{"_id":"5e3474948ebc3e7081424e8b","slug":"cracker-factory-and-water-plant-in-300-sq-yards-shamli-news-mrt4666018172","type":"story","status":"publish","title_hn":"पटाखा फैक्ट्री के साथ चल रहा था वाटर प्लांट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पटाखा फैक्ट्री के साथ चल रहा था वाटर प्लांट
विज्ञापन
कांधला पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट के बाद लगी भीड़।
- फोटो : SHAMLI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
300 वर्ग गज में पटाखा फैक्टरी और वाटर प्लांट
शामली। कांधला की जिस फैक्टरी में हादसा हुआ है उसमें दीपावली पर भी जांच हुई थी। तब क्लीन चिट दी गई थी, जबकि हैरान करने वाली बात यह है कि 300 वर्ग गज के परिसर में पटाखा फैक्टरी के साथ ही वाटर प्लांट भी संचालित था। इससे सवाल उठ रहे हैं कि पटाखा फैक्टरी का लाइसेंस देते और बाद में जांच में अधिकारी इतनी अनदेखी कैसे करते रहे। डीएम ने मामले की मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दे दिए हैं।
दिल्ली सहारनपुर हाईवे से कुछ ही अंदर करीब 300 वर्ग गज एरिया में किराए की जमीन पर फैक्टरी बनी है। फैक्टरी में टीन शेड के नीचे पटाखे बनाए जाते थे। इसके पास ही एक बड़ा कमरा था जहां पर पटाखों और कच्चे मॉल का स्टॉक रखा गया था। इस कमरे में काफी संख्या में आतिशबाजी रखी थी और आग से विस्फोट हो गया। मौके पर ही काफी संख्या में पानी के कैंपर भी बिखरे हुए थे। बताया गया कि इसी परिसर में एक वाटर कैंपर का प्लांट भी चल रहा था। ये प्लांट केवल सुबह ही चलता है और यहां कई लोगों का आना जाना रहता है। ऐसे में सवाल उठता है कि एक ही परिसर में पटाखा निर्माण और दूसरा प्लांट क्या नियम विरुद्ध नहीं है। एक परिसर में ये दोनों काम कैसे हो रहे थे?।
बकौल डीएम दीपावली के समय जिले भर में लाइसेंसधारी पटाखा निर्माताओं की जांच हुई थी। इस फैक्टरी में भी जांच की गई थी। फायर स्टेशन वालों द्वारा भेजी गई रिपोर्ट भी संतोषजनक मिली थी।
विज्ञापन
- गनीमत रही, गैस गोदाम तक नहीं पहुंची चिंगारी
शामली। पटाखा फैक्टरी से करीब 300 मीटर दूरी पर ही गैस गोदाम भी है। यदि हादसे के बाद आतिशबाजी की चिंगारी गैस गोदाम तक पहुंच जाती तो भयानक हादसा हो सकता था। उसी परिसर में संचालित वाटर प्लांट में सुबह के समय कैंपर लेने को लोग आते थे। यदि हादसा सुबह होता तो, कई और लोग इसकी चपेट में आ सकते थे।
कोट
जिले में 37 लोगों पर पटाखा बनाने का लाइसेंस है। दीपावली के पास फैक्टरियों की जांच की गई थी। इस फैक्टरी में भी जांच हुई, तब फायर सर्विस वालों की रिपोर्ट भी संतोषजनक मिली थी। हादसे के बाद फैक्टरी के अंदर पानी के कैंपर भी मिले हैं। एक ड्रम भी था। यह जांच करानी है कि वहां पानी कैंपर की फैक्टरी चल रही थी या आतिशबाजी की वजह से पानी एकत्रित किया गया था। मामले की मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिए गए हैं। - अखिलेश सिंह, डीएम शामली
कोट
पटाखा फैक्टरी का लाइसेंस दो लोगों के नाम है। इनके खिलाफ केस दर्ज किया जाएगा। हालांकि घटना में फैक्टरी संचालक के पिता की भी मृत्यु हुई है। फिलहाल शवों के पोस्टमार्टम की कार्रवाई में पुलिस लगी है। - विनीत जायसवाल, एसपी शामली
विज्ञापन
शामली। कांधला की जिस फैक्टरी में हादसा हुआ है उसमें दीपावली पर भी जांच हुई थी। तब क्लीन चिट दी गई थी, जबकि हैरान करने वाली बात यह है कि 300 वर्ग गज के परिसर में पटाखा फैक्टरी के साथ ही वाटर प्लांट भी संचालित था। इससे सवाल उठ रहे हैं कि पटाखा फैक्टरी का लाइसेंस देते और बाद में जांच में अधिकारी इतनी अनदेखी कैसे करते रहे। डीएम ने मामले की मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दे दिए हैं।
दिल्ली सहारनपुर हाईवे से कुछ ही अंदर करीब 300 वर्ग गज एरिया में किराए की जमीन पर फैक्टरी बनी है। फैक्टरी में टीन शेड के नीचे पटाखे बनाए जाते थे। इसके पास ही एक बड़ा कमरा था जहां पर पटाखों और कच्चे मॉल का स्टॉक रखा गया था। इस कमरे में काफी संख्या में आतिशबाजी रखी थी और आग से विस्फोट हो गया। मौके पर ही काफी संख्या में पानी के कैंपर भी बिखरे हुए थे। बताया गया कि इसी परिसर में एक वाटर कैंपर का प्लांट भी चल रहा था। ये प्लांट केवल सुबह ही चलता है और यहां कई लोगों का आना जाना रहता है। ऐसे में सवाल उठता है कि एक ही परिसर में पटाखा निर्माण और दूसरा प्लांट क्या नियम विरुद्ध नहीं है। एक परिसर में ये दोनों काम कैसे हो रहे थे?।
विज्ञापन
बकौल डीएम दीपावली के समय जिले भर में लाइसेंसधारी पटाखा निर्माताओं की जांच हुई थी। इस फैक्टरी में भी जांच की गई थी। फायर स्टेशन वालों द्वारा भेजी गई रिपोर्ट भी संतोषजनक मिली थी।
विज्ञापन
- गनीमत रही, गैस गोदाम तक नहीं पहुंची चिंगारी
शामली। पटाखा फैक्टरी से करीब 300 मीटर दूरी पर ही गैस गोदाम भी है। यदि हादसे के बाद आतिशबाजी की चिंगारी गैस गोदाम तक पहुंच जाती तो भयानक हादसा हो सकता था। उसी परिसर में संचालित वाटर प्लांट में सुबह के समय कैंपर लेने को लोग आते थे। यदि हादसा सुबह होता तो, कई और लोग इसकी चपेट में आ सकते थे।
कोट
जिले में 37 लोगों पर पटाखा बनाने का लाइसेंस है। दीपावली के पास फैक्टरियों की जांच की गई थी। इस फैक्टरी में भी जांच हुई, तब फायर सर्विस वालों की रिपोर्ट भी संतोषजनक मिली थी। हादसे के बाद फैक्टरी के अंदर पानी के कैंपर भी मिले हैं। एक ड्रम भी था। यह जांच करानी है कि वहां पानी कैंपर की फैक्टरी चल रही थी या आतिशबाजी की वजह से पानी एकत्रित किया गया था। मामले की मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिए गए हैं। - अखिलेश सिंह, डीएम शामली
कोट
पटाखा फैक्टरी का लाइसेंस दो लोगों के नाम है। इनके खिलाफ केस दर्ज किया जाएगा। हालांकि घटना में फैक्टरी संचालक के पिता की भी मृत्यु हुई है। फिलहाल शवों के पोस्टमार्टम की कार्रवाई में पुलिस लगी है। - विनीत जायसवाल, एसपी शामली

कांधला पटाखा फैक्टरी में विस्फोट के बाद घटना की जानकारी लेते एसपी विनीत जायसवाल व एएसपी राजेश श?- फोटो : SHAMLI

कांधला पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट के बाद घटना की जानकारी लेते एसपी विनीत जायसवाल व एएसपी राजेश ?- फोटो : SHAMLI