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ड्रेस तैयार कराने में फंस गई नई व्यवस्था
Updated Thu, 12 Jul 2018 12:34 AM IST
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शामली। स्वयं सहायता समूहों से ड्रेस सिलाई कराने की नई व्यवस्था तो शुरू हुई, लेकिन शासन की तरफ से 20 जुलाई तक सभी स्कूलों में ड्रेस वितरण कराने के आदेश ने परेशानी बढ़ा दी है। जिससे नई व्यवस्था भी फंस गई है। क्योंकि जिले के करीब 84 हजार बच्चों को ड्रेस वितरण होनी है, लेकिन अब तक स्वयं सहायता समूह सिर्फ 1200 ड्रेस ही तैयार कर पाए हैं।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन योजना से संबद्ध महिला स्वयं सहायता समूहों को प्राथमिक-उच्च प्राथमिक विद्यालयों के बच्चों की ड्रेस सिलाई करने का आदेश दिया गया था। ताकि स्वयं सहायता समूहों को आत्मनिर्भर बनाने में सहयोग किया जा सके। विद्यालयों द्वारा ड्रेेेस का कपड़ा दिए जाने पर 65 रुपये प्रति ड्रेस सिलाई व कपड़ा न दिए जाने पर 200 रुपये प्रति ड्रेस स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को दिए जाने का निर्णय हुआ था। इसके बाद समूहों की महिलाओं ने विद्यालयों में जाकर बच्चों की ड्रेेस की नापतौल करके ड्रेस सिलाई शुरू कराई।
अब शासन ने निर्देश दे दिया कि 20 जुलाई तक सभी स्कूलों में ड्रेस का वितरण हो जाना चाहिए, जिससे बेसिक शिक्षा विभाग भी हरकत में आ गया। अब बेसिक शिक्षा विभाग पूर्व के वर्षों की तरह ठेकेदारों से ड्रेस खरीदने की कवायद में जुट गई हैं। उसकी वजह यह बताई जा रही है कि स्वयं सहायता समूहों के भरोसे 20 जुलाई तक 84 हजार बच्चों की ड्रेस मिलनी मुश्किल होगी, तो फिर वितरण कब होगा।
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राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के जिला प्रबंधक दलगंजन सिंह का कहना है कि स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा 1200 बच्चों की ड्रेस तैयार कराई जा चुकी है। डीएम इंद्र विक्रम सिंह और सीडीओ के समक्ष मामला रखा जाएगा, क्योंकि स्वयं सहायता समूहों ने ड्रेस सिलाई के लिए कपड़ा खरीदने में काफी पैसा खर्च कर दिया है। यदि उनसे ड्रेस नहीं ली जाती है, तो स्वयं सहायता समूहों को भारी नुकसान होगा।
- 20 जुलाई तक शत प्रतिशत विद्यालयों में होना ड्रेेस का वितरण
बेसिक शिक्षा अधिकारी गीता वर्मा का कहना है कि शासनादेश के तहत 20 जुलाई तक बालक बालिकाओं को शत प्रतिशत ड्रेस वितरण करना है। ऐसी स्थिति में सभी स्कूली बच्चों की ड्रेस अभी तक तैयार नहीं हो पाई है। इसीलिए पुराने सिस्टम से ड्रेस की सिलाई व वितरण की व्यवस्था की जाएगी। उनका कहना है कि सहायता समूह की महिलाओं ने जितनी ड्रेस तैयार कर ली हैं, वह ले ली जाएगी।
- स्कूल और बच्चों की संख्या
जनपद में कक्षा एक से पांच तक के परिषदीय विद्यालय, सहायता प्राप्त विद्यालय, राजकीय विद्यालय और माध्यमिक विद्यालय 538 हैं, जिनमें 56873 बच्चे पंजीकृत हैं। वहीं, कक्षा छह से आठ तक 258 विद्यालय हैं, जिनमें 26538 बच्चे पंजीकृत हैं।
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राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन योजना से संबद्ध महिला स्वयं सहायता समूहों को प्राथमिक-उच्च प्राथमिक विद्यालयों के बच्चों की ड्रेस सिलाई करने का आदेश दिया गया था। ताकि स्वयं सहायता समूहों को आत्मनिर्भर बनाने में सहयोग किया जा सके। विद्यालयों द्वारा ड्रेेेस का कपड़ा दिए जाने पर 65 रुपये प्रति ड्रेस सिलाई व कपड़ा न दिए जाने पर 200 रुपये प्रति ड्रेस स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को दिए जाने का निर्णय हुआ था। इसके बाद समूहों की महिलाओं ने विद्यालयों में जाकर बच्चों की ड्रेेस की नापतौल करके ड्रेस सिलाई शुरू कराई।
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अब शासन ने निर्देश दे दिया कि 20 जुलाई तक सभी स्कूलों में ड्रेस का वितरण हो जाना चाहिए, जिससे बेसिक शिक्षा विभाग भी हरकत में आ गया। अब बेसिक शिक्षा विभाग पूर्व के वर्षों की तरह ठेकेदारों से ड्रेस खरीदने की कवायद में जुट गई हैं। उसकी वजह यह बताई जा रही है कि स्वयं सहायता समूहों के भरोसे 20 जुलाई तक 84 हजार बच्चों की ड्रेस मिलनी मुश्किल होगी, तो फिर वितरण कब होगा।
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राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के जिला प्रबंधक दलगंजन सिंह का कहना है कि स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा 1200 बच्चों की ड्रेस तैयार कराई जा चुकी है। डीएम इंद्र विक्रम सिंह और सीडीओ के समक्ष मामला रखा जाएगा, क्योंकि स्वयं सहायता समूहों ने ड्रेस सिलाई के लिए कपड़ा खरीदने में काफी पैसा खर्च कर दिया है। यदि उनसे ड्रेस नहीं ली जाती है, तो स्वयं सहायता समूहों को भारी नुकसान होगा।
- 20 जुलाई तक शत प्रतिशत विद्यालयों में होना ड्रेेस का वितरण
बेसिक शिक्षा अधिकारी गीता वर्मा का कहना है कि शासनादेश के तहत 20 जुलाई तक बालक बालिकाओं को शत प्रतिशत ड्रेस वितरण करना है। ऐसी स्थिति में सभी स्कूली बच्चों की ड्रेस अभी तक तैयार नहीं हो पाई है। इसीलिए पुराने सिस्टम से ड्रेस की सिलाई व वितरण की व्यवस्था की जाएगी। उनका कहना है कि सहायता समूह की महिलाओं ने जितनी ड्रेस तैयार कर ली हैं, वह ले ली जाएगी।
- स्कूल और बच्चों की संख्या
जनपद में कक्षा एक से पांच तक के परिषदीय विद्यालय, सहायता प्राप्त विद्यालय, राजकीय विद्यालय और माध्यमिक विद्यालय 538 हैं, जिनमें 56873 बच्चे पंजीकृत हैं। वहीं, कक्षा छह से आठ तक 258 विद्यालय हैं, जिनमें 26538 बच्चे पंजीकृत हैं।