फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Shamli News ›   परंपरागत खेती करने में पिछड़ रहे है जिले के किसान

परंपरागत खेती करने में पिछड़ रहे है जिले के किसान

Sun, 14 Jan 2018 12:13 AM IST
Updated Sun, 14 Jan 2018 12:13 AM IST
विज्ञापन
परंपरागत खेती करने में पिछड़ रहे है जिले के किसान
शामली।
विज्ञापन

जिले के किसान परंपरागत ढंग से खेती करने में पिछड़ रहे हैं। ज्यादातर किसान छिटकाव और बिखेरकर विधि से गेहूं की बुआई रहे हैं। हरियाणा सीमा से जुड़े कैैैराना व ऊन ब्लाक से जुड़े पांच से लेकर दस प्रतिशत बड़े किसानों का सीड ड्रिल विधि से गेहूं की बुआई करने का रुझान बढ़ा है।
जिले में 49 हजार हेक्टेयर गेहूं का रकबा है। जिले के शामली, थानाभवन, कांधला ब्लाक के 90 प्रतिशत किसान छिटकाव- बिखेरकर विधि से गेहूं की बुआई करते हैं। बिखेर कर या छिटकाव विधि से गेहूं की बुआई करने से खेत में बीज व खाद ज्यादा लगता है। पानी लगने से फसल गिरने का खतरा रहता है। हरियाणा सीमा से जुड़े जिले के ऊन व कैराना ब्लाक के पांच से लेकर दस प्रतिशत बड़े किसान गेहूं की बुुआई सीड ड्रिल की नई कृषि विधि की ओर रुझान बढ़ा है। सीड ड्रिल विधि से गेहूं की बुआई करने में किसानों की गेहूं की पैदावार में बढ़ोतरी हुई है। कुड़ाना के प्रगति शील किसान तरसपाल मलिक ने कहा कि छिटकाव विधि से गेहूं की खेती करने वाले संसाधन के अभाव में कर रहे हैं। गेहूं की बुआई करने वाली सीड ड्रिल मशीन 40 हजार रुपये कीमत की रही है। सीड ड्रिल मशीन को छोटा किसान नहीं खरीद पाता है। बड़ी जोत का संपन्न किसान 40 हजार रुपये खर्च कर सीड ड्रिल मशीन खरीद कर गेहूं बुआई का लाभ उठा रहे हैं। उनका कहना है कि गांव के दूसरे किसान से सीड ड्रिल मशीन लेकर अपने खेत में गेहूं की बुआई कर पाते हैं। उन्होंने सीड ड्रिल मशीन लेने केे लिए कृषि विभाग में आवेदन किया है। उनका कहना है कि सीड ड्रिल से गेहूं की पैदावार अच्छी बीज कम लगता है। खाद भी अपने निर्धारित स्थान पर जाकर पड़ता है। गेहूं गिरने की समस्या खत्म हो जाती है। कृषि विभाग के फसल विशेेेषज्ञ विरेंद्र सिंह का कहना है कि जिले के दस प्रतिशत किसान गेहूं की बुआई सीड ड्रिल विधि से कर रहे हैं। सीड ड्रिल खाद, बीज निश्चित स्थान पर पड़ता है। अच्छी खुराक मिलने से गेहूं के पौधो की जड़ें मजबूत हो जाती है। जल्दी ही गेहूं के पौधे तैयार होते हैं। गहराई में बीज व खाद पड़ने से फसल की बढ़वार व पैदावार बढ़ जाती है। उन्होंने सतई सिंचाई गेेेेहूं की क्यारी बनाकर करे। जरूरत से अधिक पानी लगने से फसल पीली पड़ जाती है। ज्यादा खाद डालने में फसल को नुकसान होता है। गेहूं की फसल को हलकी सिंचाई की आवश्यकता है। फसल में 16 डिग्री सेल्सियस औसत तापमान से पीला रतबा रोग तेजी से फैलता है। गेहूं की पत्ती पीला हल्दी जैैसा होता है।
विज्ञापन

गेहूं की अपेक्षा गन्ने में रुचि ले रहा किसान
शामली। उपनिदेशक कृषि रामवीर कटारा ने बताया कि जिले के किसान गेहूं की बुआई साल भर खाने के उद्देश्य से करते हैं। यहां का किसान गेहूं की अपेक्षा गन्ने की नकदी फसल की बुआई करने में रुचि ले रहा है। एक एकड़ में गेहूं बोने के लिए क्यों सीड ड्रिल मशीन को खरीदेगा। 35- 40 हजार की सीड ड्रिल पर 15 हजार रुपये का अनुदान दिया जा रहा है। प्रचार प्रसार के बावजूद सीड ड्रिल मशीन लेने के लिए किसान नहीं आ पा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed