{"_id":"582f4aa54f1c1b61369017bc","slug":"consumer-forum-does-not-command-the-electrical-department","type":"story","status":"publish","title_hn":"उपभोक्ता फोरम का आदेश नहीं मानता विद्युत विभाग ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
उपभोक्ता फोरम का आदेश नहीं मानता विद्युत विभाग
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, शामली
Updated Sat, 19 Nov 2016 12:08 AM IST
विज्ञापन
court shimla
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
झिंझाना। आठ साल पूर्व कनेक्शन लेकर लाइन के लिए एस्टीमेट जमा कराने के बाद भी आज तक किसान की बिजली सप्लाई शुरू नहीं हो पाई है। हद तो तब हो गई जब इस मामले में उपभोक्ता फोरम द्वारा दिए गए किसान को जुर्माना अदा किए जाने के आदेश का भी विभाग द्वारा पालन नहीं किया जा रहा।
किसान कृष्णपाल निवासी गांव पटनी परतापुर के मजरे मंदिर वाला डेरा ने बताया कि वर्ष 2008 में खेतों की सिंचाई के लिए बिजली विभाग में दो सौ रुपये कि रसीद नंबर पांच में जमा कराकर एस्टीमेट के 10 हजार छह सौ रुपये 23 मार्च 2009 में रसीद संख्या 25711 द्वारा जमा कराये थे। जिसकी एवज में साढे़ सात हार्स पावर का कनेक्शन चालू होना था, लेकिन बिजली अधिकारी हर बार टालते चले आये।
जिसके चलते किसान ने थक हार कर उपभोक्ता फोरम में बिजली विभाग के अधिशासी अभियंता व अवर अभियंता प्रथम खंड के खिलाफ 2015 में वाद दायर
किया था। जिसमें न्यायालय से बिजली विभाग के अधिकारियों को 30 दिनों के अंदर किसान को हर्जाने के 35 हजार रुपये देने का आदेश दिया गया था तथा नहीं देने पर 12 प्रतिशत का साधारण ब्याज देने के निर्देश देने के बाद भी दो माह से अधिक बीतने के बाद भी आज तक किसान को हर्जाना नहीं दिया गया है और ना ही उसका बिजली कनेक्शन चालू किया गया है।
विज्ञापन
किसान का आरोप है कि उसकी लगभग 10 बीघा जमीन आठ वर्षों से पानी के बिना बंजर हो चुकी है। परिवार भूखे मरने की कगार पर है। अधिकारियों के लिये कोर्ट के आदेश कोई मायने नही रखते है। पीड़ित ने दुबारा कोर्ट कि शरण में जाने की बात कही है।
विज्ञापन
किसान कृष्णपाल निवासी गांव पटनी परतापुर के मजरे मंदिर वाला डेरा ने बताया कि वर्ष 2008 में खेतों की सिंचाई के लिए बिजली विभाग में दो सौ रुपये कि रसीद नंबर पांच में जमा कराकर एस्टीमेट के 10 हजार छह सौ रुपये 23 मार्च 2009 में रसीद संख्या 25711 द्वारा जमा कराये थे। जिसकी एवज में साढे़ सात हार्स पावर का कनेक्शन चालू होना था, लेकिन बिजली अधिकारी हर बार टालते चले आये।
विज्ञापन
जिसके चलते किसान ने थक हार कर उपभोक्ता फोरम में बिजली विभाग के अधिशासी अभियंता व अवर अभियंता प्रथम खंड के खिलाफ 2015 में वाद दायर
किया था। जिसमें न्यायालय से बिजली विभाग के अधिकारियों को 30 दिनों के अंदर किसान को हर्जाने के 35 हजार रुपये देने का आदेश दिया गया था तथा नहीं देने पर 12 प्रतिशत का साधारण ब्याज देने के निर्देश देने के बाद भी दो माह से अधिक बीतने के बाद भी आज तक किसान को हर्जाना नहीं दिया गया है और ना ही उसका बिजली कनेक्शन चालू किया गया है।
विज्ञापन
किसान का आरोप है कि उसकी लगभग 10 बीघा जमीन आठ वर्षों से पानी के बिना बंजर हो चुकी है। परिवार भूखे मरने की कगार पर है। अधिकारियों के लिये कोर्ट के आदेश कोई मायने नही रखते है। पीड़ित ने दुबारा कोर्ट कि शरण में जाने की बात कही है।