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Shamli News: कोचिंग सेंटरों में बेहतर शिक्षा ही नहीं, सुरक्षित वातावरण भी जरूरी
Tue, 07 Jul 2026 01:29 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Tue, 07 Jul 2026 01:29 AM IST
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गांव सिंभालका स्थित नगर पंचायत भवन में संवाद कार्यक्रम में विचार रखती वक्ता। संवाद
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शामली। ग्राम पंचायत कार्यालय सिंभालका में सोमवार को अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से आयोजित संवाद कार्यक्रम में कोचिंग संस्थाएं हमारे बच्चों के लिए कितनी सुरक्षित हैं विषय पर महिला अभिभावकों और शिक्षिकाओं ने चर्चा करते हुए अपने विचार रखे।
वक्ताओं ने कहा कि हाल के वर्षों में कोचिंग संस्थानों में हुई घटनाओं ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि कई कोचिंग सेंटरों में फायर सेफ्टी समेत आवश्यक सुरक्षा मानकों का समुचित पालन नहीं किया जाता, जिससे अभिभावकों की चिंता बढ़ी है। शिक्षिका रेशमा ने कहा कि बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ सुरक्षित वातावरण भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
सीमा और कुसुमलता ने कहा कि किसी भी कोचिंग संस्थान में प्रवेश दिलाने से पहले अभिभावकों को भवन की स्थिति, आपातकालीन निकास, अग्निशमन उपकरण, सुरक्षा व्यवस्था और आसपास के माहौल का स्वयं निरीक्षण करना चाहिए। उनके अनुसार बच्चों की सुरक्षा शिक्षा से पहले प्राथमिकता होनी चाहिए।
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निशा, शिल्पा और मीनाक्षी ने कहा कि विद्यालय बच्चों को शिक्षा के साथ अनुशासन, संस्कार और सामाजिक वातावरण भी प्रदान करते हैं, जबकि अधिकांश कोचिंग संस्थान केवल परीक्षा केंद्रित शिक्षा तक सीमित रहते हैं। इसलिए बच्चों के सर्वांगीण विकास में विद्यालयों की भूमिका अधिक महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम में हिमानी, प्रीति, अनीता, संगीता, शशि, संतोष और कविता सहित अन्य महिलाओं ने भी अपने विचार रखे।
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वक्ताओं ने कहा कि हाल के वर्षों में कोचिंग संस्थानों में हुई घटनाओं ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि कई कोचिंग सेंटरों में फायर सेफ्टी समेत आवश्यक सुरक्षा मानकों का समुचित पालन नहीं किया जाता, जिससे अभिभावकों की चिंता बढ़ी है। शिक्षिका रेशमा ने कहा कि बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ सुरक्षित वातावरण भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
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सीमा और कुसुमलता ने कहा कि किसी भी कोचिंग संस्थान में प्रवेश दिलाने से पहले अभिभावकों को भवन की स्थिति, आपातकालीन निकास, अग्निशमन उपकरण, सुरक्षा व्यवस्था और आसपास के माहौल का स्वयं निरीक्षण करना चाहिए। उनके अनुसार बच्चों की सुरक्षा शिक्षा से पहले प्राथमिकता होनी चाहिए।
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निशा, शिल्पा और मीनाक्षी ने कहा कि विद्यालय बच्चों को शिक्षा के साथ अनुशासन, संस्कार और सामाजिक वातावरण भी प्रदान करते हैं, जबकि अधिकांश कोचिंग संस्थान केवल परीक्षा केंद्रित शिक्षा तक सीमित रहते हैं। इसलिए बच्चों के सर्वांगीण विकास में विद्यालयों की भूमिका अधिक महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम में हिमानी, प्रीति, अनीता, संगीता, शशि, संतोष और कविता सहित अन्य महिलाओं ने भी अपने विचार रखे।