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मन की एकाग्रता के बिना सफलता मुश्किल
Updated Thu, 29 Nov 2018 12:06 AM IST
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एकाग्रता के बिना सफलता मुश्किल
अमर उजाला ब्यूरो
झिंझाना। गीता सत्संग भवन में संत स्वामी स्वरूपानंद गिरी जी महाराज ने कहा कि मन की एकाग्रता के बिना सफलता मुश्किल हैं। सत्संग में संगीत का अपना महत्व होता है। भक्त की भक्ति से परमात्मा खुश होते हैं। और कलयुग में प्रभु के नाम सुमिरन से ही मोक्ष प्राप्त होता है।
संत स्वामी स्वरूपानंद जी महाराज ने कहा कि किसी भी कार्य को एकाग्र मन से किया जाएगा तो सफलता निश्चित है। अधिकांश लोग ड्राइविंग करते हुए फोन का इस्तेमाल करते हैं। जो उनके जान माल के नुकसान का सबब हो सकता है। जब हम ड्राइविंग करते हैं तो हमें गाड़ी चलाने पर ध्यान केंद्रित रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि हर वक्त परमात्मा का स्मरण करते रहने में ही जीव की भलाई होती है। कलयुग में मोक्ष प्राप्ति के लिए भगवान नाम का गुणगान ही पर्याप्त है। उन्होंने सत्संग में संगीत के महत्व को समझाया। बताया कि संकल्प विकल्प को ही मन कहते है। इसलिए प्राणी को अपने मन पर नियंत्रण रखना चाहिए। इस अवसर पर राकेश शर्मा, मधुसूदन, अशोक विश्वास, मिंटू गुप्ता, ललित गुप्ता, नरेश चंद शर्मा, नीलम बिंदल, संगीता, ऊषा, रेखा शर्मा आदि रहीं।
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अमर उजाला ब्यूरो
झिंझाना। गीता सत्संग भवन में संत स्वामी स्वरूपानंद गिरी जी महाराज ने कहा कि मन की एकाग्रता के बिना सफलता मुश्किल हैं। सत्संग में संगीत का अपना महत्व होता है। भक्त की भक्ति से परमात्मा खुश होते हैं। और कलयुग में प्रभु के नाम सुमिरन से ही मोक्ष प्राप्त होता है।
संत स्वामी स्वरूपानंद जी महाराज ने कहा कि किसी भी कार्य को एकाग्र मन से किया जाएगा तो सफलता निश्चित है। अधिकांश लोग ड्राइविंग करते हुए फोन का इस्तेमाल करते हैं। जो उनके जान माल के नुकसान का सबब हो सकता है। जब हम ड्राइविंग करते हैं तो हमें गाड़ी चलाने पर ध्यान केंद्रित रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि हर वक्त परमात्मा का स्मरण करते रहने में ही जीव की भलाई होती है। कलयुग में मोक्ष प्राप्ति के लिए भगवान नाम का गुणगान ही पर्याप्त है। उन्होंने सत्संग में संगीत के महत्व को समझाया। बताया कि संकल्प विकल्प को ही मन कहते है। इसलिए प्राणी को अपने मन पर नियंत्रण रखना चाहिए। इस अवसर पर राकेश शर्मा, मधुसूदन, अशोक विश्वास, मिंटू गुप्ता, ललित गुप्ता, नरेश चंद शर्मा, नीलम बिंदल, संगीता, ऊषा, रेखा शर्मा आदि रहीं।
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