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बंद रहे बाजार, गलियों में सन्नाटा
ब्यूरो, अमर उजाला/शामली
Updated Mon, 05 Feb 2018 12:16 AM IST
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Hukum Singh Panchtatta merged
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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कैराना। भाजपा सांसद हुकुम सिंह के निधन के कारण शोक में शहर हो या फिर गांव, हर जगह सूनापन दिखाई दिया। कैराना के बाजार बंद रहे और कंडेला गांव के साथ अन्य गांवों में सन्नाटा पसरा रहा। शनिवार रात नौ बजे जैसे ही जेपी अस्पताल में बाबू हुकुम सिह की मौत का समाचार कैराना पहुंचा तो कस्बे के व्यापारी व आम जनता कलस्यान चौपाल पर पहुंचनी शुरू हो गई थी।
कलस्यान चौपाल से मौत की पुष्टि होने के बाद काफी संख्या में लोग रात में ही मायापुर फार्म हाउस पर पहुंच गए थे। रात 11.58 पर नोएडा से बाबूजी का शव मायापुर फार्म हाउस पर लाया गया। वहीं, रविवार सुबह बाबूजी की मौत की खबर कैराना व आसपास के क्षेत्र में पुरी तरह फैल गई। बाबूजी की मौत के शोक में कैराना में सभी ने अपनी दुकानें पूरी तरह बंद रखी। कैराना व देहात के दोनों समुदाय के हजारों लोग बाबूजी के अंतिम दर्शन के लिए सुबह से ही मायापुर फार्म हाउस पर पहुंच गए थे। उधर, गांव कंडेला सहित शेखूपुरा, ऊंचागांव, हिंगोखेडी, तितरवाड़ा, सहपत, मवी, रामड़ा इस्सोपुर खुरगान, भूरा आदि गांवों में मातम पसरा रहा। गांवों की गलियां सुनसान पड़ी रही।
कैराना ने खो दिए राजनीति के तीन धुुरंधर
अमर उजाला ब्यूरो
कैराना।
कैराना ने प्रदेश की राजनीति के एक के बाद एक तीन धुरंधरों को खो दिया। एक तरफ जहां हसन चबूतरे पर सूनापन दिखाई देता था तो अब कलस्यान चौपाल का भी वहीं हाल है। लोकतंत्र के तीन प्रहरियों को खोने के बाद कैराना और क्षेत्र के लोग स्तब्ध है।
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लोकसभा चुनाव हो या फिर विधानसभा चुनाव, कैराना सीट पर सूबे के दिग्गजों की नजर रहती थी।
चौधरी अख्तर हसन ने 1972 में राजनीति की शुरूआत की और उसके बाद कैराना सीट से 1984 में लोकसभा चुनाव लड़कर सांसद बने। 1974 का विधानसभा चुनाव जीतकर विधायक बने हुकुम सिंह की राजनीति की शुरूआत हुई और यही से दो चबूतरों
कलस्यान चौपाल और हसन चबूतरे की शुरूआत हुई। हुकुम सिंह ने सात बार कैराना से विधायक बनने का गौरव प्राप्त किया। सूबे की राजनीति में कैराना और हुकुम सिंह छा गए और सूबे की सरकार में उनका कद ऊंचा हो गया।
उसके बाद चौधरी अख्तर हसन ने राजनीति से संन्यास ले लिया और राजनीति अपने पुत्र चौधरी मुनव्वर हसन को सौंप दी। कैराना की राजनीति में चौधरी मुनव्वर हसन भी हुकुम सिंह की तरह रहें। अपने काम करने के अंदाज और लोकप्रियता के चलते
मुनव्वर हसन कई बार यहां से सांसद रहे और सबसे कम उम्र में चारों सदनों में घूमने का गौरव प्राप्त किया। उनका कद सपा में ऐसा हो गया कि जो चाहा वो हुआ। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में अख्तर हसन का हसन चबूतरा और हुकुम की कलस्यान चौपाल दूर-दूर तक विख्यात रहा।
चौधरी मुनव्वर हसन का इंतकाल 10 दिसंबर 2008 में एक हादसे में हो गया था। 25 नवंबर 2017 को अख्तर हसन की लंबी बीमारी के चलते मौत हो गई थी। वहीं, शनिवार को पश्चिमी उप्र की राजनीति के दिग्गज बाबू हुकुम सिंह भी दुनिया को अलविदा कह गये। चंद सालों में कैराना की राजनीति की तीन चट्टान कैराना को अलविदा कह गई।
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कलस्यान चौपाल से मौत की पुष्टि होने के बाद काफी संख्या में लोग रात में ही मायापुर फार्म हाउस पर पहुंच गए थे। रात 11.58 पर नोएडा से बाबूजी का शव मायापुर फार्म हाउस पर लाया गया। वहीं, रविवार सुबह बाबूजी की मौत की खबर कैराना व आसपास के क्षेत्र में पुरी तरह फैल गई। बाबूजी की मौत के शोक में कैराना में सभी ने अपनी दुकानें पूरी तरह बंद रखी। कैराना व देहात के दोनों समुदाय के हजारों लोग बाबूजी के अंतिम दर्शन के लिए सुबह से ही मायापुर फार्म हाउस पर पहुंच गए थे। उधर, गांव कंडेला सहित शेखूपुरा, ऊंचागांव, हिंगोखेडी, तितरवाड़ा, सहपत, मवी, रामड़ा इस्सोपुर खुरगान, भूरा आदि गांवों में मातम पसरा रहा। गांवों की गलियां सुनसान पड़ी रही।
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कैराना ने खो दिए राजनीति के तीन धुुरंधर
अमर उजाला ब्यूरो
कैराना।
कैराना ने प्रदेश की राजनीति के एक के बाद एक तीन धुरंधरों को खो दिया। एक तरफ जहां हसन चबूतरे पर सूनापन दिखाई देता था तो अब कलस्यान चौपाल का भी वहीं हाल है। लोकतंत्र के तीन प्रहरियों को खोने के बाद कैराना और क्षेत्र के लोग स्तब्ध है।
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लोकसभा चुनाव हो या फिर विधानसभा चुनाव, कैराना सीट पर सूबे के दिग्गजों की नजर रहती थी।
चौधरी अख्तर हसन ने 1972 में राजनीति की शुरूआत की और उसके बाद कैराना सीट से 1984 में लोकसभा चुनाव लड़कर सांसद बने। 1974 का विधानसभा चुनाव जीतकर विधायक बने हुकुम सिंह की राजनीति की शुरूआत हुई और यही से दो चबूतरों
कलस्यान चौपाल और हसन चबूतरे की शुरूआत हुई। हुकुम सिंह ने सात बार कैराना से विधायक बनने का गौरव प्राप्त किया। सूबे की राजनीति में कैराना और हुकुम सिंह छा गए और सूबे की सरकार में उनका कद ऊंचा हो गया।
उसके बाद चौधरी अख्तर हसन ने राजनीति से संन्यास ले लिया और राजनीति अपने पुत्र चौधरी मुनव्वर हसन को सौंप दी। कैराना की राजनीति में चौधरी मुनव्वर हसन भी हुकुम सिंह की तरह रहें। अपने काम करने के अंदाज और लोकप्रियता के चलते
मुनव्वर हसन कई बार यहां से सांसद रहे और सबसे कम उम्र में चारों सदनों में घूमने का गौरव प्राप्त किया। उनका कद सपा में ऐसा हो गया कि जो चाहा वो हुआ। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में अख्तर हसन का हसन चबूतरा और हुकुम की कलस्यान चौपाल दूर-दूर तक विख्यात रहा।
चौधरी मुनव्वर हसन का इंतकाल 10 दिसंबर 2008 में एक हादसे में हो गया था। 25 नवंबर 2017 को अख्तर हसन की लंबी बीमारी के चलते मौत हो गई थी। वहीं, शनिवार को पश्चिमी उप्र की राजनीति के दिग्गज बाबू हुकुम सिंह भी दुनिया को अलविदा कह गये। चंद सालों में कैराना की राजनीति की तीन चट्टान कैराना को अलविदा कह गई।