी को आवश्यक कार्रवाई के लिए प्रेषित किया गया था। इस पत्र में समायोजन या फिर प्रोन्नत किए जाने का कोई भी निर्देश शासन द्वारा नहीं दिया गया था। इसी पत्र का सहारा लेकर नगर पालिका के तत्कालीन अधिशासी अधिकारी शैलेंद्र मिश्रा ने लेखाकार के लिए लिपिक अकरम का प्रस्ताव शासन को प्रेषित कर दिया गया था। यही नहीं शासन द्वारा इस पर कोई निर्णय लिये बगैर स्थानीय स्तर पर अकरम को लेखाकार बना दिया गया।
विज्ञापन

2016 नवंबर से बढ़े हुए ग्रेड-पे और भत्तों के अनुसार बढ़ा हुआ वेतन भी देना शुरू कर दिया गया। अप्रैल 2018 में अधिशासी अधिकारी शैलेंद्र मिश्रा का तबादला होने के बाद कार्यवाहक के रूप में तहसीलदार पर चार्ज आ गया। जिस पर उन्होंने अप्रैल महीने के वेतन में यह गड़बड़ी पकड़ ली गई। जिस पर उन्होंने वेतन बिल ठीक करने के निर्देश दिए गए। उधर, पूर्व प्रभारी अधिशासी अधिकारी कांधला राकेश तिवारी ने बताया कि अकरम अहमद मुख्य लिपिक के पद नहीं है। पालिकाध्यक्ष के द्वारा इन्हें लिपिक के मुख्य पद नियुक्त किया गया था। मामला संज्ञान में आने पर तत्काल इस पर कार्रवाई की गई।
विज्ञापन
विज्ञापन


बाबू ने माना इसे भूल
मामले का खुलासा होने पर पालिका लिपिक अकरम द्वारा 14 मई को अधिशासी अधिकारी को पत्र लिखा गया। इसमें माना गया कि सात नवंबर 2016 को शासनादेश की अज्ञानता के कारण भूलवश दोनों पदों पर कार्रवाई करते हुए तत्कालीन अधिशासी अधिकारी ने लेखाकर के पद पर समायोजित/प्रोन्नति किये जाने की स्वीकृति प्रदान की गई थी। जिस पर अकरम ने पालिका के खाते प्राप्त किये गए अधिक धन नगर पालिका को लौटा दिया।

जन सुनवाई पोर्टल पर भी दी गई गलत जानकारी
इस मामले की शिकायत नगर पालिका के सभासद अरुण गर्ग ने द्वारा जनवरी माह में जन सुनवाई पोर्टल पर भी की गई थी। आरोप है कि नगर पालिका द्वारा जन सुनवाई पोर्टल पर कार्रवाई ना करके मामले में लीपापोती कराकर अधिकारियों को गुमराह किया गया तथा पालिका के खाते से बराबर बढ़ा वेतन आहरित कराकर पालिका निधि का गबन किया जाता रहा।


आरोपी के खिलाफ थाने में दी तहरीर
यह खेल पकड़े जाने के बाद एक तरफ आरोपी बाबू इसे अज्ञानता और भूलवश मानकर अधिक लिया गया वेतन पालिका को लौटाने की बात कह रहे हैं। वही दूसरी ओर नगर पालिका के सभासद अरुण गर्ग इसे वित्तीय घोटाला बता रहे है। मामला पकड़ा गया तो यह अज्ञानता हो गई और ना पकड़ा जाता तो खेल चलता रहता। उन्होंने पूर्व अधिशासी अधिकारी आरोपी बाबू के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने की बात कही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed