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...भाइयों से जंग हो तो हार जाना चाहिए
शामली/ ब्यूरो/ अमर उजाला
Updated Mon, 09 Nov 2015 01:23 AM IST
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झिंझाना। कस्बा झिंझाना में हजरत इमाम महमूद नसीरुदीन सब्जवारी की दरगाह पर चल रहे उर्स के पांचवें दिन आल इंडिया मुशायरा मुनकीद हुआ। मुशायरे का आगाज मुख्य अतिथि डाक्टर एआर खान और थाना प्रभारी आरएन सिंह यादव ने संयुक्त रूप से शमा रोशन करके किया।
शनिवार रात मुशायरे का आगाज वाहिद अंसारी मालेगांव ने नात-ए-पाक से कुछ इस तरह किया।-वो अपने लिए बाबे करम खोल रहा है, जो सल्ले अला-सल्ले अला बोल रहा है। नवाजिश खान ने अपने दिल के हालात बयां करते हुए कहा-'मुझको आंधी से ना तूफां से डर लगता है, एक कमजर्फ के अहसान से डर लगता है। ये तेरी जुल्फ ये रुखसार ये आंखें तेरी हैं, मुझको बस मौत के रुखसार से डर लगता है।
मुशायरे को मुकाम की ओर ले जाते हुए कासिफ रजा सहारनपुरी ने श्रोताओं को गुदगुदाया-'एक मुद्दत भी मेरे वास्ते पल हो जाती, मेरी मुश्किल भी तेरे दीदार से हल हो जाती। वर्तमान हालात पर अपने खयालों का इजहार करते हुए अंसार सिद्दीकी कैरानवी ने कहा 'मुस्लिम, सिख, ईसाई ना हिंदू तलाश कर, किस-किस जगह है प्यार की खुशबू तलाश कर।
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दिल्ली से आई शायरा अना देहली ने अपनी गजल के जरिये युवाओं की खूब दाद बटोरी। 'चांद से पूछो या पूछो मेरे दिल से, तन्हा रात कैसे बिताई जाती है। कागज की एक नाव बहाकर दरिया में, तूफानों से शर्त लगाई जाती है।
हास्य शायर जहाज देवबंदी ने कुछ यूं बयां किया। 'जैसे मटर पनीर, कचौरी के सामने, छोरे के होश उड़ जाते हैं छोरी के सामने। नजमा की मां को देखकर ये अहसास हुआ, कट्टे की क्या बिसात बोरी के सामने।
कानपुर से आई शायरा- शबीना अदीब ने अपना हाले दिल कुछ यूं कहा- 'आइये हमारी गली में कभी इस जमीं को धड़कना सिखा देंगे हम। चांद तारे नहीं फूल खुशबू नहीं, आपकी राह में ये दिल बिछा देंगे हम। जोहर कानपुरी ने अवाम को नसीहत देते हुए कहा- जीतने का ये हुनर आजमाना चाहिये, भाइयों से जंग हो तो हार जाना चाहिए। प्यार जितना बांटिएगा प्यार बढ़ता जाएगा, ये खजाना दोनों हाथों से लुटाना चाहिए।
मुशायरे की सदारत नगर पंचायत अध्यक्ष हाजी सरफराज खान और निजामत मुईन शादाब ने की। मुशायरे के कनवीनर हाजी अमजद अल्वी शहजादा दरगाह पीर जी बाबर सफदर अल्वी ने सभी अतिथियों का शुक्रिया अदा किया। इस अवसर पर धनंजय कौशिक, विनोद आलम व्यापार मंडल अध्यक्ष, फरत अल्वी, मो. आलम, संगीतकार उस्ताद अनवर अली, अली वाहिद, सिकंदर हयात गड़बड़ आदि रहे।
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शनिवार रात मुशायरे का आगाज वाहिद अंसारी मालेगांव ने नात-ए-पाक से कुछ इस तरह किया।-वो अपने लिए बाबे करम खोल रहा है, जो सल्ले अला-सल्ले अला बोल रहा है। नवाजिश खान ने अपने दिल के हालात बयां करते हुए कहा-'मुझको आंधी से ना तूफां से डर लगता है, एक कमजर्फ के अहसान से डर लगता है। ये तेरी जुल्फ ये रुखसार ये आंखें तेरी हैं, मुझको बस मौत के रुखसार से डर लगता है।
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मुशायरे को मुकाम की ओर ले जाते हुए कासिफ रजा सहारनपुरी ने श्रोताओं को गुदगुदाया-'एक मुद्दत भी मेरे वास्ते पल हो जाती, मेरी मुश्किल भी तेरे दीदार से हल हो जाती। वर्तमान हालात पर अपने खयालों का इजहार करते हुए अंसार सिद्दीकी कैरानवी ने कहा 'मुस्लिम, सिख, ईसाई ना हिंदू तलाश कर, किस-किस जगह है प्यार की खुशबू तलाश कर।
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दिल्ली से आई शायरा अना देहली ने अपनी गजल के जरिये युवाओं की खूब दाद बटोरी। 'चांद से पूछो या पूछो मेरे दिल से, तन्हा रात कैसे बिताई जाती है। कागज की एक नाव बहाकर दरिया में, तूफानों से शर्त लगाई जाती है।
हास्य शायर जहाज देवबंदी ने कुछ यूं बयां किया। 'जैसे मटर पनीर, कचौरी के सामने, छोरे के होश उड़ जाते हैं छोरी के सामने। नजमा की मां को देखकर ये अहसास हुआ, कट्टे की क्या बिसात बोरी के सामने।
कानपुर से आई शायरा- शबीना अदीब ने अपना हाले दिल कुछ यूं कहा- 'आइये हमारी गली में कभी इस जमीं को धड़कना सिखा देंगे हम। चांद तारे नहीं फूल खुशबू नहीं, आपकी राह में ये दिल बिछा देंगे हम। जोहर कानपुरी ने अवाम को नसीहत देते हुए कहा- जीतने का ये हुनर आजमाना चाहिये, भाइयों से जंग हो तो हार जाना चाहिए। प्यार जितना बांटिएगा प्यार बढ़ता जाएगा, ये खजाना दोनों हाथों से लुटाना चाहिए।
मुशायरे की सदारत नगर पंचायत अध्यक्ष हाजी सरफराज खान और निजामत मुईन शादाब ने की। मुशायरे के कनवीनर हाजी अमजद अल्वी शहजादा दरगाह पीर जी बाबर सफदर अल्वी ने सभी अतिथियों का शुक्रिया अदा किया। इस अवसर पर धनंजय कौशिक, विनोद आलम व्यापार मंडल अध्यक्ष, फरत अल्वी, मो. आलम, संगीतकार उस्ताद अनवर अली, अली वाहिद, सिकंदर हयात गड़बड़ आदि रहे।