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बाबा साहेब ने समाज को एकजुटता के सूत्र में बांधा : सिंह

Sun, 18 Feb 2018 11:12 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/ शामली
ब्यूरो, अमर उजाला/ शामली Updated Sun, 18 Feb 2018 11:12 PM IST
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Baba Saheb constituted society in the form of solidarity
शामली के वीवी डिग्री कालेज में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में मंचासीन अतिथिगण। - फोटो : अमर उजाला
शामली में भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद के निर्देश पर शहर के वीवी पीजी कॉलेज में डाक्टर भीमराव अंबेडकर के चिंतन की प्रासंगिकता पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन हुआ। पहले दिन हिसार कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति सहित कई महाविद्यालयों से पहुंचे प्रोफेसरों और राजनीतिक लोगों ने विचार व्यक्त किए।
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शुभारंभ अतिथियों ने मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित करके किया। आयोजक डाक्टर प्रताप कुमार ने संगोष्ठी के विषय वर्ण (जाति) व्यवस्था पर चिंतन, स्वतंत्रता संग्राम में भागीदारी, संविधान रचना में भूमिका, दलितों के उद्धार में किए कार्य, राजनीतिक और आर्थिक चिंतन, दार्शनिक और अर्थशास्त्री के रूप में चिंतन के बारे में बताया। मुख्य अतिथि चौधरी चरण सिंह कृषि विश्वविद्यालय हिसार (हरियाणा) के कुलपति प्रोफेसर डाक्टर केपी सिंह ने कहा कि डाक्टर भीमराव अंबेडकर ने लोकतंत्र की मजबूती के लिए ही प्रत्येक नागरिक को मतदान का अधिकार, महिलाओं की बराबर भागीदारी की परिकल्पना की थी। संविधान की रचना भी उसी मुताबिक हुई और आज वह पूरी तरह प्रासंगिक हैं।
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भाजपा विधायक तेजेंद्र निर्वाल ने कहा कि डाक्टर भीमराव अंबेडकर ऐसे आदर्श हैं, जिनसे प्रेरित होकर हर भारतवासी तरक्की कर सकता है। उन्होंने संदेश दिया कि परिस्थितियों को नहीं, बल्कि संघर्ष को महत्व देना चाहिए। लखनऊ यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर सुधीर पंवार ने बताया कि कोलंबिया यूनिवर्सिटी द्वारा किए गए 300 वर्षों के सर्वे में छह सर्वश्रेष्ठ छात्र चुने गए, जिनमें से डाक्टर भीमराव अंबेडकर का प्रथम स्थान है, यह देश के लिए गौरव की बात है।
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मुख्य वक्ता चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी मेरठ के राजनीतिक विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर संजीव शर्मा ने बताया कि डाक्टर भीमराव अंबेडकर ने शिक्षित बनो, संगठित रहो का नारा दिया। वह संविधान के निर्माता नहीं, बल्कि संरक्षक थे। उन्होंने कहा था कि संविधान कैसा है, यह महत्वपूर्ण नहीं, बल्कि उसका पालन करने वाले कैसे हैं यह महत्वपूर्ण होता है। वर्तमान परिवेश को देखा जाए, तो हालत कितनी खराब हो गई है। राजनीति में ऐसे लोग भी विधानसभा में पहुंच जाते हैं, जिनको जेल में होना चाहिए। व्यवस्थापिका, कार्यपालिका पर प्रश्न उठाने के साथ ही हमें अपनी जिम्मेदारी को लेकर भी सवाल उठाना चाहिए।
संगोष्ठी के द्वितीय सत्र में प्रोफेसर सुधीर शर्मा, डाक्टर जसविंद्र बालियान, डाक्टर प्रतीत कुमार, सह संयोजक डाक्टर मंजू मगन और तृतीय सत्र में डाक्टर प्रमोद कुमारी, डाक्टर जसवीर सिंह, डाक्टर ममता, डाक्टर संगीता सिंघल एवं आयोजन सचिव डाक्टर नीना छोकर ने विचार रखे। चतुर्थ सत्र में डाक्टर जेके सरोहा, डाक्टर हरवीर चौधरी, डाक्टर दुष्यंत चौधरी, डाक्टर राजेश एवं समन्वयक डाक्टर भूपेंद्र कुमार ने विचार रखे। कार्यक्रम में अतिथियों को प्रतीक चिन्ह भेंट किए गए। इस दौरान वीवी पीजी कॉलेज प्रबंध समिति के अध्यक्ष नवनीत जैन, सचिव दीपक जैन, डाक्टर मृदुला जैन, डाक्टर बबली, डाक्टर वंदना, डाक्टर अरविंद कुमार आदि का विशेष सहयोग रहा।
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