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लागत बहुत बढ़ गई, समर्थन मूल्य कम

Thu, 10 Jun 2021 11:34 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 10 Jun 2021 11:34 PM IST
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Cost has gone up, support price low
शामली। जिले के किसानों और किसान संगठनों ने खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में की गई बढ़ोतरी को कम बताया है। उनका कहना है कि डीजल-पेट्रोल और लागत के आधार न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) घोषित होने चाहिए थे।
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किसानों द्वारा कृषि कानूनों को वापस लेने, एमएसपी को कानूनी अधिकार बनाने तथा स्वामीनाथन कमीशन की सिफारिशों के आधार पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) तय करने के मुद्दों पर चलाए जा रहे किसान आंदोलन के बीच में मोदी सरकार ने सत्र 2021-22 के लिए खरीफ की 17 फसलों की एमएसपी घोषित किया है।
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पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गेहूं-गन्ने के फसल चक्र में किसान धान, मक्का और बहुत ही सीमित मात्रा में दलहन एवं तिलहन की खेती करते हैं। इस वर्ष सबसे अधिक वृद्धि तिल में 452 रुपये (6.59 प्रतिशत क्विंटल) की हुई है, जबकि सबसे कम मक्का में 20 रुपये (1.08 प्रतिशत) क्विंटल बढ़े है। धान और कपास में 3.83 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। दलहन फसलों मूंग, उड़द और अरहर का 79 रुपये 300 रुपये की वृद्धि की गई है।
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सरकार के अनुसार किसान को बाजरा में लागत मूल्यों में सबसे अधिक 85 प्रतिशत, उड़द पर 65 प्रतिशत और धान तथा कपास पर 50 प्रतिशत मिल रहा है। प्रमुख फसल धान पर केवल 72 रुपये प्रति क्विंटल बढ़े है, जबकि मक्का पर 20 रुपये क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है। किसानों का कहना है कि इससे अधिक तो डीजल और बिजली महंगी होने से सिंचाई खर्च बढ़ जाएगा।
तिलहन और दलहन फसलों का बाजार मूल्य घोषित एमएसपी से कहीं अधिक है। उससे किसानों को कोई लाभ नहीं होने वाला। किसान सन्नी निर्वाल और काबड़ौत गांव के अनिल मलिक का कहना है कि महंगाई को देखते हुए खरीफ की फसलों पर बहुत कम न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाया गया है। इसमें की गई बढ़ोतरी से लागत मूल्य कहीं अधिक बढ़ा है।
कोट...
एमएसपी में बढ़ोतरी किसान के साथ मजाक है। रिजर्व बैंक ने 2021-22 में महंगाई दर 5.1 प्रतिशत का आंकलन किया है, जबकि मुख्य फसल धान में केवल 3.85 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। पिछले एक साल में डीजल के मूल्य में 16.56 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो चुकी है, जिसका सीधा असर फसलों के लागत मूल्य पर पड़ता है। सरकार लागत मूल्यों और उस पर मिलने वाले लाभ पर भी बहका रही है। क्योंकि लागत मूल्यों में स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार भूमि का किराया एवं पूंजी पर ब्याज नहीं जोड़ा जाता। - प्रो. सुधीर पंवार, सपा नेता
सरकार द्वारा 2021-22 के लिए खरीफ की 17 फसलों की घोषित किया गया न्यूनतम समर्थन मूल्य लागत और डीजल-पेट्रोल के मूल्य के आधार पर बहुत कम है। धान का समर्थन मूल्य पांच हजार रुपये क्विंटल, मक्का का मूल्य 2800 रुपये से लेकर 2900 रुपये क्विंटल, सरसों सात हजार रुपये क्विंटल, गेहूं का समर्थन मूल्य 2800 रुपये से लेकर 2900 रुपये क्विंटल और उड़द का दाम 6100 रुपये क्विंटल होना चाहिए। - चौधरी नरेश टिकैत राष्ट्रीय अध्यक्ष भाकियू।
- घोषित एमएसपी ऊंट के मुंह में जीरा है। डीजल-पेट्रोल के दाम बेतहाशा बढ़े हैं। किसानों की फसल की लागत बहुत बढ़ गई है। उसके सामने घोषित मूल्य कुछ भी नहीं है। सरकार एमएसपी पर खरीद का कानून बनाए। सवित मलिक, अध्यक्ष किसान यूनियन

- किसानों को अपनी फसल सरकारी केंद्रों पर बेचने में भारी दिक्कतें झेलनी पड़ती हैं। सरकार को ऐसा कानून बनाना चाहिए कि किसान जहां भी अपनी फसल बेचे उसे सरकारी मूल्य से कम दाम न मिले। - ओकार राणा किसान, गांव कादरगढ़
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