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किसान धान की उन्नत शील प्रजातियों को अपनाएं
Updated Fri, 16 Jun 2017 12:55 AM IST
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शामली। आत्मा योजना के तहत आयोजित जिला स्तरीय कृषक प्रशिक्षण गोष्ठी में किसानों को ड्रिप सिंचाई योजना की उपयोगिता के बारे में जानकारी दी। धान की उन्नत प्रजातियों की पैदावार पर जोर दिया।
बृहस्पतिवार को माजरा रोड स्थित राजकीय बीज भंडार में आयोजित गोष्ठी में उप निदेशक कृषि रामवीर कटारा ने कहा कि बीज खरीद पर अनुदान प्राप्त करने के लिए किसानों को कृषि विभाग में ऑनलाइन पंजीकरण अवश्य कराना चाहिए। धान की उन्नत प्रजातियों जैसे पीबी 1509, पीबी6 की पैदावार बढ़ाने जोर दिया। कृषि यंत्रों रोटोवेटर, लेजर, जेबलर, नेपसेक, स्पेयर के बारे में जानकारी दी। कहा कि जिले में भूजल स्तर गिरता जा रहा है। पानी की कमी को देखते हुए किसानों को साठा धान नहीं लगानी चाहिए।
कृषि विज्ञान केंद्र बघरा के वैज्ञानिक डाक्टर शिवकुमार ने धान एवं गन्ने की फसल में कीट एवं रोगों से बचाव के बारे में बताया। धान की नर्सरी की उपयुक्त विधि, रोपाई की विधि, गन्ने की उन्नत प्रजातियों के बारे बताकर बुआई समय पर करने की सलाह दी। डाक्टर आरसी राठी ने पशुपालकों गर्भाधान के समय आवश्यक सावधानी बरतने के निर्देश दिए है। पशुओं को खीस पिलाना चाहिए, क्योंकि उसमें मौजूद पोषक तत्व रोगों से रक्षा करते है।
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इफ्को के प्रबंधक शैलेंद्र सिंह ने भूमि की उर्वरकता बढ़ाने के लिए हरी खाद, जैव उर्वरक का प्रयोग करने और डीएपी के स्थान पर एनआर के प्रयोग करने पर जोर दिया। उप परियोजना निदेशक आत्मा के सुबोध कुमार ने भी विचार व्यक्त किए। इस मौके पर बिजेंद्र सिंह, विशाल, सतेंद्र, तेजपाल, हरेंद्र जयवीर, रूपेंद्र, अमित, बालेश्वर, विक्रांत, संजीव और परमेंद्र आदि मौजूद रहे। डाक्टर देवराज राठौर ने संचालन किया।
20,444 हेक्टेयर में लहलहाएगी धान की फसल
शामली । जिले में इस बार 20, 444 हेक्टेयर में धान की फसल लहलहाएगी। जिसमें 19,800 हेक्टेयर में सुगंधित धान, 180 हेक्टेयर में शंकर धान तथा 462 धान की अन्य प्रजाति का उत्पादन किया जाएगा। गत वर्ष जिले में 20,400 हेक्टेयर में धान की फसल बोई गई थी। इस बार शासन से कृषि विभाग को 20,444 हेक्टेयर का लक्ष्य प्राप्त किया है। उपनिदेशक कृषि डाक्टर रामवीर कटारा ने बताया कि खरीफ फसल में धान हाईब्रिड बीज एराईज 6444 गोल्ड विक्रय के लिए सभी विकास खंड स्तरीय राजकीय बीज गोदामों पर उपलब्ध है। किसानों को 275 प्रति किग्रा की दर से बीज दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि धान पर प्रति किग्रा 50 रुपये केंद्रांश तथा 80 रुपये राज्यांश (कुल अनुदान 130 रुपये) कृषकों के खाते में भेजा जाएगा।
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बृहस्पतिवार को माजरा रोड स्थित राजकीय बीज भंडार में आयोजित गोष्ठी में उप निदेशक कृषि रामवीर कटारा ने कहा कि बीज खरीद पर अनुदान प्राप्त करने के लिए किसानों को कृषि विभाग में ऑनलाइन पंजीकरण अवश्य कराना चाहिए। धान की उन्नत प्रजातियों जैसे पीबी 1509, पीबी6 की पैदावार बढ़ाने जोर दिया। कृषि यंत्रों रोटोवेटर, लेजर, जेबलर, नेपसेक, स्पेयर के बारे में जानकारी दी। कहा कि जिले में भूजल स्तर गिरता जा रहा है। पानी की कमी को देखते हुए किसानों को साठा धान नहीं लगानी चाहिए।
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कृषि विज्ञान केंद्र बघरा के वैज्ञानिक डाक्टर शिवकुमार ने धान एवं गन्ने की फसल में कीट एवं रोगों से बचाव के बारे में बताया। धान की नर्सरी की उपयुक्त विधि, रोपाई की विधि, गन्ने की उन्नत प्रजातियों के बारे बताकर बुआई समय पर करने की सलाह दी। डाक्टर आरसी राठी ने पशुपालकों गर्भाधान के समय आवश्यक सावधानी बरतने के निर्देश दिए है। पशुओं को खीस पिलाना चाहिए, क्योंकि उसमें मौजूद पोषक तत्व रोगों से रक्षा करते है।
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इफ्को के प्रबंधक शैलेंद्र सिंह ने भूमि की उर्वरकता बढ़ाने के लिए हरी खाद, जैव उर्वरक का प्रयोग करने और डीएपी के स्थान पर एनआर के प्रयोग करने पर जोर दिया। उप परियोजना निदेशक आत्मा के सुबोध कुमार ने भी विचार व्यक्त किए। इस मौके पर बिजेंद्र सिंह, विशाल, सतेंद्र, तेजपाल, हरेंद्र जयवीर, रूपेंद्र, अमित, बालेश्वर, विक्रांत, संजीव और परमेंद्र आदि मौजूद रहे। डाक्टर देवराज राठौर ने संचालन किया।
20,444 हेक्टेयर में लहलहाएगी धान की फसल
शामली । जिले में इस बार 20, 444 हेक्टेयर में धान की फसल लहलहाएगी। जिसमें 19,800 हेक्टेयर में सुगंधित धान, 180 हेक्टेयर में शंकर धान तथा 462 धान की अन्य प्रजाति का उत्पादन किया जाएगा। गत वर्ष जिले में 20,400 हेक्टेयर में धान की फसल बोई गई थी। इस बार शासन से कृषि विभाग को 20,444 हेक्टेयर का लक्ष्य प्राप्त किया है। उपनिदेशक कृषि डाक्टर रामवीर कटारा ने बताया कि खरीफ फसल में धान हाईब्रिड बीज एराईज 6444 गोल्ड विक्रय के लिए सभी विकास खंड स्तरीय राजकीय बीज गोदामों पर उपलब्ध है। किसानों को 275 प्रति किग्रा की दर से बीज दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि धान पर प्रति किग्रा 50 रुपये केंद्रांश तथा 80 रुपये राज्यांश (कुल अनुदान 130 रुपये) कृषकों के खाते में भेजा जाएगा।