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अब बगैर फिंगर प्रिंट नहीं होगी उर्वरक की बिक्री
Updated Sun, 20 Aug 2017 01:52 AM IST
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शामली।
केंद्र सरकार ने उर्वरकों पर अनुदान को लेकर पारदर्शिता बरतने के लिए उर्वरक विक्रेताओं के यहां पीओएस (प्वाइंट ऑफ सेल) मशीनें लगाने के निर्देश दिए हैं। 31 अगस्त तक सभी उर्वरक विक्रेताओं को यह मशीनें लगानी जरूरी हैं।
उत्तर प्रदेश कृषि निदेशालय ने सभी जनपदों के जिला कृषि अधिकारियों को इस संबंध में पत्र भेजे हैं, जिसमें कहा गया है कि उर्वरक विभाग द्वारा प्रत्येक रिटेल प्वाइंट पर पीओएस मशीन लगाकर उर्वरक की बिक्री की जाएगी। लाभार्थी को बिक्री उर्वरक की मात्रा की सूचना पीओएस के माध्यम से प्राप्त होने पर उर्वरक कंपनियों को शत प्रतिशत अनुदान भुगतान किया जाए। पूर्व में पीओएस मशीनों की स्थापना की तिथि 31 जुलाई रखी गई थी, लेकिन अब उसमें संशोधन कर 31 अगस्त तक मशीनें स्थापित करनी होगी। एक सितंबर के उपरांत पीओएस मशीनें के बगैर रिटेलर द्वारा उर्वरक की बिक्री अवैध मानी जाएगी।
--- किसान ऐसे खरीद पाएंगे उर्वरक
उर्वरक खरीदने वाले की पहचान आधार कार्ड से आधारित बायोमैट्रिक एथेन्टिकेशन, वोटर आईडी, किसान क्रेडिट कार्ड के द्वारा पीओएस मशीन के माध्यम से की जाएगी, जो उर्वरक विक्रेता पीओएस मशीन से उर्वरक की बिक्री से इंकार करेंगे, तो उनका लाइसेंस निरस्त कर दिया जाएगा।
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-- यह आएगी पारदर्शिता
पीओएस (प्वाइंट ऑफ सेल) मशीनों को ऑनलाइन सर्वे से जोड़ते हुए कंपनी में उपलब्ध उर्वरक की मात्रा और बिक्री किया उर्वरक का पूरा ब्योरा दर्ज होगा। कंपनी ने कितना उर्वरक बेचा और कितने किसानों ने उर्वरक खरीदा, उसका ब्योरा भी ऑनलाइन दर्ज होता रहेगा।
-- जिले की स्थिति
कृषि उपनिदेशक रामवीर कटारा ने बताया कि जनपद में 150 उर्वरक विक्रेता रजिस्टर्ड हैं। पीओएस मशीनें उपलब्ध कराने के लिए इफ्को को जिम्मेदारी दी गई है। इफ्को के स्थानीय अधिकारी शैलेंद्र सिंह इसके नोडल हैं। फिलहाल डिमांड के अनुसार 12 उर्वरक विक्रेताओं को पीओएस मशीनों का वितरण करा दिया गया है। अन्य विक्रेताओं के यहां भी मशीनें लगवाई जाएंगी।
किसानों की प्रतिक्रिया
शामली निवासी साहब सिंह का कहना है कि उर्वरक बिक्री में जितनी पारदर्शिता होगी, वह अच्छा रहेगा। यह व्यवस्था अच्छी है। क्योंकि उर्वरक बिक्री पर अनुदान पात्रों तक पहुंच सकेगा। मुंडभर निवासी महिपाल सिंह ने बताया कि उर्वरक बिक्री में पीओएस मशीनों के इस्तेमाल से धोखाधड़ी बंद होगी। अनुदान सीधे किसान के खाते में पहुंचेगा। खानपुर निवासी ब्रजवीर सिंह ने कहा कि जिस तरह गैस पर सब्सिडी खत्म कर दी गई, उसी तरह किसानों को गुमराह करके उर्वरक खरीदने में भी ज्यादा रकम खर्च करने की आदत डाल देगी, जिससे बाद में सब्सिडी खत्म होने का खतरा भी है। इससे भविष्य में किसानों को नुकसान उठाना पड़ेगा।
उर्वरक व्यापारियों की प्रतिक्रिया
उर्वरक विक्रेता जितेंद्र सिंह देशवाल का कहना है कि पीओएस मशीनों से परेशानी बढ़ेगी। आए दिन नेटवर्क की परेशानी से बिक्री भी प्रभावित होगी। रेलवे रोड स्थित उर्वरक विक्रेता शरद तायल ने कहा कि फिंगर प्रिंट से उर्वरक खरीदना किसानों के लिए परेशानी भरा होगा। वीवी इंटर कॉलेज मार्केट के व्यापारी राजकुमार ने कहा कि यह व्यवस्था सभी विक्रेताओं के यहां एकसाथ लागू होनी चाहिए, तभी योजना सफल हो सकती है। माजरा रोड निवासी पंकज कुमार ने कहा कि इससे सिर्फ किसानों को लाभ होगा, इंडस्ट्री और व्यापारी को इससे नुकसान ही होगा।
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केंद्र सरकार ने उर्वरकों पर अनुदान को लेकर पारदर्शिता बरतने के लिए उर्वरक विक्रेताओं के यहां पीओएस (प्वाइंट ऑफ सेल) मशीनें लगाने के निर्देश दिए हैं। 31 अगस्त तक सभी उर्वरक विक्रेताओं को यह मशीनें लगानी जरूरी हैं।
उत्तर प्रदेश कृषि निदेशालय ने सभी जनपदों के जिला कृषि अधिकारियों को इस संबंध में पत्र भेजे हैं, जिसमें कहा गया है कि उर्वरक विभाग द्वारा प्रत्येक रिटेल प्वाइंट पर पीओएस मशीन लगाकर उर्वरक की बिक्री की जाएगी। लाभार्थी को बिक्री उर्वरक की मात्रा की सूचना पीओएस के माध्यम से प्राप्त होने पर उर्वरक कंपनियों को शत प्रतिशत अनुदान भुगतान किया जाए। पूर्व में पीओएस मशीनों की स्थापना की तिथि 31 जुलाई रखी गई थी, लेकिन अब उसमें संशोधन कर 31 अगस्त तक मशीनें स्थापित करनी होगी। एक सितंबर के उपरांत पीओएस मशीनें के बगैर रिटेलर द्वारा उर्वरक की बिक्री अवैध मानी जाएगी।
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--- किसान ऐसे खरीद पाएंगे उर्वरक
उर्वरक खरीदने वाले की पहचान आधार कार्ड से आधारित बायोमैट्रिक एथेन्टिकेशन, वोटर आईडी, किसान क्रेडिट कार्ड के द्वारा पीओएस मशीन के माध्यम से की जाएगी, जो उर्वरक विक्रेता पीओएस मशीन से उर्वरक की बिक्री से इंकार करेंगे, तो उनका लाइसेंस निरस्त कर दिया जाएगा।
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-- यह आएगी पारदर्शिता
पीओएस (प्वाइंट ऑफ सेल) मशीनों को ऑनलाइन सर्वे से जोड़ते हुए कंपनी में उपलब्ध उर्वरक की मात्रा और बिक्री किया उर्वरक का पूरा ब्योरा दर्ज होगा। कंपनी ने कितना उर्वरक बेचा और कितने किसानों ने उर्वरक खरीदा, उसका ब्योरा भी ऑनलाइन दर्ज होता रहेगा।
-- जिले की स्थिति
कृषि उपनिदेशक रामवीर कटारा ने बताया कि जनपद में 150 उर्वरक विक्रेता रजिस्टर्ड हैं। पीओएस मशीनें उपलब्ध कराने के लिए इफ्को को जिम्मेदारी दी गई है। इफ्को के स्थानीय अधिकारी शैलेंद्र सिंह इसके नोडल हैं। फिलहाल डिमांड के अनुसार 12 उर्वरक विक्रेताओं को पीओएस मशीनों का वितरण करा दिया गया है। अन्य विक्रेताओं के यहां भी मशीनें लगवाई जाएंगी।
किसानों की प्रतिक्रिया
शामली निवासी साहब सिंह का कहना है कि उर्वरक बिक्री में जितनी पारदर्शिता होगी, वह अच्छा रहेगा। यह व्यवस्था अच्छी है। क्योंकि उर्वरक बिक्री पर अनुदान पात्रों तक पहुंच सकेगा। मुंडभर निवासी महिपाल सिंह ने बताया कि उर्वरक बिक्री में पीओएस मशीनों के इस्तेमाल से धोखाधड़ी बंद होगी। अनुदान सीधे किसान के खाते में पहुंचेगा। खानपुर निवासी ब्रजवीर सिंह ने कहा कि जिस तरह गैस पर सब्सिडी खत्म कर दी गई, उसी तरह किसानों को गुमराह करके उर्वरक खरीदने में भी ज्यादा रकम खर्च करने की आदत डाल देगी, जिससे बाद में सब्सिडी खत्म होने का खतरा भी है। इससे भविष्य में किसानों को नुकसान उठाना पड़ेगा।
उर्वरक व्यापारियों की प्रतिक्रिया
उर्वरक विक्रेता जितेंद्र सिंह देशवाल का कहना है कि पीओएस मशीनों से परेशानी बढ़ेगी। आए दिन नेटवर्क की परेशानी से बिक्री भी प्रभावित होगी। रेलवे रोड स्थित उर्वरक विक्रेता शरद तायल ने कहा कि फिंगर प्रिंट से उर्वरक खरीदना किसानों के लिए परेशानी भरा होगा। वीवी इंटर कॉलेज मार्केट के व्यापारी राजकुमार ने कहा कि यह व्यवस्था सभी विक्रेताओं के यहां एकसाथ लागू होनी चाहिए, तभी योजना सफल हो सकती है। माजरा रोड निवासी पंकज कुमार ने कहा कि इससे सिर्फ किसानों को लाभ होगा, इंडस्ट्री और व्यापारी को इससे नुकसान ही होगा।