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700 किलोमीटर का सफर, जेब में पैसे, न पेट भरने को भोजन
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शामली: मुजफ्फरनगर से अपने परिवार सहित करनाल लौटती महिलाएं।
- फोटो : SHAMLI
शामली। लॉकडाउन में काम धंधा बंद होने पर श्रमिकों का सैकड़ों किलोमीटर दूर अपने घर की तरफ लौटने को सिलसिला जारी है। कोई रेहडे से अपने परिवार के साथ लौट रहा है कोई अकेला। इन श्रमिकों का कहना था कि जेब में पैसे नहीं है और न खाने को भोजन।
- 700 किलोमीटर दूर घर जाने को पैदल निकले
शनिवार दोपहर डेढ़ बजे कैराना रोड पूर्वी यमुना नहर पर चार श्रमिक पीठ पर बैग लगाए शामली की तरफ आते मिले। रामसागर, लालाराम, मनोज और परदेशी ने बताया कि उनका घर 700 किलोमीटर दूर हरदोई जिले में गांव बिलकराम है। वे कैराना क्षेत्र में देहरादून के ठेकेदार के साथ टंकी निर्माण कार्य में मजदूरी कर रहे थे। काम बंद होने पर उनके पास न खाने को राशन रहा और न ही जेब में पैसे। कैराना में पुलिस ने उन्हें भोजन खिलाया।
- सिर पर सामान की गठरी, बच्चे साथ
शहर में फव्वारा चौक पर दोपहर 12 बजे एक परिवार करनाल की तरफ जाता हुआ मिला। दंपती के सिर पर सामान की गठरी थी और पांच बच्चे साथ। हरियाणा के करनाल जिले के नीलोखेड़ी के रहने वाले हैं। मुजफ्फरनगर के मंसूरपुर में झोपड़ी डालकर लोहे का सामान बेचते थे। शनिवार सुबह घर के लिए निकले। मुजफ्फरनगर से लालूखेड़ी तक निजी वाहन में बैठकर पहुंचे, वहां से पैदल आ रहे हैं।
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- रेहड़े में परिवार, इटावा का सफर
शहर के अजंता चौक पर चार-पांच रेहड़े में परिवार मेरठ की तरफ जाते हुए मिले। रमेश ने बताया कि उसकी पत्नी गर्भवती है। वह पानीपत में कंबल फैक्टरी में काम करते थे। फैक्टरी बंद होने पर उनके पास खाने को राशन बचा न पैसे। अब वे रेहडे़ से परिवार को लेकर जिला इटावा में अपने घर लौट रहे है।
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- 700 किलोमीटर दूर घर जाने को पैदल निकले
शनिवार दोपहर डेढ़ बजे कैराना रोड पूर्वी यमुना नहर पर चार श्रमिक पीठ पर बैग लगाए शामली की तरफ आते मिले। रामसागर, लालाराम, मनोज और परदेशी ने बताया कि उनका घर 700 किलोमीटर दूर हरदोई जिले में गांव बिलकराम है। वे कैराना क्षेत्र में देहरादून के ठेकेदार के साथ टंकी निर्माण कार्य में मजदूरी कर रहे थे। काम बंद होने पर उनके पास न खाने को राशन रहा और न ही जेब में पैसे। कैराना में पुलिस ने उन्हें भोजन खिलाया।
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- सिर पर सामान की गठरी, बच्चे साथ
शहर में फव्वारा चौक पर दोपहर 12 बजे एक परिवार करनाल की तरफ जाता हुआ मिला। दंपती के सिर पर सामान की गठरी थी और पांच बच्चे साथ। हरियाणा के करनाल जिले के नीलोखेड़ी के रहने वाले हैं। मुजफ्फरनगर के मंसूरपुर में झोपड़ी डालकर लोहे का सामान बेचते थे। शनिवार सुबह घर के लिए निकले। मुजफ्फरनगर से लालूखेड़ी तक निजी वाहन में बैठकर पहुंचे, वहां से पैदल आ रहे हैं।
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- रेहड़े में परिवार, इटावा का सफर
शहर के अजंता चौक पर चार-पांच रेहड़े में परिवार मेरठ की तरफ जाते हुए मिले। रमेश ने बताया कि उसकी पत्नी गर्भवती है। वह पानीपत में कंबल फैक्टरी में काम करते थे। फैक्टरी बंद होने पर उनके पास खाने को राशन बचा न पैसे। अब वे रेहडे़ से परिवार को लेकर जिला इटावा में अपने घर लौट रहे है।

शामली में पैदल लौटती महिला व युवक।- फोटो : SHAMLI

शामली पानीपत से हरदोई पैदल लौटते लोग।- फोटो : SHAMLI

शामली में रेहडे़ से हरियाणा से अपने घर लौटते लोग।- फोटो : SHAMLI