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भगवान भक्त के प्रेम के वशीभूत होते हैं- विजय कौशल जी महाराज

Sun, 23 Sep 2018 11:53 PM IST
Updated Sun, 23 Sep 2018 11:53 PM IST
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भगवान भक्त के प्रेम के वशीभूत होते हैं- विजय कौशल जी महाराज
भगवान भक्त के प्रेम के वशीभूत होते हैं : विजय कौशल
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शामली। श्रीरामकथा मर्मज्ञ संत प्रवर विजय कौशल महाराज ने अमृत वर्षा करते हुए कहा कि भगवान की कथा के श्रवण में पित्तृ प्रसन्न होते हैं और उन्हें पितृ योनी से मुक्ति मिल जाती है। रामकथा की महत्ता बताते हुए कहा कि भगवान की कथा पतित पावनी है। यह समस्त पापों का विनाश करती हैं।

रविवार को कैराना रोड स्थित जे.जे.फार्म में श्रीराम कथा का शुभारंभ करते हुए रामकथा की महिमा, भगवान श्री राम के अवतार की कथा के साथ-साथ नरसी का भात का हृदय स्पर्शी एवं मार्मिक चित्रण किया। श्रीराम कथा व्यास विजय कौशल जी महाराज ने आठ दिवसीय श्रीराम कथा का शुभारंभ करते हुए कहा कि पितृ पक्ष प्रारंभ हो रहा है। यह परम सौभाग्य की बात है कि आप सभी के पितरों को भी भगवान की पतित पावनी कथा सुनने का अवसर मिला है। भगवान की कथा के श्रवण में पित्तर प्रसन्न होते हैं और उन्हें पितृ योनि से मुक्ति मिल जाती हैं। रामकथा की महत्ता बताते हुए कहा कि भगवान की कथा पतित पावन है, जो समस्त पापों का विनाश करती है। रामकथा उस औषधि के समान है, जो लौकिक और परलौकिक रोगों का विनाश करती है। रामकथा केवल सुनी या गाई जाती है आचरण में उतारी नहीं जाती। मन- कर्म, वचन जनित अद्य जाई, सुनहिं जे कथा श्रवण मन लाई।’ भगवान के दर्शन केवल उनकी कथा से ही हो सकते हैं। विभीषण को भी भगवान राम की कथा सुनकर ही दर्शन हुए थे। जिन भगवान राम की कथा इतनी सुंदर है, वे स्वयं कितने सुंदर होगें। कथा के प्रारंभ में उन्होंने भगवान गणेश की स्तुति करते हुए कहा कि गणेश जी सर्वप्रथम पूजे जाते है। हमें उनके स्वरूप से उनके गुणों को ग्रहण करना चाहिए। किसी भी परिवार, समाज, प्रदेश तथा राष्ट्र के गणपति को गणेश जी जैसा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भगवान परम स्वतंत्र है। भगवान भक्त के प्रेम के वशीभूत होते हैं। भगवान को भक्त के वशीभूत होकर क्या काम करने पड़ते हैं। भगवान श्रीराम के अवतार की कथा सुनाकर भाव विभोर कर दिया। इसी प्रसंग में उन्होंने लोक का उदाहरण देते हुए कहा कि आज भी पुत्र के जन्म लेने पर उत्सव मनाया जाता है, जबकि पुत्री के जन्म लेने पर खुशी नहीं मनाते। उन्होंने कहा कि जिस घर में बेटी का जन्म नहीं होता वह घर अभागा माना जाता है। बेटी के आगे ही सौभाग्यवती लिखा जाता है। कथा के मुख्य आयोजक राजेश्वर बंसल ने संत विजय कौशल महाराज का आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि प्रतिदिन प्रात: 8 बजे श्री मंदिर हनुमान टीला हनुमान धाम पर विजय कौशल जी महाराज के सानिध्य में यज्ञ का आयोजन किया जायेगा। मंच संचालन राजीव मलिक ने किया।
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