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चुनावी साल में भी नहीं मिला रोडवेज कार्यशाला के लिए बजट
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शामली। 2021 भी बीत गया, चुनावी साल में मुजफ्फरनगर रोड पर फतेहपुर गांव में आरक्षित 9 बीघा भूमि में रोडवेज की कार्यशाला निर्माण के लिए 9 करोड़ रुपये की धनराशि शासन से नहीं मिली। धनराशि न मिलने से इस साल भी कार्यशाला का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया
42 साल में भी शामली में रोडवेज की कार्यशाला का निर्माण नहीं हो पाया। वर्ष 1978 में लोनी, वर्ष 1988 में बड़ौत में रोडवेज की कार्यशाला बन गई थी। लेकिन शामली के लोगों के लिए यह अभी सपना ही है। 28 सितंबर 2011 को जिला बनने के बाद बस अड्डे को अनुबंधित बसों का डिपो घोषित किया गया। वर्ष 2015 में फतेहपुर में 9 बीघा भूमि शामली डिपो की कार्यशाला के लिए भूमि आरक्षित की गई। शासन ने शामली डिपो की कार्यशाला के लिए 47 लाख रुपये अवमुक्त किए। वर्ष 2018 में तत्कालीन डीएम इंद्र विक्रम सिंह ने कार्यशाला के लिए भूमि रोडवेज के नाम हस्तांतरित करने की प्रक्रिया पूरी कराई। दो साल पहले फतेहपुर में कार्यशाला का 9 करोड़ रुपये का इस्टीमेट बनाकर परिवहन निगम मुख्यालय लखनऊ भेजा गया। निगम मुख्यालय से यूपी रोडवेज की बोर्ड बैठक में डिपो कार्यशाला प्रस्ताव पारित नहीं किया गया। वर्षों से डिपो कार्यशाला का बजट जारी नहीं हो पाया है।
मंत्री-सांसद तक से की गई बात, नतीजा ढाक के तीन पात
जिले के व्यापारी सांसद-मंत्री और विधायक से कार्यशाला निर्माण के लिए बजट अवमुक्त कराने की मांग कर चुके हैं, लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात ही रहा। मुजफ्फरनगर रोड पर फतेहपुर गांव में कार्यशाला निर्माण के लिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश संयुक्त उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष घनश्याम दास गर्ग व्यापार बंधु की बैठक में बजट अवमुक्त कराने का मुद्दा उठा चुके हैं। इस संबंध में तत्कालीन परिवहन मंत्री स्वतंत्र देव सिंह और मौजूदा परिवहन मंत्री अशोक कटारिया व यूपी रोडवेज के एमडी को कई बार ज्ञापन दे चुके हैं। प्रदेश के गन्ना मंत्री सुरेश राणा, परिवहन मंत्री अशोक कटारिया, विधायक तेजेंद्र निर्वाल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से और कैराना सांसद प्रदीप चौधरी परिवहन मंत्री अशोक कटारिया से मिलकर मांग कर चुके हैं। लेकिन बात आगे नहीं बढ़ी।
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42 साल में भी शामली में रोडवेज की कार्यशाला का निर्माण नहीं हो पाया। वर्ष 1978 में लोनी, वर्ष 1988 में बड़ौत में रोडवेज की कार्यशाला बन गई थी। लेकिन शामली के लोगों के लिए यह अभी सपना ही है। 28 सितंबर 2011 को जिला बनने के बाद बस अड्डे को अनुबंधित बसों का डिपो घोषित किया गया। वर्ष 2015 में फतेहपुर में 9 बीघा भूमि शामली डिपो की कार्यशाला के लिए भूमि आरक्षित की गई। शासन ने शामली डिपो की कार्यशाला के लिए 47 लाख रुपये अवमुक्त किए। वर्ष 2018 में तत्कालीन डीएम इंद्र विक्रम सिंह ने कार्यशाला के लिए भूमि रोडवेज के नाम हस्तांतरित करने की प्रक्रिया पूरी कराई। दो साल पहले फतेहपुर में कार्यशाला का 9 करोड़ रुपये का इस्टीमेट बनाकर परिवहन निगम मुख्यालय लखनऊ भेजा गया। निगम मुख्यालय से यूपी रोडवेज की बोर्ड बैठक में डिपो कार्यशाला प्रस्ताव पारित नहीं किया गया। वर्षों से डिपो कार्यशाला का बजट जारी नहीं हो पाया है।
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मंत्री-सांसद तक से की गई बात, नतीजा ढाक के तीन पात
जिले के व्यापारी सांसद-मंत्री और विधायक से कार्यशाला निर्माण के लिए बजट अवमुक्त कराने की मांग कर चुके हैं, लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात ही रहा। मुजफ्फरनगर रोड पर फतेहपुर गांव में कार्यशाला निर्माण के लिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश संयुक्त उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष घनश्याम दास गर्ग व्यापार बंधु की बैठक में बजट अवमुक्त कराने का मुद्दा उठा चुके हैं। इस संबंध में तत्कालीन परिवहन मंत्री स्वतंत्र देव सिंह और मौजूदा परिवहन मंत्री अशोक कटारिया व यूपी रोडवेज के एमडी को कई बार ज्ञापन दे चुके हैं। प्रदेश के गन्ना मंत्री सुरेश राणा, परिवहन मंत्री अशोक कटारिया, विधायक तेजेंद्र निर्वाल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से और कैराना सांसद प्रदीप चौधरी परिवहन मंत्री अशोक कटारिया से मिलकर मांग कर चुके हैं। लेकिन बात आगे नहीं बढ़ी।
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