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भर गईं गलियां, छोटा पड़ गया श्मशान घाट
Sat, 16 Feb 2019 11:22 PM IST
NAVEEN GUPTA
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Published by: NAVEEN GUPTA
Updated Sat, 16 Feb 2019 11:22 PM IST
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- फोटो : amarujala
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बनत कस्बे में शहीद प्रदीप की शवयात्रा में दो किमी लंबा सैलाब उमड़ा। चारों तरफ तिरंगे लहरा रहे थे। कस्बे की गलियों में पाकिस्तान मुर्दाबाद, शहादत का बदला लो ,बदला लो के नारे गूंज रहे थे। घर की छतों से महिलाएं और बच्चे पुष्प वर्षा कर रहे थे। सबकी जुबां पर एक ही बात थी पाकिस्तान को सबक सिखाओ।
श्रद्धांजलि सभा के बाद करीब नौ बजे शहीद प्रदीप की अंतिम यात्रा शुरू हुई तो हजारों की भीड़ से कस्बे की गलियां भर गई। शव के पीछे दो किमी लंबी लाइन थी। शव के साथ डीएम और एसपी चल रहे थे। सीआरपीएफ और आरएएफ आदि कई कंपनियों के कमांडेंट और सलामी गारद भी साथ थी। कस्बे के अलावा आसपास के कई गांवों से सर्वसमाज के लोग पहुंचे। व्यापारी, उद्यमी, मजदूर, किसान सब इसमें शामिल थे। हर किसी में शहीद के अर्थी को कंधा देने की होड़ मची थी। मकान की छतों से महिलाएं और बच्चे पुष्पवर्षा कर श्रद्धांजलि दे रहे थे। गांव की गलियों में पाकिस्तान मुर्दाबाद और शहीदों की शहादत का बदला लो के नारे गूंज रहे थे। गलियों से होते हुए शवयात्रा खेतों के बीच से गुजरे रास्तों से होती हुई शमशान घाट पहुंची।
छोटा पड़ गया शमशान घाट
काफी बड़ी जगह में बना श्मशान घाट भी हजारों के सैलाब के आगे छोटा पड़ गया। लोग उसकी दीवारों पर चढ़ गए. लेकिन इसके बाद भी हजारों लोग बाहर खेतों में रह गए। सैकड़ों युवक तो पेड़ों पर ही चढ़ गए। पुलिस प्रशासन के लोग भी लोगों को सचेत करते रहे।
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मंत्री और अफसरों ने दिया कंधा
अंतिम यात्रा में मंत्री और अफसरों ने भी शहीद प्रदीप को कंधा दिया। केंद्रीय मंत्री सतपाल सिंह, प्रदेश के गन्ना राज्यमंत्री सुरेश राणा के अलावा डीएम अखिलेश, एसपी अजय कुमार के अलावा सीआरपीएफ ,आरपीएफ आदि कई बटालियनों के कमांडेंट और अन्य अधिकारियों ने भी प्रदीप के शव को कंधा दिया।
मुस्लिम बोले पाकिस्तान को सबक सिखा दो
शामली। शहीद प्रदीप की अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग भी शामिल हुए। सलमान ,हाशिम और अफजल आदि ने बताया कि प्रदीप अपने कस्बे का बेटा था। वो काफी मिलनसार मृदुभाषी था। यही वजह था कि मुस्लिम भी बड़ी संख्या में इसमें शामिल हुए। अकरम ने कहा कि पाकिस्तान से बदला लेने का वक्त आ गया है। उसने देश में आतंकवाद फैला रखा है। अफजल का कहना था कि इस तरह के हमले कायर करते हैं। आतंकियों को उन्हीं की भाषा में सबक सिखाना होगा तभी ये सब रुकेगा।
यकीन नहीं हो रहा प्रदीप चला गया
शामली। प्रदीप की अंतिम यात्रा में शामिल उसके दोस्त अमित ने बताया कि अमित उसका सहपाठी रहा है। बेहद मिलनसार था। पिछले दिनों अपने भाई की शादी में प्रदीप कस्बे में आया था। आठ फरवरी को वो शामली में मिला। उसके साथ उसका छोटा बेटा भी था। बेटे से उसने मेरा परिचय कराया। बताया कि ये उनके सहपाठी हैं। बेटा भी बहुत खुश हुआ। शुक्रवार की रात को जब प्रदीप की शाहदत की खबर आई तो उसे यकीन ही नहीं हुआ था। अब उसकी याद आती है तो आंखे भर आती हैं।
स्कूलों में छुट्टी, बाजार बंद
शामली। शहीद प्रदीप की अंतिम यात्रा के चलते गांव के निजी स्कूलों में अवकाश कर दिया गया था। कस्बे की दुकानें भी पूरी तरह बंद रही। हर कोई शहीद के परिजनों को सांत्वना देने पहुंच रहा था।
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श्रद्धांजलि सभा के बाद करीब नौ बजे शहीद प्रदीप की अंतिम यात्रा शुरू हुई तो हजारों की भीड़ से कस्बे की गलियां भर गई। शव के पीछे दो किमी लंबी लाइन थी। शव के साथ डीएम और एसपी चल रहे थे। सीआरपीएफ और आरएएफ आदि कई कंपनियों के कमांडेंट और सलामी गारद भी साथ थी। कस्बे के अलावा आसपास के कई गांवों से सर्वसमाज के लोग पहुंचे। व्यापारी, उद्यमी, मजदूर, किसान सब इसमें शामिल थे। हर किसी में शहीद के अर्थी को कंधा देने की होड़ मची थी। मकान की छतों से महिलाएं और बच्चे पुष्पवर्षा कर श्रद्धांजलि दे रहे थे। गांव की गलियों में पाकिस्तान मुर्दाबाद और शहीदों की शहादत का बदला लो के नारे गूंज रहे थे। गलियों से होते हुए शवयात्रा खेतों के बीच से गुजरे रास्तों से होती हुई शमशान घाट पहुंची।
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छोटा पड़ गया शमशान घाट
काफी बड़ी जगह में बना श्मशान घाट भी हजारों के सैलाब के आगे छोटा पड़ गया। लोग उसकी दीवारों पर चढ़ गए. लेकिन इसके बाद भी हजारों लोग बाहर खेतों में रह गए। सैकड़ों युवक तो पेड़ों पर ही चढ़ गए। पुलिस प्रशासन के लोग भी लोगों को सचेत करते रहे।
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मंत्री और अफसरों ने दिया कंधा
अंतिम यात्रा में मंत्री और अफसरों ने भी शहीद प्रदीप को कंधा दिया। केंद्रीय मंत्री सतपाल सिंह, प्रदेश के गन्ना राज्यमंत्री सुरेश राणा के अलावा डीएम अखिलेश, एसपी अजय कुमार के अलावा सीआरपीएफ ,आरपीएफ आदि कई बटालियनों के कमांडेंट और अन्य अधिकारियों ने भी प्रदीप के शव को कंधा दिया।
मुस्लिम बोले पाकिस्तान को सबक सिखा दो
शामली। शहीद प्रदीप की अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग भी शामिल हुए। सलमान ,हाशिम और अफजल आदि ने बताया कि प्रदीप अपने कस्बे का बेटा था। वो काफी मिलनसार मृदुभाषी था। यही वजह था कि मुस्लिम भी बड़ी संख्या में इसमें शामिल हुए। अकरम ने कहा कि पाकिस्तान से बदला लेने का वक्त आ गया है। उसने देश में आतंकवाद फैला रखा है। अफजल का कहना था कि इस तरह के हमले कायर करते हैं। आतंकियों को उन्हीं की भाषा में सबक सिखाना होगा तभी ये सब रुकेगा।
यकीन नहीं हो रहा प्रदीप चला गया
शामली। प्रदीप की अंतिम यात्रा में शामिल उसके दोस्त अमित ने बताया कि अमित उसका सहपाठी रहा है। बेहद मिलनसार था। पिछले दिनों अपने भाई की शादी में प्रदीप कस्बे में आया था। आठ फरवरी को वो शामली में मिला। उसके साथ उसका छोटा बेटा भी था। बेटे से उसने मेरा परिचय कराया। बताया कि ये उनके सहपाठी हैं। बेटा भी बहुत खुश हुआ। शुक्रवार की रात को जब प्रदीप की शाहदत की खबर आई तो उसे यकीन ही नहीं हुआ था। अब उसकी याद आती है तो आंखे भर आती हैं।
स्कूलों में छुट्टी, बाजार बंद
शामली। शहीद प्रदीप की अंतिम यात्रा के चलते गांव के निजी स्कूलों में अवकाश कर दिया गया था। कस्बे की दुकानें भी पूरी तरह बंद रही। हर कोई शहीद के परिजनों को सांत्वना देने पहुंच रहा था।