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पूर्व विधायक अब्दुल वारिस राव अब थामेंगे कांग्रेस हाथ
Updated Tue, 20 Feb 2018 11:56 PM IST
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पूर्व विधायक के पाला बदलने के निर्णय से सरगर्मियां बढ़ी
शामली। कांग्रेस ने वर्ष 2019 में होने वाले चुनाव के तैयारियां शुरू कर दी है। कांग्रेस की नजर मुस्लिम वोट बैंक पर है। कांग्रेस का प्रयास है कि सभी वर्गों को साधकर ही भाजपा को चुनौती दी जा सकती है। इसी कड़ी में शामली में थानाभवन सीट से विधायक रहे अब्दुल वारिस राव कांग्रेस का हाथ थामेंगे। इसकी तैयारियां पूरी हो चुकी है। बस औपचारिक घोषणा बाकी है।
वर्ष 2019 में लोकसभा चुनाव होगा। 2014 में देश में भाजपा के सामने करारी शिकस्त पाने वाली कांग्रेस 2019 लोकसभा चुनाव को लेकर किसी लापरवाही के मूड में नहीं है। चूंकि उत्तर प्रदेश का लोकसभा में प्रधिनिधित्व सबसे अधिक है। ऐसे में कांग्रेस का ज्यादा ध्यान यूपी में अपनी पैठ मजबूत करने की ओर अधिक है। सूत्रों की माने तो बसपा में ऊंचे ओहदे पर रहे एक कद्दावर नेता का कांग्रेस में शामिल होना लगभग तय है, वहीं कद्दावर नेता के करीबी शामली जिले थानाभवन विधानसभा सीट से पूर्व विधायक अब्दुल वारिस राव भी कांग्रेस में शामिल होने की तैयारी कर चुके हैं। मालूम चला है कि अब्दुल वारिस राव और उनके करीबी कद्दावर नेता को बुधवार को दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के अलावा प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर और कांग्रेस सांसद गुलाम नबी आजाद के साथ मुलाकात होगी। इसके बाद 22 फरवरी कांग्रेस में शामिल होने की औपचारिक घोषणा की जाएगी।
गौरतलब है कि अब्दुल वारिस राव 2007 में थानाभवन विधानसभा क्षेत्र से रालोद के टिकट पर चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। उसके बाद वह 2012 विधानसभा चुनाव से कुछ समय पहले ही बसपा ज्वाइन की थी और 2012 और 2017 का विधानसभा चुनाव बसपा के टिकट पर ही लड़ा, हालांकि इन दोनों चुनाव में वह विजय नहीं हो पाए थे। अब्दुल वारिस राव के पिता राव अब्दुल राफे खां थानाभवन विधानसभा सीट से 1969 में चौधरी चरण सिंह की पार्टी से चुनाव जीते थे। उनके बाद अब्दुल वारिस राव ने भी अपनी शुरूआत रालोद से 2007 से की थी।
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शामली। कांग्रेस ने वर्ष 2019 में होने वाले चुनाव के तैयारियां शुरू कर दी है। कांग्रेस की नजर मुस्लिम वोट बैंक पर है। कांग्रेस का प्रयास है कि सभी वर्गों को साधकर ही भाजपा को चुनौती दी जा सकती है। इसी कड़ी में शामली में थानाभवन सीट से विधायक रहे अब्दुल वारिस राव कांग्रेस का हाथ थामेंगे। इसकी तैयारियां पूरी हो चुकी है। बस औपचारिक घोषणा बाकी है।
वर्ष 2019 में लोकसभा चुनाव होगा। 2014 में देश में भाजपा के सामने करारी शिकस्त पाने वाली कांग्रेस 2019 लोकसभा चुनाव को लेकर किसी लापरवाही के मूड में नहीं है। चूंकि उत्तर प्रदेश का लोकसभा में प्रधिनिधित्व सबसे अधिक है। ऐसे में कांग्रेस का ज्यादा ध्यान यूपी में अपनी पैठ मजबूत करने की ओर अधिक है। सूत्रों की माने तो बसपा में ऊंचे ओहदे पर रहे एक कद्दावर नेता का कांग्रेस में शामिल होना लगभग तय है, वहीं कद्दावर नेता के करीबी शामली जिले थानाभवन विधानसभा सीट से पूर्व विधायक अब्दुल वारिस राव भी कांग्रेस में शामिल होने की तैयारी कर चुके हैं। मालूम चला है कि अब्दुल वारिस राव और उनके करीबी कद्दावर नेता को बुधवार को दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के अलावा प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर और कांग्रेस सांसद गुलाम नबी आजाद के साथ मुलाकात होगी। इसके बाद 22 फरवरी कांग्रेस में शामिल होने की औपचारिक घोषणा की जाएगी।
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गौरतलब है कि अब्दुल वारिस राव 2007 में थानाभवन विधानसभा क्षेत्र से रालोद के टिकट पर चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। उसके बाद वह 2012 विधानसभा चुनाव से कुछ समय पहले ही बसपा ज्वाइन की थी और 2012 और 2017 का विधानसभा चुनाव बसपा के टिकट पर ही लड़ा, हालांकि इन दोनों चुनाव में वह विजय नहीं हो पाए थे। अब्दुल वारिस राव के पिता राव अब्दुल राफे खां थानाभवन विधानसभा सीट से 1969 में चौधरी चरण सिंह की पार्टी से चुनाव जीते थे। उनके बाद अब्दुल वारिस राव ने भी अपनी शुरूआत रालोद से 2007 से की थी।
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