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बंद का रहा मिला जुला असर
अमर उजाला ब्यूरो, शामली
Updated Sat, 01 Jul 2017 12:30 AM IST
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GST
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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कांधला। जीएसटी लगाए जाने को लेकर कस्बा कांधला में बंद के आह्वान का मिला जुला असर रहा। कुछ बाजारों में दुकानें खुलीं, तो कुछ जगह बंद रहीं। व्यापारियों ने जीएसटी में खामियां बताकर उन्हें दूर कराने की मांग की है।
व्यापार मंडल ने जीएसटी में कुछ खामियां बताते हुए बाजार बंद का आह्वान किया था। इसके चलते शुक्रवार को कांधला कस्बे में मुख्य बाजार बंद रहे, लेकिन कहीं कहीं दुकानदारों ने इस अपील को दरकिनार करते हुए अपने प्रतिष्ठानों को खुला रखा। व्यापारी नेता ईश्वर दयाल कंसल ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा एक जुलाई से लागू किए जा रहे जीएसटी का व्यापार मंडल स्वागत करता है।
मगर उसमें कुछ कमियां भी हैं, जिनमें सुधार किया जाना जरूरी है। उन्होंने बताया कि जब जीएसटी में सभी कर समाहित हैं तो मंडी शुल्क समाप्त किया जाना जरूरी है। अभी तक तिमाही रिटर्न जाता है, अब एक माह में 10, 20, 25 तारीख को तीन रिटर्न की व्यवस्था पूरी तरह से अव्यवहारिक है। छोटा व्यापारी तो क्लर्क बनकर रह जाएगा।
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उसमें सुधार करते हुए रिटर्न तिमाही रखा जाए। विभाग द्वारा व्यापारियों को सभी सूचनाएं अंग्रेजी में दी जा रही है। जबकि अधिकतर व्यापारी अल्प शिक्षित है।
सूचनाएं हिंदी और क्षेत्रीय भाषा में भी होनी जरूरी हैं। वहीं सभी कार्य ऑनलाइन की व्यवस्था जरूरी नहीं है। उन्होंने बताया कि भारत जैसे देश में जहां कनेक्टिविटी नेटवर्क, बिजली की स्थिती बहुत सोचनीय है, इसलिए इसे मेन्युअल किया जाए। 500 रुपये तक के जूते और कपड़ा, धूपबत्ती, जैसी करमुक्त वस्तुओं को पहले की तरह ही जीएसटी से बाहर रखा जाएं।
कपड़े पर न लगे जीएसटी
शामली। पश्चिमी उत्तर प्रदेश संयुक्त उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष घनश्यामदास गर्ग के नेतृत्व व्यापारियों ने कलक्ट्रेट पहुंचकर केंद्रीय वित्त मंत्री एवं जीएसटी परिषद के चेयरमैन अरुण जेटली के नाम ज्ञापन डीएम को सौंपा। उन्होंने जीएसटी कर में व्यापारियों के उत्पीड़न रोकने और कपड़े पर एक वर्ष तक जीएसटी प्रणाली स्थगित किए जाने की मांग की है।
पांच सूत्रीय ज्ञापन में व्यापारियों ने अवगत कराया कि एक जुलाई को जीएसटी पूरे देश में लागू हो जाएगा। जीएसटी कर प्रणाली लागू होने पर व्यापारी का कतई उत्पीड़न न हो, छोटी-छोटी त्रुटियों में जीएसटी प्रणाली में लगाई जाने वाली पेनल्टी और सजाओं के प्राविधान को एक साल तक स्थगित किया जाए। ज्ञापन में मासिक, त्रैमासिक, वार्षिक रिटर्न में गलती होने पर व्यापारी को रिवाइज रिटर्न भरने का मौका दिए जाने, कपडे़े में एक साल तक जीएसटी को स्थगित रखने, मंडी शुल्क को समाप्त कर जीएसटी में समायोजित किए जाने की मांग की गई।
डीएम के नाम ज्ञापन में इंस्पेक्टर राज द्वारा व्यापारियों के होने वाले उत्पीड़न रोकने के लिए व्यापक कानून बनाए जाने की वकालत की गई। इस दौरान जिलाध्यक्ष सूर्यवीर सिंह, प्रदेश संगठन मंत्री सुभाष धीमान, शहर अध्यक्ष नरेंद्र अग्रवाल, नगर महामंत्री रवि संगल, अनुज अग्रवाल, महेश धीमान, आशुपुरी, गौरव बंसल, रामदयाल गुप्ता, प्रवीण कुमार, राजेश संगल, प्रदेश उपाध्यक्ष युवा अमित जैन, नरेेश गर्ग आदि मौजूद रहे।
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व्यापार मंडल ने जीएसटी में कुछ खामियां बताते हुए बाजार बंद का आह्वान किया था। इसके चलते शुक्रवार को कांधला कस्बे में मुख्य बाजार बंद रहे, लेकिन कहीं कहीं दुकानदारों ने इस अपील को दरकिनार करते हुए अपने प्रतिष्ठानों को खुला रखा। व्यापारी नेता ईश्वर दयाल कंसल ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा एक जुलाई से लागू किए जा रहे जीएसटी का व्यापार मंडल स्वागत करता है।
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मगर उसमें कुछ कमियां भी हैं, जिनमें सुधार किया जाना जरूरी है। उन्होंने बताया कि जब जीएसटी में सभी कर समाहित हैं तो मंडी शुल्क समाप्त किया जाना जरूरी है। अभी तक तिमाही रिटर्न जाता है, अब एक माह में 10, 20, 25 तारीख को तीन रिटर्न की व्यवस्था पूरी तरह से अव्यवहारिक है। छोटा व्यापारी तो क्लर्क बनकर रह जाएगा।
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उसमें सुधार करते हुए रिटर्न तिमाही रखा जाए। विभाग द्वारा व्यापारियों को सभी सूचनाएं अंग्रेजी में दी जा रही है। जबकि अधिकतर व्यापारी अल्प शिक्षित है।
सूचनाएं हिंदी और क्षेत्रीय भाषा में भी होनी जरूरी हैं। वहीं सभी कार्य ऑनलाइन की व्यवस्था जरूरी नहीं है। उन्होंने बताया कि भारत जैसे देश में जहां कनेक्टिविटी नेटवर्क, बिजली की स्थिती बहुत सोचनीय है, इसलिए इसे मेन्युअल किया जाए। 500 रुपये तक के जूते और कपड़ा, धूपबत्ती, जैसी करमुक्त वस्तुओं को पहले की तरह ही जीएसटी से बाहर रखा जाएं।
कपड़े पर न लगे जीएसटी
शामली। पश्चिमी उत्तर प्रदेश संयुक्त उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष घनश्यामदास गर्ग के नेतृत्व व्यापारियों ने कलक्ट्रेट पहुंचकर केंद्रीय वित्त मंत्री एवं जीएसटी परिषद के चेयरमैन अरुण जेटली के नाम ज्ञापन डीएम को सौंपा। उन्होंने जीएसटी कर में व्यापारियों के उत्पीड़न रोकने और कपड़े पर एक वर्ष तक जीएसटी प्रणाली स्थगित किए जाने की मांग की है।
पांच सूत्रीय ज्ञापन में व्यापारियों ने अवगत कराया कि एक जुलाई को जीएसटी पूरे देश में लागू हो जाएगा। जीएसटी कर प्रणाली लागू होने पर व्यापारी का कतई उत्पीड़न न हो, छोटी-छोटी त्रुटियों में जीएसटी प्रणाली में लगाई जाने वाली पेनल्टी और सजाओं के प्राविधान को एक साल तक स्थगित किया जाए। ज्ञापन में मासिक, त्रैमासिक, वार्षिक रिटर्न में गलती होने पर व्यापारी को रिवाइज रिटर्न भरने का मौका दिए जाने, कपडे़े में एक साल तक जीएसटी को स्थगित रखने, मंडी शुल्क को समाप्त कर जीएसटी में समायोजित किए जाने की मांग की गई।
डीएम के नाम ज्ञापन में इंस्पेक्टर राज द्वारा व्यापारियों के होने वाले उत्पीड़न रोकने के लिए व्यापक कानून बनाए जाने की वकालत की गई। इस दौरान जिलाध्यक्ष सूर्यवीर सिंह, प्रदेश संगठन मंत्री सुभाष धीमान, शहर अध्यक्ष नरेंद्र अग्रवाल, नगर महामंत्री रवि संगल, अनुज अग्रवाल, महेश धीमान, आशुपुरी, गौरव बंसल, रामदयाल गुप्ता, प्रवीण कुमार, राजेश संगल, प्रदेश उपाध्यक्ष युवा अमित जैन, नरेेश गर्ग आदि मौजूद रहे।