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Shamli News: जर्जर स्कूलों की छतों से रिस रहे बेहतर शिक्षा के दावे

Sun, 03 Aug 2025 12:42 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली Updated Sun, 03 Aug 2025 12:42 AM IST
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Claims of better education are leaking from the roofs of dilapidated schools
कैसी है पाठशालागांव धनैना के विद्यालय के कमरे की जर्जर छत। संवाद - फोटो : संवाद
शामली। सरकारी परिषदीय स्कूलों के बच्चों को सुरक्षित वातावरण में गुणवत्तायुक्त शिक्षा देने के बेसिक शिक्षा विभाग दावे जर्जर स्कूलों की छत से रिस रहे हैं। अंग्रजों के जमाने में बने सरकारी विद्यालयों के भवन जर्जर हालत में हैं।
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कहीं पर बरसात में कमरे की छत टपक रही है तो कहीं पर पानी की निकासी न होने के कारण बारिश का पानी स्कूल परिसर में भरा है। कमरे कम होने के कारण एक कमरे में दो-दो कक्षाएं संचालित हो रही है। विद्यालयों में पड़ताल की गई तो हालत चौकाने वाली थी।
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n धनैना के स्कूल परिसर में भरा पानी, लिंटर से निकला रहा मलबा : गांव धनैना स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय में कक्षा एक से आठ तक के बच्चे पढ़ते हैं। 1996 में बना विद्यालय के जर्जर भवन में चार कमरे और एक बरामदा हैं जबकि कक्षाएं आठ हैं। कमरे कम होने के कारण प्रत्येक कमरे में दो-दो कक्षाएं चलाई जा रही है। विद्यालय में 90 बच्चे पंजीकृत है और शिक्षक पांच नियुक्त हैं। मिड डे मील मेन्यू के आधार पर दिया जा रहा है। विद्यालय की देखरेख की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत की है। विद्यालय की हालत देखने से लग रहा है कि इसका रख रखाव ठीक तरह से नहीं किया जा रहा है। बरामदे की छत के लिंटर का मलबा गिरा है। कमरे में भी छत के लिंटर का मलबा टूटा मिला। पानी की निकासी न होने से विद्यालय परिसर में बरसात का पानी भरा रहता है, जिससे आने जाने में परेशानी होने के साथ बीमारी फैलने का खतरा बना हुआ है। विद्यालय की चहारदीवारी दो स्थानों से टूटी होने के कारण परिसर में पशु व अन्य जानवर घूमते रहते हैं, जिस कारण बच्चों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ी रहती है। प्रधानाध्यापक संजीव कुमार ने बताया कि ग्राम प्रधान को कई बार अवगत कराया गया जा चुका हैं। एक बार सीडीओ को भी जानकारी दी जा चुकी है, लेकिन अभी तक मरम्मत नहीं हुई है।
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