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Shamli News: एनडीए और इंडिया के बीच बसपा पर रहेगी सबकी नजर

Mon, 24 Jul 2023 12:19 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 24 Jul 2023 12:19 AM IST
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All eyes will be on BSP between NDA and India
लोकसभा चुनाव 2024 :
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- कैराना सीट पर पिछले चुनाव में गठबंधन को मिली थी शिकस्त
- इस बार बसपा के गठबंधन में न होने से भाजपा और गठबंधन दोनों लगा रहे अपने अपने गणित
इंद्रपाल सिंह पांचाल
शामली। लोकसभा चुनाव 2024 के मद्देनजर बसपा सुप्रीमो मायावती के अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा के बाद इंडिया और एनडीए के मजबूत चेहरों से भविष्य तय होगा। पश्चिमी क्षेत्र में मुद्दे कम जाति और धर्म ज्यादा प्रभावी रहते हैं। ऐसे में कैराना सीट पर प्रत्याशी के चेहरे ही भविष्य की राह तय करेंगे।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में भाजपा, सपा, बसपा और रालोद वर्तमान में प्रमुख पार्टी हैं। हालांकि कभी कांग्रेस की तूती भी यहां बोलती थी, लेकिन 2014 के बाद से कांग्रेस धीरे-धीरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लगभग सिमट चुकी है। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में सपा, बसपा और रालोद ने मिलकर चुनाव लड़ा था। यहां पर भाजपा ने गुर्जर बिरादरी से प्रदीप चौधरी, गठबंधन की तरफ से सपा ने मुस्लिम कार्ड खेलते हुए पूर्व सांसद तब्बसुम हसन और कांग्रेस ने जाट बिरादरी से पूर्व सांसद हरेंद्र सिंह मलिक को चुनाव मैदान में उतारा था।
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गठबंधन के समीकरण यहां बहुत ही मजबूत नजर आ रहे थे। क्योंकि रालोद के जाट वोट बैंक के साथ ही बसपा दलित वोट बैंक और मुस्लिम प्रत्याशी होने के कारण मुस्लिमों की वोट के साथ गठबंधन मजबूत नजर आ रहा था। वहीं कांग्रेस से जाट प्रत्याशी मैदान में आने से गठबंधन को उम्मीद थी कि इससे भाजपा ही कमजोर होगी। लेकिन परिणाम इसके उलट आए। भाजपा के प्रदीप चौधरी सांसद निर्वाचित हुए। वर्ष 2014 में भी यहां से भाजपा के बाबू हुकुम सिंह सांसद निर्वाचित हुए थे।
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इस बार फिर से गठबंधन भाजपा को चुनौती देने की तैयारी कर रहा है। लेकिन इस बार बसपा उनके साथ नहीं है। ऐसे में भाजपा खेमा उत्साहित है, लेकिन वह गठबंधन से सीट किस पार्टी की झोली में जाएगी और प्रत्याशी कौन होगा, इसके साथ ही बसपा पर भी नजर लगाए हुए है। क्योंकि बसपा का प्रत्याशी यहां दोनों विपक्षी खेमों के लिए ही सबसे अहम होगा। जो किसी का भी गणित बिगाड़ या बना सकता है। हालांकि गठबंधन के नेता आजाद समाज पार्टी के साथ होने से दलित वोट बैंक को लेकर दावा कर रहे हैं। लेकिन राजनीति पंडितों का कहना है कि आजाद समाज पार्टी का अभी इस क्षेत्र में उतना असर नहीं है, जितना बसपा अध्यक्ष मायावती का है। संवाद
क्या कहते हैं नेता...............
विधान सभा चुनाव की तरह गठबंधन मजबूत
रालोद के जिलाध्यक्ष वाजिद अली बताते हैं कि रालोद का जाट, सपा का मुस्लिम, आजाद समाजवादी पार्टी का दलित- जाट समीकरण भाजपा को वर्ष 2022 में भारी पड़ा था। यदि यही समीकरण बना रहा तो आगामी लोकसभा चुनाव 2024 में भाजपा को परेशानी में डाल सकता है।



संयुक्त गठबंधन की ताकत के सामने बसपा हुई कमजोर



सपा के वरिष्ठ नेता और कैराना लोकसभा चुनाव के सह प्रभारी सुधीर पंवार का कहना कि बसपा के अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा से जनता को विश्वास हो गया है कि वो भाजपा की बी टीम है। विधानसभा 2022 तथा निकाय चुनाव 2023 से स्पष्ट हो गया है कि शामली जिले में बसपा का जनाधार काफी सिकुड़ गया है। सपा, रालोद एवं आसपा के गठबंधन के बाद शामली जिले में बसपा की चुनावी संभावनाएं भी लगभग समाप्त हो गई हैं।






गठबंधन में टिकट बंटवारा का भाजपा को मिलेगा लाभ

भाजपा जिलाध्यक्ष सतेंद्र तोमर का कहना है कि वर्ष 2019 में विपक्ष ने बसपा को साथ लेकर भाजपा के खिलाफ लोकसभा चुना लड़ा था, परिणाम सबके सामने है। अब बसपा अलग है। विपक्ष अपना जनाधार खो चुका है। गठबंधन में टिकट बंटवारे को लेकर विरोध होगा, जिसका लाभ भाजपा को मिलेगा। भाजपा अपने मजबूत वोट बैंक के आधार पर 2014, और 2019 के लोकसभा चुनाव जीत चुकी है।

सर्वसमाज की वोट बसपा की जीत का आधार
बसपा जिलाध्यक्ष देवीदास जयंत का कहना है कि दलित, मुस्लिम और अन्य सर्वसमाज की जाति बसपा से जुड़ी हुई है। लोकसभा चुनाव में यही जीत का आधार है।
कैराना लोकसभा से पिछले तीन चुनावों के निर्वाचित सांसद

2009 बसपा तब्बसुम हसन
2014 भाजपा हुकुम सिंह
2019 भाजपा प्रदीप चौधरी
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