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Shamli News: किराना घराने के बाद अब रज्मी की विरासत पर संकट
Wed, 30 Sep 2026 12:55 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Wed, 30 Sep 2026 12:55 AM IST
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शामली समाचार-नई दिल्ली में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात करते मशहूर शायर मुजफ्फर रज
शामली। “परिंदे भी नहीं रहते पराये आशियानों में, हमने उम्र गुजार दी किराये के मकानों में...” यह शेर कैराना के मशहूर शायर मुजफ्फर इस्लाम रज्मी के परिवार की ही कहानी बन गया है। जिस शायर के अल्फाज लम्हों ने ख़ता की थी, सदियों ने सज़ा पाई, संसद तक गूंजे, उनके परिवार पर अब उसी कैराना में बेघर होने की नौबत है। जर्जर किराये का मकान खाली कराने की कार्रवाई के बीच सवाल है—क्या किराना घराने की तरह कैराना रज्मी की अदबी विरासत भी खो देगा।
कैराना की तंग गलियों से देश-विदेश के मुशायरों तक पहचान बनाने वाले मशहूर शायर मुजफ्फर इस्लाम रज्मी का परिवार बेबसी और मायूसी में जीवन काट रहा है। नगर पालिका के किराये के जिस मकान में रज्मी ने जिंदगी गुजारी, उनके इंतकाल के बाद भी परिवार वहीं रह रहा है। मकान खाली कराने को लेकर परिवार एक मुकदमा हार चुका है, जबकि दूसरा मामला एसडीएम कोर्ट में चल रहा है। रज्मी के बेटे जावेद इकबाल कहते हैं कि नगर पालिका की ओर से मकान खाली कराने के कई नोटिस मिल चुके हैं। पीएम से लेकर स्थानीय प्रशासन तक गुहार लगाई गई, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। यदि यह मकान छूटा तो वह परिवार के साथ कैराना छोड़ दूंगा।
जावेद कहते हैं कि इस घर से उनके पिता की यादें जुड़ी हैं। कभी इसी घर में मुशायरे की महफिल सजती थी, बड़े बड़े शायर इसमें शरीक होते थे। इसी घर में हमारा बचपन बीता, इस घर की हालत काफी जर्जर है। हर समय डर लगा रहता है, लेकिन पिता की यादें यह घर छोड़ने भी नहीं देतीं। प्रशासन इसे पिता की याद में संग्रहालय या उनके नाम से लाइब्रेरी ही बनवा ताे भी काफी सुकून मिलेगा।
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5 जून 1935 को कैराना के मोहल्ला बेगमपुरा में जन्मे रज्मी ने मुशीर झिंझानवी से उर्दू अदब सीखा। पाकिस्तान के लाहौर, कराची और पेशावर के अलावा सऊदी अरब, बहरीन और यूएई के मुशायरों में शिरकत की। 19 सितंबर 2012 को बेगमपुरा, कैराना स्थित किराये के मकान में उनका इंतकाल हो गया। अब रज्मी की विरासत ही संकट में है।
जो कैराना पलायन को लेकर चर्चाओं में रहा। वह किराना घराना और रज्मी की सुनहरी यादें भी समेटे है। भारतीय शास्त्रीय संगीत की सुप्रसिद्ध गायकी ‘किराना घराना’ की पहचान कैराना से जुड़ी है। उस्ताद अब्दुल करीम खां को इस घराने के प्रमुख प्रवर्तकों में माना जाता है। पंडित भीमसेन जोशी, गंगूबाई हंगल, सवाई गंधर्व, हीराबाई बड़ोदकर और प्रभा आत्रे जैसे दिग्गज कलाकार इससे जुड़े रहे।
उस्ताद मशकूर अली खां ने फोन पर बताया कि कब्जे के डर से उन्हें कैराना स्थित अपना पैतृक मकान और सामान बेचना पड़ा। उनका दर्द था कि देश-विदेश से कैराना आने वाले शिष्यों को दिखाने के लिए बुजुर्गों की कोई निशानी नहीं बची। अब रज्मी परिवार की स्थिति ने फिर यही सवाल खड़ा कर दिया है कि कैराना अपनी अदबी विरासत की निशानियां सहेज पाएगा या नहीं।
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कैराना की तंग गलियों से देश-विदेश के मुशायरों तक पहचान बनाने वाले मशहूर शायर मुजफ्फर इस्लाम रज्मी का परिवार बेबसी और मायूसी में जीवन काट रहा है। नगर पालिका के किराये के जिस मकान में रज्मी ने जिंदगी गुजारी, उनके इंतकाल के बाद भी परिवार वहीं रह रहा है। मकान खाली कराने को लेकर परिवार एक मुकदमा हार चुका है, जबकि दूसरा मामला एसडीएम कोर्ट में चल रहा है। रज्मी के बेटे जावेद इकबाल कहते हैं कि नगर पालिका की ओर से मकान खाली कराने के कई नोटिस मिल चुके हैं। पीएम से लेकर स्थानीय प्रशासन तक गुहार लगाई गई, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। यदि यह मकान छूटा तो वह परिवार के साथ कैराना छोड़ दूंगा।
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जावेद कहते हैं कि इस घर से उनके पिता की यादें जुड़ी हैं। कभी इसी घर में मुशायरे की महफिल सजती थी, बड़े बड़े शायर इसमें शरीक होते थे। इसी घर में हमारा बचपन बीता, इस घर की हालत काफी जर्जर है। हर समय डर लगा रहता है, लेकिन पिता की यादें यह घर छोड़ने भी नहीं देतीं। प्रशासन इसे पिता की याद में संग्रहालय या उनके नाम से लाइब्रेरी ही बनवा ताे भी काफी सुकून मिलेगा।
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5 जून 1935 को कैराना के मोहल्ला बेगमपुरा में जन्मे रज्मी ने मुशीर झिंझानवी से उर्दू अदब सीखा। पाकिस्तान के लाहौर, कराची और पेशावर के अलावा सऊदी अरब, बहरीन और यूएई के मुशायरों में शिरकत की। 19 सितंबर 2012 को बेगमपुरा, कैराना स्थित किराये के मकान में उनका इंतकाल हो गया। अब रज्मी की विरासत ही संकट में है।
जो कैराना पलायन को लेकर चर्चाओं में रहा। वह किराना घराना और रज्मी की सुनहरी यादें भी समेटे है। भारतीय शास्त्रीय संगीत की सुप्रसिद्ध गायकी ‘किराना घराना’ की पहचान कैराना से जुड़ी है। उस्ताद अब्दुल करीम खां को इस घराने के प्रमुख प्रवर्तकों में माना जाता है। पंडित भीमसेन जोशी, गंगूबाई हंगल, सवाई गंधर्व, हीराबाई बड़ोदकर और प्रभा आत्रे जैसे दिग्गज कलाकार इससे जुड़े रहे।
उस्ताद मशकूर अली खां ने फोन पर बताया कि कब्जे के डर से उन्हें कैराना स्थित अपना पैतृक मकान और सामान बेचना पड़ा। उनका दर्द था कि देश-विदेश से कैराना आने वाले शिष्यों को दिखाने के लिए बुजुर्गों की कोई निशानी नहीं बची। अब रज्मी परिवार की स्थिति ने फिर यही सवाल खड़ा कर दिया है कि कैराना अपनी अदबी विरासत की निशानियां सहेज पाएगा या नहीं।

शामली समाचार-नई दिल्ली में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात करते मशहूर शायर मुजफ्फर रज

शामली समाचार-नई दिल्ली में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात करते मशहूर शायर मुजफ्फर रज

शामली समाचार-नई दिल्ली में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात करते मशहूर शायर मुजफ्फर रज