फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Shamli News ›   32 maah mila beta

32 माह बाद मिला बेटा, परिवार के चेहरे पर लौटी मुस्कान

Mon, 20 May 2019 11:14 PM IST
NAVEEN GUPTA amarujala
amarujala Published by: NAVEEN GUPTA Updated Mon, 20 May 2019 11:14 PM IST
विज्ञापन
32 maah mila beta
file - फोटो : amarujala
घर से मदरसे में जाते समय संदिग्ध हालात में लापता हुए किशोर को साइबर सेल ने 32 महीने बाद सोशल मीडिया के माध्यम से ट्रेस कर सकुशल बरामद कर लिया। किशोर के सकुशल मिलने पर परिजनों में खुशी का माहौल है।
विज्ञापन

सोमवार को पुलिस लाइन सभागार में एसपी अजय कुमार ने प्रेसवार्ता कर बताया कि नसीम निवासी गांव नंगलाराई थाना कैराना ने 24 सितंबर 2016 को पुलिस को सूचना दी थी कि उसका पुत्र कलीम (15) घर से शामली के मोहल्ला पंसारियान स्थित मदरसे में पढ़ने के लिए गया था। उसके बाद से वह घर नहीं लौटा। इस संबंध में थाना कैराना पर पहले गुमशुदगी दर्ज कर तलाश की गई थी। एसपी ने बताया कि पिछले महीने 22 अप्रैल को परिजनों ने एसपी अजय कुमार से मिलकर लापता कलीम की बरामदगी की मांग की थी। परिजनों ने बताया कि उन्होंने कलीम का फोटो अपने एक परिचित की फेसबुक पर देखा है। एसपी ने इस मामले की जांच साइबर सेल प्रभारी कर्मवीर सिंह को सौंपी। साइबर सेल ने कलीम के फेसबुक आइडी के बारे में फेसबुक मुख्यालय से पत्राचार किया। मुख्यालय से मिली जानकारी के आधार पर छानबीन की गई तो उसका गाजियाबाद में होने का पता चला। इसके बाद साइबर सेल की टीम ने लापता कलीम को गाजियाबाद से बरामद कर लिया। कलीम को सकुशल पाकर पूरे परिवार के चेहरे पर मुस्कान लौट आई। एसपी ने साइबर सेल प्रभारी को 10 हजार रुपये का इनाम देने की घोषणा की है। इस अवसर पर साइबर सेल प्रभारी कर्मवीर सिंह भी मौजूद रहे।
विज्ञापन


दिल्ली, गाजियाबाद में रहा कलीम
एसपी ने बताया कि कलीम ने पूछताछ में बताया कि वह घर से मदरसा जाने के लिए निकला था, लेकिन बिना बताए वह दिल्ली सदर बाजार चला गया था। वहां पर उसने एक प्रिंटिंग प्रेस में करीब नौ माह तक काम किया। इसके बाद वहां से काम छोड़कर वह चार माह जामा मस्जिद में रहा। इसके बाद उसे झूले पर काम करने के लिए गाजियाबाद के मोहल्ला अली प्रेम गार्डन निवासी इमरान और जाने आलम के पास काम कर रहा था। कलीम ने बताया कि वह अपनी इच्छा से घर से चला गया था। वहां उसने जो काम किया, उसी से अपना खर्चा चलाया। उसने अपनी कमाई के रुपये से मोबाइल लिया और उसी से फेसबुक चलाता था।
विज्ञापन
विज्ञापन


पिता का हो गया था निधन, मां रहने लगी थी बीमार
कलीम ने वैसे तो घर छोड़ने का कोई कारण नहीं बताया, लेकिन पुलिस की जांच में यह तथ्य आया है कि उसके पिता नसीम उसे पढ़ा लिखाकर कुछ बनाना चाहते थे। इसी के चलते उसे कैराना से शामली मदरसे में पढ़ने के लिए भेजा था। कलीम के जाने के बाद उनके पिता नसीम समेत पूरा परिवार दुखी था। कलीम के वियोग में करीब एक साल पहले उसके पिता का निधन हो गया था। उसकी मां भी बीमार रहने लगी थी। परिवार में अब मां के अलावा कलीम समेत छह भाई और चार बहनें हैं। तीन बहनों की शादी हो चुकी है। पूछने पर कलीम ने बताया कि उसे अपने परिवार की याद तो बहुत आती थी, लेकिन वह पिटाई के डर की वजह से वह घर नहीं आ रहा था।


पुलिस ने लगा दी थी फाइनल रिपोर्ट
कैराना पुलिस ने लापता कलीम को ढूंढने में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई। पहले लापता की गुमशुदगी दर्ज की, जब वह नहीं मिला तो अपहरण की धारा में केस को तरमीम कर दिया। इसके कुछ दिन बाद इस मामले में फाइनल रिपोर्ट लगाकर इस मामले को बंद कर दिया। परिजनों ने बताया कि वह लापता कलीम की बरामदगी के लिए कई बार कैराना कोतवाली गए, लेकिन उनके मामले को पुलिस ने गंभीरता से नहीं लिया। इसके बाद परिजन हार थक कर घर बैठ गए थे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed