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शब ए कद्र की रात खुदा की बारगाह में छलके आंसू
Updated Wed, 13 Jun 2018 12:12 AM IST
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अकीदतमंदों ने रातभर की अल्लाह की इबादत
कैराना। शब-ए-कद्र की रात पर अकीदतमंदों ने अल्लाह की इबादत की। अपने गिरेबां में झांके और पिछले गुनाहों की माफी मांगी।
27 वीं रमजान की शब-ए-कद्र की रात को मुबारक रात माना गया है। कैराना में पानीपत रोड स्थित मदरसा अरबिया इशातुल इस्लाम के सदर मौलाना बरकततुला अमीनी ने बताया कि कुरान शरीफ के तीसवें पारे की सूरत सूरे-कद्र अल्लाह ताला ने फरमाया बेशक हमने कुरान को शब-ए-कद्र में उतारा। यह हजार रातों से बेहतर है, जिसमें फरिश्ते और जिब्रील अलैहिस्सलाम जमीं की तरफ अपने रब के हुक्म पर हर काम के लिए आते हैं। सुबह चमकने तक बलाओं और आफतों से सलामती होती है। शब-ए-कद्र की इन रातों में नबी-ए-करीम हजरत पैगंबर साहब खास तौर से ज्यादा से ज्यादा इबादत करते थे। उन्होंने बताया कि साल में इस रात में इबादत करने वाले लोग बडे ही खुशनसीब है, जोकि उन्हें ऐसा मौका मिलता है। अमूमन लोग 27वीं रात को शब-ए-कद्र की रात मानते हैं।
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कैराना। शब-ए-कद्र की रात पर अकीदतमंदों ने अल्लाह की इबादत की। अपने गिरेबां में झांके और पिछले गुनाहों की माफी मांगी।
27 वीं रमजान की शब-ए-कद्र की रात को मुबारक रात माना गया है। कैराना में पानीपत रोड स्थित मदरसा अरबिया इशातुल इस्लाम के सदर मौलाना बरकततुला अमीनी ने बताया कि कुरान शरीफ के तीसवें पारे की सूरत सूरे-कद्र अल्लाह ताला ने फरमाया बेशक हमने कुरान को शब-ए-कद्र में उतारा। यह हजार रातों से बेहतर है, जिसमें फरिश्ते और जिब्रील अलैहिस्सलाम जमीं की तरफ अपने रब के हुक्म पर हर काम के लिए आते हैं। सुबह चमकने तक बलाओं और आफतों से सलामती होती है। शब-ए-कद्र की इन रातों में नबी-ए-करीम हजरत पैगंबर साहब खास तौर से ज्यादा से ज्यादा इबादत करते थे। उन्होंने बताया कि साल में इस रात में इबादत करने वाले लोग बडे ही खुशनसीब है, जोकि उन्हें ऐसा मौका मिलता है। अमूमन लोग 27वीं रात को शब-ए-कद्र की रात मानते हैं।