{"_id":"5d4089ec8ebc3e6cc05052b1","slug":"all-the-four-accused-lives-in-silent-zone-shamli-news-mrt4358681116","type":"story","status":"publish","title_hn":"कस्बे के सुनसान इलाके में रहते थे चारों आरोपी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कस्बे के सुनसान इलाके में रहते थे चारों आरोपी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जलालाबाद/थानाभवन (शामली)। म्यांमार से आकर कस्बे में एक मदरसे में पढ़ाने वाले अब्दुल मजीद और पकड़े गए तीन छात्र कस्बे की आबादी से दूर एक कॉलोनी के लगभग सुनसान से इलाके में रहते थे।
दरअसल, जलालाबाद के दिल्ली-सहारनपुर हाईवे पर कुछ साल पूर्व ही खुशनुमा के नाम से एक कॉलोनी बनाई गई हैं। हालांकि, इस कॉलोनी के अधिकांश हिस्से पर प्लाट काटे जा चुके हैं। मगर निर्माण के नाम पर तीन-चार मकान कॉलोनी के हाईवे के समीप बनाए गए हैं, जबकि तीन चार मकान कॉलोनी के आखिर में तालाब के किनारे बने हैं। पीछे वाले मकानों का कस्बे की आबादी से कोई संबंध नहीं था। अभी कॉलोनी में कुछ ही मकान बने हैं तो पीछे का हिस्सा लगभग सुनसान पड़ा है। इस जगह पर मकान खरीदकर ये चारों आरोपी रहते थे। पुलिस के अनुसार अमूमन आबादी के बीच में अवैध तरीके से रहने वाले लोगों की हकीकत का शीघ्र पता चल जाता है। इसलिए ही इन्होंने रहने के लिए एक ऐसी जगह की तलाश की, जहां आबादी से उनका कोई मतलब न हो।
विज्ञापन
दरअसल, जलालाबाद के दिल्ली-सहारनपुर हाईवे पर कुछ साल पूर्व ही खुशनुमा के नाम से एक कॉलोनी बनाई गई हैं। हालांकि, इस कॉलोनी के अधिकांश हिस्से पर प्लाट काटे जा चुके हैं। मगर निर्माण के नाम पर तीन-चार मकान कॉलोनी के हाईवे के समीप बनाए गए हैं, जबकि तीन चार मकान कॉलोनी के आखिर में तालाब के किनारे बने हैं। पीछे वाले मकानों का कस्बे की आबादी से कोई संबंध नहीं था। अभी कॉलोनी में कुछ ही मकान बने हैं तो पीछे का हिस्सा लगभग सुनसान पड़ा है। इस जगह पर मकान खरीदकर ये चारों आरोपी रहते थे। पुलिस के अनुसार अमूमन आबादी के बीच में अवैध तरीके से रहने वाले लोगों की हकीकत का शीघ्र पता चल जाता है। इसलिए ही इन्होंने रहने के लिए एक ऐसी जगह की तलाश की, जहां आबादी से उनका कोई मतलब न हो।
विज्ञापन