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कैंसर को मात देकर बढ़ा ली अपनी उम्र  

Mon, 04 Feb 2019 11:08 PM IST
NAVEEN GUPTA amarujala
amarujala Published by: NAVEEN GUPTA Updated Mon, 04 Feb 2019 11:08 PM IST
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cancer ko maat dekar bada li apni umr
file - फोटो : amarujala
कैंसर ऐसी खतरनाक बीमारी है, जिसका नाम ही दहशत पैदा करता है। मगर कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिन्होंने न सिर्फ इस बीमारी का डटकर सामना किया, बल्कि कैंसर को मात दे परिवार के साथ सामान्य जिंदगी जी रहे हैं। विश्व कैंसर दिवस पर अमर उजाला की टीम ने कुछ ऐसे दृढ़निश्चय रखने वाले लोगों से संपर्क किया और उनके संघर्ष की कहानी की जानकारी ली।        
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केस नंबर-1
हसनपुर लुहारी गांव की राजकली (42) आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के रूप में बच्चों को पढ़ाने का काम करती हैं। दो साल पहले उन्हें कैंसर ने जकड़ लिया था। उस समय राजकली को लगा कि शायद उनके जीवन का सफर पूरा हो चुका है। मगर परिवार उनका सहारा बना और उन्होंने पहले देहरादून व इसके बाद चंडीगढ़ से अपने कैंसर का उपचार कराया। ये राजकली के दृढ़ निश्चय का ही नतीजा है कि आज भी वे घर के सारे काम निपटाने के साथ-साथ बच्चों को पढ़ाती भी हैं। उन्हें देखकर ऐसा नहीं लगता कि कभी उन्हें कैंसर भी हुआ होगा।
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केस नंबर-2
हसनपुर निवासी 62 साल के तेजपाल प्राइवेट बस चलते हैं। करीब दस साल पूर्व तेजपाल कैंसर की चपेट में आ गए। इससे पूरा परिवार सदमे में आ गया। तेजपाल और उनके बच्चों ने हिम्मत नहीं हारी। करीब चार साल तक तेजपाल ने नियमित रूप से दिल्ली में उपचार कराया। इस काम में परिवार ने उनका भरपूर साथ दिया। आज तेजपाल कैंसर से जंग जीतकर अपने परिवार के साथ आराम से जिंदगी गुजार रहे हैं।        
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केस नंबर-3
करीब 66 वर्षीय हसनपुर लुहारी गांव निवासी रामप्रसाद को 12 साल पहले गले का कैंसर हुआ। बकौल रामप्रसाद जब उन्हें कैंसर का पता चला तो मानो परिवार पर गमों का पहाड़ टूट गया। मगर वे नहीं घबराए और हिम्मत से काम लिया। नियमित रूप से चिकित्सकों को दिखाया। आज 66 वर्ष की उम्र होने के बाद रामप्रसाद खेती कर परिवार का पालन करते हैं और उनके दोनों बच्चे आज अच्छी शिक्षा प्राप्त कर बाहर नौकरी कर रहे हैं।        


जागरूकता के बारे में बात करें तो यदि कैंसर का पता पहली और दूसरी स्टेज में चलता है तो उसे रिकवर किया जा सकता है, लेकिन यदि तीसरी या चौथी स्टेज में पता चले तो उपचार मुश्किल हो जाता है। वजह है कि पहली और दूसरी स्टेज में कैंसर साइलेंट रहता है। मगर तीसरी व चौथी स्टेज में दर्द या अन्य लक्षण दिखने लगते हैं। गले व मुंह के कैंसर से बचाव के लिए स्मोकिंग, तंबाकू एवं शराब से परहेज किया जाए तो काफी हद तक इस बीमारी से दूर रहा जा सकता है। - डॉ कांति प्रसाद, चिकित्सा अधीक्षक सामुदायिक चिकित्सालय
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