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मायावती की चुप्पी रही, पर दलित नाराजगी भाजपा को भारी पड़ी-MUZAFFARNAGAR
Updated Fri, 01 Jun 2018 12:24 AM IST
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दलितों की नाराजगी भाजपा को पड़ी भारी
शामली।
कैराना लोकसभा सीट उपचुनाव में गठबंधन की तरफ से चुनाव प्रचार में कांग्रेस, सपा, रालोद और बसपा के झंडों का प्रयोग किया गया था। अलबत्ता बसपा सुप्रीमो मायावती चुनाव के दौरान चुप्पी साधे रहीं। बसपा का संगठन भी चुनाव प्रचार से दूर रहा था। लेकिन दलित भाजपा से नाराज था और उसने अपनी नाराजगी मतदान के जरिए जाहिर की।
कैराना लोकसभा उपचुनाव में गठबंधन की तरफ से रालोद के टिकट पर तबस्सुम हसन को जब प्रत्याशी बनाया गया, तो यह चर्चाएं राजनीतिक गलियारों में चल रही थी कि बसपा की तरफ से इसे हरी झंडी नहीं दी गई है। पूर्व में हुए गोरखपुर और फूलपुर चुनाव की तरह कैराना उपचुनाव में बसपा ने किसी को समर्थन की घोषणा तक नहीं की थी। कैराना उपचुनाव में गठबंधन की तरफ से जितनी भी जनसभाएं की गईं अथवा जनसंपर्क अभियान चलाए गए, उनमें बसपा नेताओं की मौजूदगी दिखाई नहीं देती थी। कर्नाटक चुनाव का परिणाम आने पर जब बसपा अध्यक्ष मायावती ने लखनऊ में प्रेसवार्ता की, तब भी उन्होंने कैराना उपचुनाव के सवाल पर चुप्पी साध ली थी। इसको लेकर भाजपा खेमा यही प्रचारित करने में लगा था कि बसपा की खामोशी का फायदा पार्टी को मिलेगा। उधर, गठबंधन की तरफ से यह संदेश दिया गया कि बसपा का समर्थन गठबंधन को मिला हुआ है। इसी के चलते चुनाव प्रचार में बसपा के झंडे लगाने के साथ ही मंच पर भाषण के दौरान बसपा अध्यक्ष मायावती के जिंदाबाद के नारे भी लगाए जाते थे।
सहारनपुर के शब्बीरपुर कांड और फिर दो अप्रैल को आरक्षण को लेकर हुए आंदोलन में जिस प्रकार से दलितों के खिलाफ मुकदमे दर्ज हुए और गिरफ्तारियां की गई, उससे दलित समाज के लोगों में भाजपा के खिलाफ नाराजगी फैल गई। यही वजह है कि कैराना लोकसभा सीट के उपचुनाव का परिणाम सामने आया, तो उसमें भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा, जबकि गठबंधन की प्रत्याशी तबस्सुम हसन जीत गईं।
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मतदान के पूर्व हुआ था बसपा का कैडर कैंप
वैसे तो बसपा नेताओं ने उपचुनाव से दूरी बनाए रखी, लेकिन मतदान के कुछ दिन पूर्व ही शामली में बसपा का कैडर कैंप भी हुआ था। उसमें बसपा के पश्चिमी उत्तर प्रदेश प्रभारी शमशुदीन राइन सहित विभिन्न बसपा नेता पहुंचे थे। इस दौरान बसपा नेताओं ने भाजपा की नीतियों की जमकर आलोचना की थी, लेकिन उपचुनाव में बसपा के समर्थन को लेकर नेताओं ने यही कहा था कि अभी पार्टी हाईकमान का संदेश नहीं मिला है। पार्टी अध्यक्ष की तरफ से निर्देश मिलते ही बसपा कार्यकर्ता सैनिक की तरह कार्य में जुट जाएगा। इससे भी दलित समाज को संदेश दिया गया कि भाजपा का विरोध तो जारी रहेगा।
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शामली।
कैराना लोकसभा सीट उपचुनाव में गठबंधन की तरफ से चुनाव प्रचार में कांग्रेस, सपा, रालोद और बसपा के झंडों का प्रयोग किया गया था। अलबत्ता बसपा सुप्रीमो मायावती चुनाव के दौरान चुप्पी साधे रहीं। बसपा का संगठन भी चुनाव प्रचार से दूर रहा था। लेकिन दलित भाजपा से नाराज था और उसने अपनी नाराजगी मतदान के जरिए जाहिर की।
कैराना लोकसभा उपचुनाव में गठबंधन की तरफ से रालोद के टिकट पर तबस्सुम हसन को जब प्रत्याशी बनाया गया, तो यह चर्चाएं राजनीतिक गलियारों में चल रही थी कि बसपा की तरफ से इसे हरी झंडी नहीं दी गई है। पूर्व में हुए गोरखपुर और फूलपुर चुनाव की तरह कैराना उपचुनाव में बसपा ने किसी को समर्थन की घोषणा तक नहीं की थी। कैराना उपचुनाव में गठबंधन की तरफ से जितनी भी जनसभाएं की गईं अथवा जनसंपर्क अभियान चलाए गए, उनमें बसपा नेताओं की मौजूदगी दिखाई नहीं देती थी। कर्नाटक चुनाव का परिणाम आने पर जब बसपा अध्यक्ष मायावती ने लखनऊ में प्रेसवार्ता की, तब भी उन्होंने कैराना उपचुनाव के सवाल पर चुप्पी साध ली थी। इसको लेकर भाजपा खेमा यही प्रचारित करने में लगा था कि बसपा की खामोशी का फायदा पार्टी को मिलेगा। उधर, गठबंधन की तरफ से यह संदेश दिया गया कि बसपा का समर्थन गठबंधन को मिला हुआ है। इसी के चलते चुनाव प्रचार में बसपा के झंडे लगाने के साथ ही मंच पर भाषण के दौरान बसपा अध्यक्ष मायावती के जिंदाबाद के नारे भी लगाए जाते थे।
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सहारनपुर के शब्बीरपुर कांड और फिर दो अप्रैल को आरक्षण को लेकर हुए आंदोलन में जिस प्रकार से दलितों के खिलाफ मुकदमे दर्ज हुए और गिरफ्तारियां की गई, उससे दलित समाज के लोगों में भाजपा के खिलाफ नाराजगी फैल गई। यही वजह है कि कैराना लोकसभा सीट के उपचुनाव का परिणाम सामने आया, तो उसमें भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा, जबकि गठबंधन की प्रत्याशी तबस्सुम हसन जीत गईं।
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मतदान के पूर्व हुआ था बसपा का कैडर कैंप
वैसे तो बसपा नेताओं ने उपचुनाव से दूरी बनाए रखी, लेकिन मतदान के कुछ दिन पूर्व ही शामली में बसपा का कैडर कैंप भी हुआ था। उसमें बसपा के पश्चिमी उत्तर प्रदेश प्रभारी शमशुदीन राइन सहित विभिन्न बसपा नेता पहुंचे थे। इस दौरान बसपा नेताओं ने भाजपा की नीतियों की जमकर आलोचना की थी, लेकिन उपचुनाव में बसपा के समर्थन को लेकर नेताओं ने यही कहा था कि अभी पार्टी हाईकमान का संदेश नहीं मिला है। पार्टी अध्यक्ष की तरफ से निर्देश मिलते ही बसपा कार्यकर्ता सैनिक की तरह कार्य में जुट जाएगा। इससे भी दलित समाज को संदेश दिया गया कि भाजपा का विरोध तो जारी रहेगा।