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तहसीलदार के नेतृत्व में आबकारी के छापे
Updated Tue, 11 Jul 2017 12:23 AM IST
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शामली।
अवैध शराब बनाने और बेचने वालों के खिलाफ तहसीलदार के नेतृत्व में आबकारी टीम ने छापेमारी अभियान चलाया। कई गांवों में दबिश दी गई। इस दौरान करीब एक हजार लीटर कच्ची शराब और आठ हजार लीटर लाहन बरामद किया गया।
तहसीलदार ऊन विपिन मैनवाल और जिला आबकारी अधिकारी राकेश बहादुर सिंह के नेतृत्व में गठित विशेष टीम ने सोमवार को ग्राम गंगारामपुरा, ग्राम खानपुर कलां, खेड़ी जुनारदार और बरनावी के जंगल एवं आसपास के क्षेत्रों में चिन्हित अवैध शराब के अड्डो पर छापेमारी की। इस दौरान एक हजार लीटर कच्ची शराब, आठ हजार लीटर लहन बरामद कर लिया। टीम ने वहां से शराब बनाने के उपकरण भी बरामद किए। टीम में आबकारी निरीक्षक रमाशंकर सिंह, आबकारी निरीक्षक कैराना शोभित कुमार आदि मौजूद रहे।
जंगलों की खाक छान रही आबकारी, गांव-गांव बिक रही शराब
शामली। जिले में अवैध शराब माफिया द्वारा बनाई जाती है। इस शराब को माफिया के लोग ही गांवों में सप्लाई करते है और बेची जाती है। कैराना और झिंझाना क्षेत्र के गांवों में अवैध शराब खूब बिकती है, लेकिन आबकारी महज खानापूर्ति तक सीमित है। शराब पकड़ने के लिए खादर में छापे मारे जाते है, लेकिन गांवों में बिक रही अवैध बिक्री रोकने लिए विभाग के पास कोई प्लान नहीं है।
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अवैध शराब बनाने और बेचने वालों के खिलाफ तहसीलदार के नेतृत्व में आबकारी टीम ने छापेमारी अभियान चलाया। कई गांवों में दबिश दी गई। इस दौरान करीब एक हजार लीटर कच्ची शराब और आठ हजार लीटर लाहन बरामद किया गया।
तहसीलदार ऊन विपिन मैनवाल और जिला आबकारी अधिकारी राकेश बहादुर सिंह के नेतृत्व में गठित विशेष टीम ने सोमवार को ग्राम गंगारामपुरा, ग्राम खानपुर कलां, खेड़ी जुनारदार और बरनावी के जंगल एवं आसपास के क्षेत्रों में चिन्हित अवैध शराब के अड्डो पर छापेमारी की। इस दौरान एक हजार लीटर कच्ची शराब, आठ हजार लीटर लहन बरामद कर लिया। टीम ने वहां से शराब बनाने के उपकरण भी बरामद किए। टीम में आबकारी निरीक्षक रमाशंकर सिंह, आबकारी निरीक्षक कैराना शोभित कुमार आदि मौजूद रहे।
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जंगलों की खाक छान रही आबकारी, गांव-गांव बिक रही शराब
शामली। जिले में अवैध शराब माफिया द्वारा बनाई जाती है। इस शराब को माफिया के लोग ही गांवों में सप्लाई करते है और बेची जाती है। कैराना और झिंझाना क्षेत्र के गांवों में अवैध शराब खूब बिकती है, लेकिन आबकारी महज खानापूर्ति तक सीमित है। शराब पकड़ने के लिए खादर में छापे मारे जाते है, लेकिन गांवों में बिक रही अवैध बिक्री रोकने लिए विभाग के पास कोई प्लान नहीं है।
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