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प्रदूषण से ‘कराह’ रही कालिंदी, हुक्मरान ‘बेबस’
Updated Thu, 11 Jan 2018 12:21 AM IST
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कैराना।
यमुना नदी प्रदूषण की मार से जूझ रही है। हालात दिनोंदिन भयावह होते जा रहे हैं। औद्योगिक कचरे और सिल्ट ने यमुना के स्वच्छ जल को काला कर दिया है। यमुना तट पर गंदगी का साम्राज्य है। इस कारण जलीय जीव-जंतु की जान भी आफत में है। यमुना नदी को लेकर शासन और प्रशासन स्तर पर उदासीनता बरती जा रही है।
महाभारत काल से यमुना का बड़ा महत्व है। इस नदी से लोगों की धार्मिक आस्था जुड़ी हुई है। विभिन्न धार्मिक अवसरों पर श्रद्धालु कैराना क्षेत्र में यमुना पर पहुंचकर पूजा-अर्चना करने और स्नान करने आते हैं। वहीं, खादर क्षेत्र में फसलों की सिंचाई के लिए भी यमुना नदी महत्वपूर्ण है। मगर, मौजूदा समय में यमुना नदी के हालात दयनीय है। प्रदूषण ने नदी को जकड़ लिया है। औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाले कचरे और सिल्ट को यमुना में डाला जाता है। इस समय यमुना का पानी काला हो गया है। गंदगी के ढेर नदी के तट पर लगे रहते हैं।
बदबूदार हो गया पानी
मौजूदा सरकार ने घोषणा की थी कि वह सत्ता में आने के बाद गंगा, यमुना व अन्य नदियों के हालात संवार देगी। स्वच्छता अभियान चलाकर नदियों को प्रदूषणमुक्त कराया जाएगा। लेकिन अभी तक जो दावे हुए हैं, उनकी पोल यमुना नदी खोल रही है। औद्योगिक कचरे और सिल्ट ने कैराना में यमुना नदी का पानी भी बदबूदार बना दिया है। प्रदूषण पर कोई रोक नहीं लग पाई है।
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हर साल मरते हैं जलीय जीव-जंतु
यमुना नदी पर साल में ऐसा दौर आता रहा है कि प्रदूषण ने उसके अस्तित्व पर काले बादल मंडरा दिए। पिछले सालों पर नजर डालें तो हर साल यमुना नदी में मछली व अन्य जीव-जंतु प्रदूषण के शिकार होकर दम तोड़ते रहे हैं। इस बार भी कोई उपाय न हुआ, तो ऐसा होने से इनकार नहीं किया जा सकता।
समिति बनाएं प्रशासन, तब रुके प्रदूषण
यमुना बचाव समिति के अध्यक्ष सोमपाल सिंह रामड़ा, ओमप्रकाश शर्मा, जनेश्वर निवासी मवी, पंजीठ निवासी राजपाल सैनी, बलजीत और पुष्कर सैनी का कहना है कि सहारनपुर मंडल में जब औद्योगिक क्षेत्र नहीं थे, तब यमुना की जलधारा स्वच्छ होती थी। जैसे ही औद्योगिक क्षेत्र लगे, तब से हालात बिगड़ रहे हैं। प्रशासन समिति बनाएं, तभी यमुना नदी से प्रदूषण को आजादी मिल सकती है।
मुझे इसकी जानकारी नहीं है। मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लिया जाएगा। इसके बाद संबंधित विभाग को इसके लिए आगाह किया जाएगा। - दुष्यंत कुमार मौर्य, एसडीएम कैराना।
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यमुना नदी प्रदूषण की मार से जूझ रही है। हालात दिनोंदिन भयावह होते जा रहे हैं। औद्योगिक कचरे और सिल्ट ने यमुना के स्वच्छ जल को काला कर दिया है। यमुना तट पर गंदगी का साम्राज्य है। इस कारण जलीय जीव-जंतु की जान भी आफत में है। यमुना नदी को लेकर शासन और प्रशासन स्तर पर उदासीनता बरती जा रही है।
महाभारत काल से यमुना का बड़ा महत्व है। इस नदी से लोगों की धार्मिक आस्था जुड़ी हुई है। विभिन्न धार्मिक अवसरों पर श्रद्धालु कैराना क्षेत्र में यमुना पर पहुंचकर पूजा-अर्चना करने और स्नान करने आते हैं। वहीं, खादर क्षेत्र में फसलों की सिंचाई के लिए भी यमुना नदी महत्वपूर्ण है। मगर, मौजूदा समय में यमुना नदी के हालात दयनीय है। प्रदूषण ने नदी को जकड़ लिया है। औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाले कचरे और सिल्ट को यमुना में डाला जाता है। इस समय यमुना का पानी काला हो गया है। गंदगी के ढेर नदी के तट पर लगे रहते हैं।
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बदबूदार हो गया पानी
मौजूदा सरकार ने घोषणा की थी कि वह सत्ता में आने के बाद गंगा, यमुना व अन्य नदियों के हालात संवार देगी। स्वच्छता अभियान चलाकर नदियों को प्रदूषणमुक्त कराया जाएगा। लेकिन अभी तक जो दावे हुए हैं, उनकी पोल यमुना नदी खोल रही है। औद्योगिक कचरे और सिल्ट ने कैराना में यमुना नदी का पानी भी बदबूदार बना दिया है। प्रदूषण पर कोई रोक नहीं लग पाई है।
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हर साल मरते हैं जलीय जीव-जंतु
यमुना नदी पर साल में ऐसा दौर आता रहा है कि प्रदूषण ने उसके अस्तित्व पर काले बादल मंडरा दिए। पिछले सालों पर नजर डालें तो हर साल यमुना नदी में मछली व अन्य जीव-जंतु प्रदूषण के शिकार होकर दम तोड़ते रहे हैं। इस बार भी कोई उपाय न हुआ, तो ऐसा होने से इनकार नहीं किया जा सकता।
समिति बनाएं प्रशासन, तब रुके प्रदूषण
यमुना बचाव समिति के अध्यक्ष सोमपाल सिंह रामड़ा, ओमप्रकाश शर्मा, जनेश्वर निवासी मवी, पंजीठ निवासी राजपाल सैनी, बलजीत और पुष्कर सैनी का कहना है कि सहारनपुर मंडल में जब औद्योगिक क्षेत्र नहीं थे, तब यमुना की जलधारा स्वच्छ होती थी। जैसे ही औद्योगिक क्षेत्र लगे, तब से हालात बिगड़ रहे हैं। प्रशासन समिति बनाएं, तभी यमुना नदी से प्रदूषण को आजादी मिल सकती है।
मुझे इसकी जानकारी नहीं है। मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लिया जाएगा। इसके बाद संबंधित विभाग को इसके लिए आगाह किया जाएगा। - दुष्यंत कुमार मौर्य, एसडीएम कैराना।