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मनरेगा में 450 प्रवासी श्रमिकों को मिला काम
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शामली। दो जून रोटी की खातिर घर से सैकड़ों किमी दूर कामधंधा करने वाले प्रवासी श्रमिक घर लौट आए हैं, लेकिन अब उनके सामने रोजगार का संकट है। सरकार ने उन्हें मनरेगा योजना में काम देने का भरोसा दिया है। जिले में लौटे करीब 2800 प्रवासी श्रमिकों में से सिर्फ 850 ही अकुशल श्रमिक है। मनरेगा में काम देने के लिए इनके जॉब कार्ड बना दिए गए हैं। प्रशासन का दावा है कि इनमें से करीब 450 मनरेगा में काम कर रहे हैं। पेश है रिपोर्ट...
एडीएम कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार जिले में करीब 2800 प्रवासी श्रमिक बाहरी जनपदों से लौटे हैं। जिला ग्राम्य विकास प्राधिकरण के परियोजना निदेशक के अनुसार इनमें से करीब 850 प्रवासी श्रमिक ही अकुशल श्रमिक है, जो कि मजदूरी आदि कर सकते हैं। इन सभी के परिवार के जॉब कार्ड बना दिए गए हैं। इनमें से करीब 450 श्रमिक सक्रिय जॉब कार्ड धारक हैं या यानी मनरेगा में काम भी कर रहे हैं। परियोजना निदेशक के अनुसार बाकी प्रवासी कुशल कारीगर हैं। मनरेगा में 201 रुपये प्रतिदिन मजदूरी मिलती है। विभागीय जानकारी के मुताबिक जनपद में करीब 4550 सक्रिय जॉब कार्डधारक हैं। इनमें से वर्तमान में जनपद की सभी ग्राम पंचायतों में 3251 श्रमिक काम कर रहे हैं।
15 दिन पहले मिला मनरेगा में काम
गांव टिटौली निवासी प्रवासी श्रमिक बालक राम ने बताया कि वह गांव नंगला में कोल्हू पर काम करने गया था। लॉकडाउन में कोल्हू बंद होने पर घर आ गए। कोल्हू पर मजदूरी कर मुश्किल से करीब छह हजार रुपये जमा किए थे, वे खत्म हो गए। अब 15 दिन पहले मनरेगा में काम मिला है। मुंडेटकलां निवासी सतीश ने बताया कि लॉकडाउन में कहीं पर काम नहीं मिला। परिवार का पालन पोषण करने के लिए 25 मई से मनरेगा में काम मिला है।
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जनपद में मनरेगा श्रमिकों की स्थिति
ब्लाक - सक्रिय जॉब कार्डधारक - वर्तमान में काम करने वाले श्रमिक
कैराना - 900 515
कांधला - 1100 608
शामली - 356 700
थानाभवन - 1300 738
ऊन - 1450 1034
-----------------------------------------------
कुल - 4550 3251
कोट
जनपद में आए 850 प्रवासी श्रमिकों ने जॉबकार्ड बनवाएं है। पहले मनरेगा की तरफ श्रमिकों का रुझान कम था। लॉकडाउन के बाद मनरेगा में श्रमिकों की संख्या पिछले सालों से ज्यादा हुई है। इस समय एक दिन में 3250 के करीब श्रमिक मनरेगा के तहत काम कर रहे हैं। - ज्ञानेश्वर तिवारी, परियोजना निदेशक।
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एडीएम कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार जिले में करीब 2800 प्रवासी श्रमिक बाहरी जनपदों से लौटे हैं। जिला ग्राम्य विकास प्राधिकरण के परियोजना निदेशक के अनुसार इनमें से करीब 850 प्रवासी श्रमिक ही अकुशल श्रमिक है, जो कि मजदूरी आदि कर सकते हैं। इन सभी के परिवार के जॉब कार्ड बना दिए गए हैं। इनमें से करीब 450 श्रमिक सक्रिय जॉब कार्ड धारक हैं या यानी मनरेगा में काम भी कर रहे हैं। परियोजना निदेशक के अनुसार बाकी प्रवासी कुशल कारीगर हैं। मनरेगा में 201 रुपये प्रतिदिन मजदूरी मिलती है। विभागीय जानकारी के मुताबिक जनपद में करीब 4550 सक्रिय जॉब कार्डधारक हैं। इनमें से वर्तमान में जनपद की सभी ग्राम पंचायतों में 3251 श्रमिक काम कर रहे हैं।
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15 दिन पहले मिला मनरेगा में काम
गांव टिटौली निवासी प्रवासी श्रमिक बालक राम ने बताया कि वह गांव नंगला में कोल्हू पर काम करने गया था। लॉकडाउन में कोल्हू बंद होने पर घर आ गए। कोल्हू पर मजदूरी कर मुश्किल से करीब छह हजार रुपये जमा किए थे, वे खत्म हो गए। अब 15 दिन पहले मनरेगा में काम मिला है। मुंडेटकलां निवासी सतीश ने बताया कि लॉकडाउन में कहीं पर काम नहीं मिला। परिवार का पालन पोषण करने के लिए 25 मई से मनरेगा में काम मिला है।
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जनपद में मनरेगा श्रमिकों की स्थिति
ब्लाक - सक्रिय जॉब कार्डधारक - वर्तमान में काम करने वाले श्रमिक
कैराना - 900 515
कांधला - 1100 608
शामली - 356 700
थानाभवन - 1300 738
ऊन - 1450 1034
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कुल - 4550 3251
कोट
जनपद में आए 850 प्रवासी श्रमिकों ने जॉबकार्ड बनवाएं है। पहले मनरेगा की तरफ श्रमिकों का रुझान कम था। लॉकडाउन के बाद मनरेगा में श्रमिकों की संख्या पिछले सालों से ज्यादा हुई है। इस समय एक दिन में 3250 के करीब श्रमिक मनरेगा के तहत काम कर रहे हैं। - ज्ञानेश्वर तिवारी, परियोजना निदेशक।