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खेल-खेल में बच्चों को पढ़ाएंगी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता
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शामली। स्कूली शिक्षा से पहले नौनिहालों को आंगनबाड़ी केंद्रों पर ही शिक्षण के लिए तैयार किया जाएगा। इन केंद्रों पर बच्चों को प्री-प्राइमरी शिक्षा देने के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसमें 834 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का पहले चरण का प्रशिक्षण पूरा हो चुका है।
आंगनबाड़ी केंद्रों को प्री-प्राइमरी स्कूल की तर्ज पर विकसित किया जाना है। नई शिक्षा नीति के तहत यह बदलाव किया जा रहा है। इसके तहत प्रदेश ही हाईस्कूल पास आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्री-प्राइमरी शिक्षण का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जिले के 985 आंगनबाड़ी केंद्रों को 2021 से प्री स्कूल शिक्षा के रूप में संचालित करने का निर्णय लिया है।
इसमें जनपद की 10वीं पास आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्री-प्राइमरी स्कूल में पढ़ाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ब्लॉक स्तर पर हुए प्रशिक्षण में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को टीएलएम, खेल-खेल में शिक्षा, बाल मनोविज्ञान की जानकारी दी गई। बच्चों के व्यवहार की समझ, कहानी एवं कविताओं के माध्यम से शिक्षा देने के बारे में बताया गया।
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इन्होंने कहा...
बच्चे प्राइमरी स्कूल में आने से पहले आंगनबाड़ी केंद्र पर जाता है। यहां पर उसे प्री-प्राइमरी की शिक्षा दी जानी है, ताकि जब वह स्कूल में पहुंचे तो वह पहले से काफी कुछ सीख चुका हो। इसमें बच्चों को अक्षर ज्ञान, वस्तुओं की पहचान आदि सिखाया जाएगा। - गीता वर्मा, बीएसए।
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आंगनबाड़ी केंद्रों पर जो योजनाएं संचालित हैं वे तो चलती ही रहेंगी। अब उन्हें प्री-प्राइमरी के तौर पर विकसित किया जाना है। इसके लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। - संतोष श्रीवास्तव, डीपीओ।
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आंगनबाड़ी केंद्रों को प्री-प्राइमरी स्कूल की तर्ज पर विकसित किया जाना है। नई शिक्षा नीति के तहत यह बदलाव किया जा रहा है। इसके तहत प्रदेश ही हाईस्कूल पास आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्री-प्राइमरी शिक्षण का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जिले के 985 आंगनबाड़ी केंद्रों को 2021 से प्री स्कूल शिक्षा के रूप में संचालित करने का निर्णय लिया है।
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इसमें जनपद की 10वीं पास आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्री-प्राइमरी स्कूल में पढ़ाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ब्लॉक स्तर पर हुए प्रशिक्षण में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को टीएलएम, खेल-खेल में शिक्षा, बाल मनोविज्ञान की जानकारी दी गई। बच्चों के व्यवहार की समझ, कहानी एवं कविताओं के माध्यम से शिक्षा देने के बारे में बताया गया।
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इन्होंने कहा...
बच्चे प्राइमरी स्कूल में आने से पहले आंगनबाड़ी केंद्र पर जाता है। यहां पर उसे प्री-प्राइमरी की शिक्षा दी जानी है, ताकि जब वह स्कूल में पहुंचे तो वह पहले से काफी कुछ सीख चुका हो। इसमें बच्चों को अक्षर ज्ञान, वस्तुओं की पहचान आदि सिखाया जाएगा। - गीता वर्मा, बीएसए।
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आंगनबाड़ी केंद्रों पर जो योजनाएं संचालित हैं वे तो चलती ही रहेंगी। अब उन्हें प्री-प्राइमरी के तौर पर विकसित किया जाना है। इसके लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। - संतोष श्रीवास्तव, डीपीओ।