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दो दिन के लॉकडाउन से सिमट जाएगा कारोबार
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शामली। रक्षाबंधन से पहले दो दिन के लॉकडाउन में राखियों की बिक्री को लेकर दुकानदार चिंतित हैं। लॉकडाउन में दुकानदार जिला प्रशासन की गाइड लाइन का इंतजार कर रहे हैं। दुकानदारों का कहना है कि रक्षाबंधन से एक दिन पूर्व राखियां बेचने की अनुमति दी जाए, जिससे उनके डूबते कारोबार को सहारा मिल सके।
तीन अगस्त को रक्षाबंधन का त्योहार है। रक्षाबंधन से पूर्व शनिवार-रविवार को लॉकडाउन होने से बाजार बंद रहेंगे। लॉकडाउन में बाजार बंद रहने से राखियों की बिक्री पर भी असर पड़ेगा। रक्षाबंधन के लिए मिठाइयों और राखी की बिक्री के लिए बृहस्पतिवार और शुक्रवार के दिन ही बचे हैं। लॉकडाउन में दुकानदार जब मिठाइयां नहीं बना पाएंगे, तो बिक्री कैसे कर पाएंगे। इससे मिठाई और राखी विक्रेताओं को नुकसान उठाना पड़ सकता है। बृहस्पतिवार को शहर के बाजारों में राखियों और मिठाइयों की अपेक्षाकृत कम ही बिक्री हो पाई।
चीन की राखियों को कहा ना, स्वदेशी राखियां मंगाईं
शामली। शहर गांधी चौक पर राखी के थोक विक्रेता धनराज बंसल का कहना है कि रक्षाबंधन पर हर साल 15-20 लाख रुपये की चीन की राखियां बिकती थीं। इस बार स्वदेशी राखियां मंगाई हैं। शहर में 100 से ज्यादा विभिन्न राखियों के स्टाल लगते थे। इस बार गिने चुने स्टाल लगे हैं। पिछले साल की तुलना में इस साल 50 फीसदी राखियों की कम बिक्री होने की संभावना है। रिटेल दुकानदारों द्वारा दिया गया राखी का माल बच गया तो रखा रह जाएगा। महंगी राखियों की अपेक्षा साधारण राखियों की बिक्री ज्यादा है। स्वदेशी राखियों में लेडिज सेट, महिलाओं के लूंबा सेट, मोटू-पतलू, राधे- कृष्णा, स्वास्तिक ओम की राखियां आ रही हैं।
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लॉकडाउन में राखी बेचने की मिले अनुमति
शामली। गांधी चौक निवासी नीरज तायल का कहना है कि जिले में राखी की रिटेल की ज्यादा और थोक की कम बिक्री है। रिटेल में प्रतिदिन पांच-सात हजार रुपये की बिक्री हो रही है। स्वदेशी राखी में गुजरात, अहमदाबाद, कोलकाता, मेरठ-, दिल्ली में बनी राखियां बाजार में हैं। लॉकडाउन में जिला प्रशासन द्वारा राखियां बेचने की अनुमति दी जाए, जिससे दुकानदारों के डूबते कारोबार को संजीवनी मिल सके।
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तीन अगस्त को रक्षाबंधन का त्योहार है। रक्षाबंधन से पूर्व शनिवार-रविवार को लॉकडाउन होने से बाजार बंद रहेंगे। लॉकडाउन में बाजार बंद रहने से राखियों की बिक्री पर भी असर पड़ेगा। रक्षाबंधन के लिए मिठाइयों और राखी की बिक्री के लिए बृहस्पतिवार और शुक्रवार के दिन ही बचे हैं। लॉकडाउन में दुकानदार जब मिठाइयां नहीं बना पाएंगे, तो बिक्री कैसे कर पाएंगे। इससे मिठाई और राखी विक्रेताओं को नुकसान उठाना पड़ सकता है। बृहस्पतिवार को शहर के बाजारों में राखियों और मिठाइयों की अपेक्षाकृत कम ही बिक्री हो पाई।
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चीन की राखियों को कहा ना, स्वदेशी राखियां मंगाईं
शामली। शहर गांधी चौक पर राखी के थोक विक्रेता धनराज बंसल का कहना है कि रक्षाबंधन पर हर साल 15-20 लाख रुपये की चीन की राखियां बिकती थीं। इस बार स्वदेशी राखियां मंगाई हैं। शहर में 100 से ज्यादा विभिन्न राखियों के स्टाल लगते थे। इस बार गिने चुने स्टाल लगे हैं। पिछले साल की तुलना में इस साल 50 फीसदी राखियों की कम बिक्री होने की संभावना है। रिटेल दुकानदारों द्वारा दिया गया राखी का माल बच गया तो रखा रह जाएगा। महंगी राखियों की अपेक्षा साधारण राखियों की बिक्री ज्यादा है। स्वदेशी राखियों में लेडिज सेट, महिलाओं के लूंबा सेट, मोटू-पतलू, राधे- कृष्णा, स्वास्तिक ओम की राखियां आ रही हैं।
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लॉकडाउन में राखी बेचने की मिले अनुमति
शामली। गांधी चौक निवासी नीरज तायल का कहना है कि जिले में राखी की रिटेल की ज्यादा और थोक की कम बिक्री है। रिटेल में प्रतिदिन पांच-सात हजार रुपये की बिक्री हो रही है। स्वदेशी राखी में गुजरात, अहमदाबाद, कोलकाता, मेरठ-, दिल्ली में बनी राखियां बाजार में हैं। लॉकडाउन में जिला प्रशासन द्वारा राखियां बेचने की अनुमति दी जाए, जिससे दुकानदारों के डूबते कारोबार को संजीवनी मिल सके।