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फेल होने पर फूट-फूट कर रोई थी अनुष्का,
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शामली : कैराना में डीके कॉन्वेंट स्कूल की तीसरी मंजिल जहां से छात्रा नीचे कूदी।
- फोटो : SHAMLI
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कैराना (शामली)। फेल होने पर अनुष्का फूट-फूट कर रोई थी। उसके साथ कक्षा में पढ़ने वाली किशोरपुर निवासी छात्रा का नाम भी अनुष्का है। दोनों काफी अच्छी सहेली हैं।
उसने बताया कि शुक्रवार को रिजल्ट घोषित किया गया था। सोशल स्टडीज के पेपर में फेल होने पर अनुष्का काफी रोई थी। उसे साथ पढ़ने वाली छात्राओं ने काफी समझाया था। उसकी मौत की खबर सुनकर अंतिम संस्कार में पहुंचे सहेली के पिता ने यह जानकारी दी। बताया कि अनुष्का के मौत के बाद जब उनकी बेटी किशोरपुर में अपने घर पहुंची तो वह बुरी तरह कांप रही थी। उसने रोते हुए बताया कि उसकी सहेली स्कूल की छत से कूद गई। स्कूल के अन्य बच्चे भी इस घटना के बाद घबरा गए।
छत से कूदने के बाद सिर में लगी गंभीर चोट
कक्षा नौ की छात्रा अनुष्का शर्मा सुबह करीब सवा नौ बजे स्कूल की तीसरी मंजिल से सड़क की ओर कूदी। जिसके बाद छात्रा का सिर सड़क पर जा लगा। बाद में छात्रा के सिर से लगातार खून बहता रहा। इससे पहले करीब 10 मिनट पहले अनुष्का के गायब होने पर स्कूल का स्टाफ अनुष्का की तलाश करता रहा। इस दौरान तीसरी मंजिल पर अंदर से गेट बंद मिलने पर स्टाफ नीचे सड़क पर आ गया तो देखा कि अनुष्का तीसरी मंजिल पर रेलिंग के पिलर पर बैठी है। स्कूल प्रबंधक संजीव गोयल ने अनुष्का को वापस जाने को कहा तो अनुष्का सड़क की ओर गिर गई। स्टाफ ने अनुष्का को गिरते समय हाथों से पकड़ने का प्रयास किया, लेकिन सफल नहीं हो सके। अनुष्का का सिर सड़क से टकरा गया।
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हमारी बेटी समझदार थी, नहीं कर सकती आत्महत्या
स्कूल की तीसरी मंजिल से कूदकर आत्महत्या करने वाली मृतक छात्रा अनुष्का शर्मा अपने पिता की इकलौती बेटी थी। बताया गया कि मृतका का एक छोटा भाई आर्यन हैं। भाई आर्यन व माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। परिजन बार-बार रोते हुए यही कह रहे थे कि हमारी बेटी समझदार थी, वह ऐसा कदम नहीं उठा सकती।
फेल होने का डर और अधिक नंबर का दबाव देता है तनाव: डॉ. विनीत
शामली। परीक्षा दे रहे छात्रों में सबसे अधिक तनाव अभिभावकों के कारण बढ़ता है। अभिभावकों का बच्चों के ऊपर से जरूरत से ज्यादा दबाव और बच्चों से अपेक्षाएं ही बच्चों में तनाव का सबसे बड़ा कारण है। खासतौर से पढ़े-लिखे एवं संभ्रांत परिवार में बच्चों के ऊपर दबाव अधिक होता है। यह कहना है एमएम इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य और समाजशास्त्री डॉ. विनीत चौहान का। उन्होंने बताया कि 15 से लेकर 29 वर्ष तक युवाओं में आत्महत्या का मामले सबसे अधिक होते हैं। क्योंकि इस उम्र में सबसे अधिक तनाव होता है और वह झेल नहीं पाते हैं। समाज में पिछड़ जाने का तनाव, अव्वल आने का तनाव, नौकरी का तनाव सहित अन्य कई कारण हैं जिसकी वजह से वह डर कर बाद में आत्महत्या का रास्ता चुनते हैं। यदि अभिभावक दबाव न बनाएं तो हो सकता है किशोर बेहतर प्रदर्शन करें।
परीक्षा से बिल्कुल न घबराएं: डॉ. सफल
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. सफल कुमार का कहना कि परीक्षा के समय बच्चे आमतौर पर तनाव में आ जाते हैं। बच्चों पर दबाव डालकर उन्हें जबरदस्ती पढ़ने तो बैठाया जा सकता है, लेकिन कई बार यह इसका बुरा असर पड़ता है। बच्चे गलत निर्णय ले लते हैं। बच्चों को प्यार से समझाएं।
परीक्षा के तनाव से बचने के उपाय
- अभिभावक बच्चों पर दबाव न बनाएं, उनसे मित्रता वाला व्यवहार रखें।
- जितना आसानी से समझ में आए और याद हो उतना ही याद करें , सिलेबस पूरा करने के चक्कर में न रहें।
- परीक्षा के प्रश्नपत्र देखकर घबराएं नहीं, जिस सवाल के जवाब अच्छे से आते हों पहले उसको लिखें।
- परीक्षा के दौरान भी पूरी नींद लें, खाने-पीने पर भी ध्यान रखें।
- पढ़ाई के बीच-बीच में ब्रेक लें।
- अभिभावक बच्चों के सामने डर जाहिर न करें बल्कि उनको हिम्मत दें।
- घरेलू परीक्षा के रिजल्ट याद कर घबराएं नहीं, उस वक्त अक्सर कम मार्क्स दिए जाते हैं।
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उसने बताया कि शुक्रवार को रिजल्ट घोषित किया गया था। सोशल स्टडीज के पेपर में फेल होने पर अनुष्का काफी रोई थी। उसे साथ पढ़ने वाली छात्राओं ने काफी समझाया था। उसकी मौत की खबर सुनकर अंतिम संस्कार में पहुंचे सहेली के पिता ने यह जानकारी दी। बताया कि अनुष्का के मौत के बाद जब उनकी बेटी किशोरपुर में अपने घर पहुंची तो वह बुरी तरह कांप रही थी। उसने रोते हुए बताया कि उसकी सहेली स्कूल की छत से कूद गई। स्कूल के अन्य बच्चे भी इस घटना के बाद घबरा गए।
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छत से कूदने के बाद सिर में लगी गंभीर चोट
कक्षा नौ की छात्रा अनुष्का शर्मा सुबह करीब सवा नौ बजे स्कूल की तीसरी मंजिल से सड़क की ओर कूदी। जिसके बाद छात्रा का सिर सड़क पर जा लगा। बाद में छात्रा के सिर से लगातार खून बहता रहा। इससे पहले करीब 10 मिनट पहले अनुष्का के गायब होने पर स्कूल का स्टाफ अनुष्का की तलाश करता रहा। इस दौरान तीसरी मंजिल पर अंदर से गेट बंद मिलने पर स्टाफ नीचे सड़क पर आ गया तो देखा कि अनुष्का तीसरी मंजिल पर रेलिंग के पिलर पर बैठी है। स्कूल प्रबंधक संजीव गोयल ने अनुष्का को वापस जाने को कहा तो अनुष्का सड़क की ओर गिर गई। स्टाफ ने अनुष्का को गिरते समय हाथों से पकड़ने का प्रयास किया, लेकिन सफल नहीं हो सके। अनुष्का का सिर सड़क से टकरा गया।
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हमारी बेटी समझदार थी, नहीं कर सकती आत्महत्या
स्कूल की तीसरी मंजिल से कूदकर आत्महत्या करने वाली मृतक छात्रा अनुष्का शर्मा अपने पिता की इकलौती बेटी थी। बताया गया कि मृतका का एक छोटा भाई आर्यन हैं। भाई आर्यन व माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। परिजन बार-बार रोते हुए यही कह रहे थे कि हमारी बेटी समझदार थी, वह ऐसा कदम नहीं उठा सकती।
फेल होने का डर और अधिक नंबर का दबाव देता है तनाव: डॉ. विनीत
शामली। परीक्षा दे रहे छात्रों में सबसे अधिक तनाव अभिभावकों के कारण बढ़ता है। अभिभावकों का बच्चों के ऊपर से जरूरत से ज्यादा दबाव और बच्चों से अपेक्षाएं ही बच्चों में तनाव का सबसे बड़ा कारण है। खासतौर से पढ़े-लिखे एवं संभ्रांत परिवार में बच्चों के ऊपर दबाव अधिक होता है। यह कहना है एमएम इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य और समाजशास्त्री डॉ. विनीत चौहान का। उन्होंने बताया कि 15 से लेकर 29 वर्ष तक युवाओं में आत्महत्या का मामले सबसे अधिक होते हैं। क्योंकि इस उम्र में सबसे अधिक तनाव होता है और वह झेल नहीं पाते हैं। समाज में पिछड़ जाने का तनाव, अव्वल आने का तनाव, नौकरी का तनाव सहित अन्य कई कारण हैं जिसकी वजह से वह डर कर बाद में आत्महत्या का रास्ता चुनते हैं। यदि अभिभावक दबाव न बनाएं तो हो सकता है किशोर बेहतर प्रदर्शन करें।
परीक्षा से बिल्कुल न घबराएं: डॉ. सफल
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. सफल कुमार का कहना कि परीक्षा के समय बच्चे आमतौर पर तनाव में आ जाते हैं। बच्चों पर दबाव डालकर उन्हें जबरदस्ती पढ़ने तो बैठाया जा सकता है, लेकिन कई बार यह इसका बुरा असर पड़ता है। बच्चे गलत निर्णय ले लते हैं। बच्चों को प्यार से समझाएं।
परीक्षा के तनाव से बचने के उपाय
- अभिभावक बच्चों पर दबाव न बनाएं, उनसे मित्रता वाला व्यवहार रखें।
- जितना आसानी से समझ में आए और याद हो उतना ही याद करें , सिलेबस पूरा करने के चक्कर में न रहें।
- परीक्षा के प्रश्नपत्र देखकर घबराएं नहीं, जिस सवाल के जवाब अच्छे से आते हों पहले उसको लिखें।
- परीक्षा के दौरान भी पूरी नींद लें, खाने-पीने पर भी ध्यान रखें।
- पढ़ाई के बीच-बीच में ब्रेक लें।
- अभिभावक बच्चों के सामने डर जाहिर न करें बल्कि उनको हिम्मत दें।
- घरेलू परीक्षा के रिजल्ट याद कर घबराएं नहीं, उस वक्त अक्सर कम मार्क्स दिए जाते हैं।

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